स्वास्थ्य नीति और कार्यक्रम - Health Policy and Programs
स्वास्थ्य नीति और कार्यक्रम - Health Policy and Programs
सरकार ने वर्ष 1983 में अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति निर्मित की है, जिसमें विकेन्द्रीकृत और समेकित तरीके से परामर्शतंत्र सहित विस्तृत प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख सेवाओं, विशेषज्ञता तथा अति विशेषज्ञता सुविधाओं समेत एक सही व्यापक तंत्र स्थापित करने के बारे में बात की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 1983 में, विस्तृत प्राथमिक देखरेख सेवाओं के सार्वभौम उपबंध के माध्यम से वर्ष 2000 तक सभी के लिए स्वास्थ्य प्रदान करने की व्यवस्था की गई थी, जिसे हम कई कारणों से प्राप्त नहीं कर सके। वर्ष 2002 में, अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति निर्मित की गई जिसमें क्षमता के वास्तविक विचारों के आधार पर देश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं कीविस्तृत उपलब्धता को अधिक से अधिक बनाने पर जोर दिया गया है। मौजूदा नीति में विकेन्द्रीकृत स्तर पर और अधिक जन स्वास्थ्य संस्थान स्थापित करने का प्रयास किया गया है। वर्ष 2002 के लिए दर्शाई गई जनसंख्या के अनुसार अनुमान है कि एस. सी. पी. एच.सी./सी. एच. सी. की संख्या में 16 प्रतिशत की कमी है जो सी.एच.सी. के मसले में मात्र 58 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2002 में कई राज्यों के मध्य अंतराल का पता लगाने के साथ-साथ, ग्रामीण शहरी विभाजन में भी अंतराल को मालूम किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को पर्याप्त लचीलेपन के साथ तैयार किया जाता है जिससे कि राज्य जन स्वास्थ्य प्रशासनों को अपनी जरूरतों के अनुसार अपने-अपने कार्यक्रमों को समन्वित करने की अनुमति प्रदान की जा सके। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम का कार्यान्वयन राज्य सरकारों के विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य तंत्र की सहायता से किया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2002 में भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी में अधिकतम चिकित्सकों का इस्तेमाल करने की संभावना का पता लगाया गया है, जिन्होंने राज्य अथवा केंद्रीय जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में अपने विषयों में औपचारिक लिया है जिससे कि देश में बुनियादी स्वास्थ्य देखरेख पहुँचने में संवर्धन किया जा सके। पंचायती राज संस्थानों के विभिन्न स्तर, स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यक्रम और निधियों में संलिप्त हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य 2002 में भी मेडिकल और डेंटल कालेजों के भौगोलित विस्तार में और इन संस्थाओं में शिक्षा के असमान स्तू में असमानताओं को दूर करने के लिए पहलों की सिफ़ारिश की गई है। इसमें शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध असमान सुविधाओं परजोर दिया गया है जो मलिन बस्तियों और अनियोजित आवासों में रहने वाले समुदायों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। वैश्वीकरण के शुरू होने में तैयार सामान्य औषधियों और टीकों की उपलब्धता पर इसके प्रभाव के कारण, इस नीति में देश की भावी स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करनेका सुझाव प्रस्तुत किया गया है। सूचना, शिक्षा और संचार, निवारक और रोगहर स्वास्थ्य देखरेख के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। यह क्षयरोण (टी.बी), कुष्ठ मोतियाबिंद अंधता कार्यक्रमों के लिए रोगहर मार्गदर्शी सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करने और एच.आई.वी./एड्स तथा अन्य जीवनशैली के रोगों का निवारण करने के लिए विशेषरूप से महत्वपूर्ण हैं। यह नीतिसूचना, शिक्षा, संचार कार्यनिति को प्रदर्शन करते समय देश में उच्च निरक्षता दर जैसी समस्याओं पर जोर देती है। नीति में विद्यालय और कालेजों के विद्यार्थियों के लिए लक्ष्य रखने का प्रयत्न किया गया है जिससे कि 'स्वास्थ्य संवर्धन' के व्यवहार के सामान्य स्तर में सुधार किया जा सके।
प्रशासनिक पहलू
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय नॉडल संस्था है जो अनेक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का नियोजन करती है। भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा पद्धति में, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों का एक बहुत बड़ा ढांचा फैला हुआ है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (2005-12) सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, जिसमें पूरे देश में ग्रामीण जनसंख्या को प्रभावपूर्ण स्वास्थ्य देखरेख प्रदान करने की आशा की गई है और उन 18 राज्यों पर विशेष जोर दिया गया है, जिनमें कमजोर जन स्वास्थ्य संकेतक और/अथवा कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी स्वरूप है। यह मिशन सरकार की प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है, जिससे कि स्वास्थ्य पद्धति में सुधार किए जा सके और उन नीतियों का संवर्धन किया जा सके जो देश में जन स्वास्थ्य प्रबंधन एवं सेवा वितरण को सुदृढ़ता प्रदान करती हैं। इसका एक मुख्य तत्व प्रत्येक गाँव में एक महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता की व्यवस्था सुनिश्चित करना है, पंचायत की स्वास्थ्य और स्वच्छता समितीकी अध्यक्षता में एक स्थानीय टीम के माध्यम से एक ग्राम स्वास्थ्य योजना तैयार करना है, प्रभावी रोगहर देखभाल के लिए ग्रामीण अस्पताल मजबूत करना और ऊर्ध्वाधर स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रमों और निधियों तथा बुनियादी स्वरूप के अभीष्टतम इस्तेमाल के लिए नीतियों का एकीकरण करना, एवं प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के वितरण को मजबूत करना है।
इसका प्रयोजन जिला स्वास्थ्य योजना के माध्यम से सफाई और स्वच्छता पोषण और सुरक्षित पेयजल जैसे स्वास्थ्य निर्धारण के साथ निर्धारण के साथ सरोकारों का प्रभावपूर्ण एकीकरण करना है। इसमें स्वास्थ्य के जिला प्रबंधक के कार्यक्रमों के विकेन्द्रिकरण की आशा आपेक्षित की जाती है। यह अंतर्राज्यीय और अंतरजिला असमानताओं खासकर 18 उच्च लक्षित राज्यों के असमानताओं को दूर करने का प्रयत्न करता है, जिसमें जन स्वास्थ्य मूलस्वरूप की आपूर्ति आवश्यकताएं भी सम्मिलित हैं। इसमें समयबद्ध लक्ष्यों को स्पष्ट किया गया है और उनकी प्रगति पर सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें ग्रामीण लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को समान सस्ती जवाबदेह और प्रभावी प्राथमिक देखरेख तक पहुँच में सुधार करने का प्रयत्न किया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य प्रबंधन (NRHM) के लक्ष्य निम्न उल्लेखित किए गए हैं -
• शिशु मृत्युदर और मातृ मृत्युदर अनुपात में कमी ।
• जन स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौम पहुँच जैसे महिला स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, जल, सफाई एवं स्वच्छता, प्रतिरक्षण और पोषण |
• स्थानीय रोगों समेत संचारी और असंचारी रोगों का निवारण और उन पर नियंत्रण |
• व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख तक समेकित पहुँचा।
• जनसंख्या का स्थितिकरण, लिंग और जनसांख्यिकीय संतुलन स्थानीय स्वास्थ्य परम्पराओं और मुख्यधारा आयूष को पुनर्जीवित करना स्वस्थ जीवन शैलियों का संवर्द्धन।
प्रमुख राष्ट्र स्वास्थ्य कार्यक्रम हैं
• राष्ट्रीय जल जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय फाइलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम
• संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय आयोडीन न्यूनता विकास नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम
• राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम
• सार्वभौम प्रतिरक्षीकरण कार्यक्रम
• राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम
• मधुमेय, सी. वी. डी. एवं आघात रोकथाम एवं नियंत्रण प्रायोगिककार्यक्रम
• राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम
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