प्रश्नावली के दोष - flaws of the questionnaire
प्रश्नावली के दोष - flaws of the questionnaire
1) डाक द्वारा प्रेषित की गई सभी प्रश्नावलियों में से सामान्यतः 40 से 50 प्रतिशत या उससे भी कम ही वापस आती हैं। परिणामस्वरूप इतने कम प्रत्युत्तरों से प्राप्त सूचनाएँ अधिकांशतः सीमित प्रामाणिकता वाली होती हैं।
2) प्रश्नावली का इस्तेमाल सामान्यतः शिक्षित उत्तरदाताओं से ही सूचनाओं के संकलन हेतु किया जा सकता है।
3) प्रश्नावली से प्राप्त सूचनाएँ प्रायः विश्वसनीय नहीं होती हैं क्योंकि उत्तरदाता अपनी व्यक्तिगत व सामाजिक प्रतिष्ठा को ध्यान में रख कर वास्तविकता को या तो प्रस्तुत नहीं करते अथवा उसे पथभ्रमित कर प्रस्तुत करते हैं।
4) ऐसे उत्तरदाताओं पर जो कि प्रश्न का अनुपयुक्त अर्थ लगाते हैं या अधूरे या अनिश्चित उत्त देते हैं, कोई नियंत्रण नहीं होता।
5) प्रश्नावली में अवलोकन का अभाव होने के कारण सूचनाएँ उतनी यथार्थ नहीं प्राप्त हो पाती हैं।
6) प्रश्नों का अर्थ न समझ पाने के कारण भी उत्तर नहीं प्राप्त हो पाते हैं।
7) प्रश्नावली को यदि शीघ्रता अथवा लापरवाही से भरा गया हो तो अस्पष्टता के कारण भी उत्तर अनुपयोगी हो जाते हैं।
8) भिन्न-भिन्न स्तरीय समाज वाले लोगों पर प्रश्नावली का प्रयोग संभव नहीं है।
9) कई बार उत्तरदाता व्यक्तिगत व गोपनीय प्रकार के प्रश्नों या विवादास्पद विषयों से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर लिखित रूप में नहीं देना चाहते।
10) कई बार कुछ जटिल और नाजुक समस्याओं पर वाक्यात्मक प्रश्न बनाना भी दुष्कर कार्य होता है।
11) कई बार उत्तरदाता अपने पहले दिए या मूल उत्तरों को यह देखने पर कि उनके बाद के प्रश्नों के लिए दिए उत्तर पहले उत्तरों के प्रति विरोधाभासी हैं, संशोधित कर देते हैं।
वार्तालाप में शामिल हों