इतिहास का अध्ययन क्षेत्र - field of history in india
इतिहास का अध्ययन क्षेत्र - field of history in india
मानव जीवन के भूतकाल के सत्य को खोजना, उस सत्य की सामग्री को वैज्ञानिक पद्धति से संकलित करना और प्राप्त जानकारी को तार्किक रूप से, कालगणना को ध्यान में रखकर व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना इतिहास का एक अन्य स्वरूप है एवं उसे प्रभावी परिणामजनक एवं व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना भी इतिहास के स्वरूप का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसी कारण Approaches of History नामक ग्रंथ में फाइनबर्ग कहते हैं कि “भूतकाल की मृत जानकारी को नीरस तरीके से प्रस्तुत करना इतिहास लेखन की विशेषता नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस जानकारी पर भाष्य कर उस ऐतिहासिक प्रसंग का वर्णन रोचक ढंग से कर घटना को जीवंत कर देना ही इतिहास का स्वरूप होना चाहिए।" अतः स्पष्टतः इसका अर्थ यह कि इतिहास का स्वरूप दो प्रकार का होता है वैज्ञानिक एवं कलात्मक अर्थात् इतिहास विज्ञान भी है और कला भी।
इतिहास का अध्ययन क्षेत्र
भूतकालिक समाज संस्कृति एवं सभ्यता का चित्रण करना ही इतिहास का उद्देश्य होता है। किसी भी संस्कृति एवं सभ्यता से संबंधित भौगोलिक दशा वातावरण, आर्थिक व्यवस्था, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक, संवैधानिक कानून, न्याय व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था आदि का विवरण इतिहास में आवश्यक हो जाता है। इतिहासकार से अपेक्षा की जाती है कि इन सभी विषयों का उचित विवरण समाज के समक्ष प्रस्तुत करे। यदि संस्कृति एवं सभ्यता का क्षेत्र विस्तृत है तो इतिहासकार के लिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर देना संभव नहीं है। इसीलिए आधुनिक इतिहासकारों ने इतिहास के अध्ययन क्षेत्र का वर्गीकरण किया है। इतिहास के अध्ययन क्षेत्र का यह वर्गीकरण वैज्ञानिक युग की देन है। ऐतिहासिक अन्वेषण की आधुनिक विधियों ने इतिहास के सामान्य ज्ञान की अपेक्षा विशिष्ट ज्ञान की उपादेयता को सिद्ध किया है। परिणामस्वरूप इतिहास का विभाजन न केवल प्राचीन मध्ययुगीन तथा आधुनिक काल में किया गया है बल्कि इसके अंतर्गत अनेक छोटी-छोटी शाखाओं पर शोध करके इतिहासकारों ने विशिष्ट ज्ञान प्राप्त किया है। इस प्रकार इतिहास का अध्ययन क्षेत्र निरंतर विकसित होता जा रहा हैं।
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