इतिहास विज्ञान और कला का संगम - History of science and art

इतिहास विज्ञान और कला का संगम - History of science and art

इतिहास विज्ञान और कला का संगम - History of science and art


इतिहास की प्रस्तुति में इतिहासकार की कलात्मकता बड़ा महत्व रखती है। कल्पना भी इस प्रस्तुति में उसकी सहायता करती है। हम इतिहास को तथ्य तथा कल्पना का एक सुंदर समन्वय कह सकते हैं। वास्तव में इतिहासकार कल्पना की उड़ान से ही अतीत को टटोलता है, तथ्यों को संजोता है और यथार्थ का अंकन करते समय वह विवरण को कलात्मक ढंग से उसे सरस बनाता है। इस प्रकार इतिहास कला की कलम से लिखा जाता है। फलतः इतिहास में कला का तत्व होता है किंतु इतिहासकार की कल्पना कवि की कल्पना से भिन्न होती है। कवि की कल्पना जहाँ कोरी होती है, वहाँ इतिहासकार की कल्पना जमीन से जुड़ी होती है।






इस तरह इतिहास को कला एवं विज्ञान का सम्मिश्रण कहा जा सकता है इतिहास के वैज्ञानिक तथ्य कला सरस कलम से प्रस्तुत होते हैं, जिससे उसमें सजीवता आ जाती है इतिहास की वैज्ञानिकता के प्रति आस्थावान जे. बी. ब्यूरी ने भी यह स्वीकार किया है कि इतिहास विज्ञान तथा कला का सुंदर सम्मिश्रण है इतिहास की नीरसता को कला के द्वारा ही सरस बनाया जा सकता है। यद्यपि इतिहास का स्वरूप वैज्ञानिक हो पर उसकी प्रस्तुति कत्तापरक ही होनी चाहिए। वैज्ञानिक इतिहास ब कलापरक एवं सरस सीमा में होगा तभी वह आगामी पीढ़ी के लिए उपयोगी होगा।



आदिकाल से आधुनिक युग तक इतिहास क्षेत्र का स्वरूप निरंतर परिवर्तनशील रहा है। समय के साथ-साथ इतिहासकार की दृष्टि में जिस तरह परिवर्तन आता गया उसी तरह इतिहास विषय के अध्ययन संबंधी कल्पनाओं में भी परिवर्तन आया। फलस्वरूप इतिहास लेखन के विषय भी बदलते गए। इस दृष्टि से वॉल्श का यह कथन उचित है कि "History as we know it today as a developed branch of leaming- is a comparatively new thing. It scarcerly existed before the 19th century." अर्थात् इतिहास जिसे हम आज ज्ञान की एक विकसित विधा के रूप में जानते हैं, वास्तव में अन्य विषयों की तुलना में एक नवीन विषय है। 19वीं शताब्दी से पहले तो इसका अस्तित्व अज्ञात ही था। इतिहास के विकसित स्वरूप का एकमात्र आधार विभिन्न युगों के सामाजिक मूल्य तथा उनकी सामाजिक आवश्यकताएँ रही हैं। प्रारंभ में इतिहास चिंतन का उगम अतृत जानतृष्णा को तुम करने के उद्देश्य से हुआ था। इस उद्देश्य से प्रेरित होकर प्राचीन इतिहासकारों ने इतिहास का अध्ययन किया।


प्रारंभ में यूनानियों ने इतिहास लेखन के लिए प्रमुख रूप से राजनीतिक घटनाओं आंदोलनों एवं युद्धों के विषयों का चयन किया क्योंकि ये घटनाएँ ध्यानाकर्षक एवं राजनीतिक थीं। इसके अलावा उन दिनों में यातायात के साधन तथा संचार माध्यम अत्यंत अल्प होने के कारण समकालीन अथवा निकट भूतकाल की घटनाओं को उन्होंने अपने वर्णन का विषय बनाया। राजनीतिक घटनाओं में लोगों की रुचि होती थी और उस विषय में जानकारी सरलता से प्राप्त भी हो जाती थी। फलस्वरूप हेरोडोट्स, ब्यूसिडाइड्स एवं रोमन इतिहास लेखकों द्वारा निकट भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का वर्णन किया परिष्कृत होने के बावजूद कला अथवा साहित्य की शाखा है। क्रोचे के अनुसार कला न तो आनंद के आदान-प्रदान का साधन है और न प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण बल्कि यह व्यक्तिगत ज्ञान की दृष्टि की अभिव्यक्ति है। इस प्रकार कला भावनाओं की प्रक्रिया नहीं अपितु ज्ञान की अभिव्यक्ति है। क्रोचे का कथन है कि इतिहासकार का यह दायित्व है कि वह तथ्यों का कलात्मक प्रस्तुतीकरण करें। कॉलिंगवुड कहते हैं कि एक वैज्ञानिक, प्राकृतिक तथ्यों का मात्र अवलोकन करता है, पर एक इतिहासकार कलाकार के रूप में उनका अनुभव करता है। इतिहासकार और कलाकार में जब सामंजस्य की स्थिति बनती है तब ऐतिहासिक तथ्य कलापरक ढंग से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।









जी. आर. एल्टन का विचार है कि इतिहास कला है। उनकी दृष्टि में इतिहास को वैज्ञानिक विधियों से परिष्कृत करने के बावजूद उसके प्रस्तुतीकरण एवं व्याख्या में कलात्मक शैली की नितांत आवश्यकता होती है। ऐतिहासिक तथ्य प्रायः नीरस एवं निर्जीव होते हैं। इतिहास के भग्नावशेष तथा पुरावशेष भी नीरस ही होते हैं, पर इतिहासकार अपने कलापरक प्रस्तुती से उसे सरस बना देता है। निर्जीव ऐतिहासिक तथ्यों को इतिहासकार कल्पना से जोड़ता है, जिससे वे सजीव हो बोलने लगते है अपना इतिहास बयाँ करने लगते हैं। इतिहास की संरचना में कल्पना का अपना महत्व है। कॉलिंगवुड उसके इस परिकल्पनात्मक प्रस्तुतीकरण को ऐतिहासिक कल्पना कहते हैं।