ज्ञानवादी सिद्धान्त - gnostic theory

ज्ञानवादी सिद्धान्त - gnostic theory

 ज्ञानवादी सिद्धान्त - gnostic theory


अभिप्रेरणा के ज्ञानवादी सिद्धान्त को मानने वाले लेविन, वर्दीहमर, हाइडर, फैस्टिंजर, न्यूकाम्ब और हैलसन थे। अभिप्रेरणा के ज्ञानवादी सिद्धान्त घटनाओं के ज्ञान तथा पूर्णज्ञान पर केन्द्रित है। इसके अनुसार हम समझ, विचार तथा निर्णय द्वारा उन सापेक्षित-मूल्यों को चुन लेते हैं जो हमारे व्यवहार को अनुशासित करते हैं। हम उन विश्वासों, विचारों तथा आशाओं का निर्माण करते हैं जो हमारे लक्ष्य 3 अनुगामी व्यवहार का नियम करते हैं। ज्ञानवादी आदर्श इस कल्पना पर निर्मित किये गये हैं। कि किसी वस्तु के सम्बन्ध में लोगों की अपनी-अपनी पसन्द होती है। किसी भी व्यक्ति द्वारा प्राप्त परिणाम उसके चुनावों तथा उन घटनाओं पर आधारित होता है जो उसके नियन्त्रण से परे होती है। अतः जब कोई व्यक्ति उन विकल्पों में से चुनता हैं जिनके परिणाम अनिश्चित हों, तो इसमें कुछ खतरा भी रहता है और यह अपने आप में अभिप्रेरक है। ज्ञानवादी सिद्धान्त व्यक्ति द्वारा विकल्पों में किये गये चुनाव को उसमें काम कर रही कार्य-शक्ति पर आधारित मानते हैं।