गियासुद्दीन तुगलक का इतिहास - History of Ghiyasuddin Tughlaq

गियासुद्दीन तुगलक का इतिहास - History of Ghiyasuddin Tughlaq

 गियासुद्दीन तुगलक का इतिहास - History of Ghiyasuddin Tughlaq

गियासुद्दीन तुगलक

पंजाब के तत्कालीन सूबेदार गाजी मलिक गियासुद्दीन तुगलक ने अपने पुत्र जूना खाँ (तत्कालीन अमीर-ए-खुर्द) तथा समाना, सिविस्तान और मुल्तान के सूबेदारों के सहयोग से नासिरुद्दीन खुसरों शाह को पराजित कर मार डाला। सितम्बर, 1320 में उसने दिल्ली के तख्त पर अपना अधिकार कर लिया। सुल्तान बनते ही गियासुद्दीन तुगलक ने अलाई अमीरों को उनके पूर्व पदों पर पुनर्प्रतिष्ठित करके तथा अपने विश्वस्त समर्थकों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर अराजकता व अशान्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास किया। उसने भ्रष्ट अधिकारियों को अपदस्थ किया तथा योग्य कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पुरस्कृत किया। अल्प काल ही में उसने अपने राज्य की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया। उसकी धार्मिक नीति असहिष्णुता से ग्रस्त थी किन्तु कृषि विकास, उद्योग तथा व्यापार को प्रोत्साहन देने में उसने अपनी धार्मिक नीति को कभी आड़े नहीं आने दिया। सैनिक सुधार कर उसने अपनी सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर किया गियासुद्दीन तुगलक के काल में वारंगल तथा बंगाल में विरोधी शक्तियों का सफलतापूर्वक दमन किया गया तथा मंगोलों द्वारा उसके राज्य पर आक्रमण करने के प्रयास को निष्फल किया गया। बंगाल अभियान से लौटने के बाद अपने पुत्र जूना खाँ द्वारा दिल्ली के निकट अफगानपुर में आयोजित स्वागत समारोह में अपने ऊपर तम्बू गिर जाने से गियासुद्दीन की सन् 1325 में मृत्यु हो गई।