भारत में समाज कल्याण प्रशासन का इतिहास - History of Social Welfare Administration in India
भारत में समाज कल्याण प्रशासन का इतिहास - History of Social Welfare Administration in India
समाज कल्याण का भारतीय परम्परागत दृष्टिकोण दया, दान, दक्षिणा, भिक्षा, साम्यभाव, स्वधर्म और त्याग की जरूरतों पर आधारित है, जिसका सार स्वं अनुशासन, आत्म बलिदान और दूसरों के लिए सोच-विचार है। प्राचीन काल में राजा और राजसी परिवार बाढ़, भूंकपों, आग, सूखे और अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी आपात स्थितियों में प्रभावित लोगों की मदद करते थे। प्रशासनिक दृष्टिकोण से भारत में सम्राट अशोक, हर्ष, चंद्रगुप्त मौर्य, अकबर, शेरशाह सूरी और फिरोज तुगलक प्रशासन के युग पुरुष थे जिन्होंने लोगों की सामाजिक जरूरतों का खयाल रखा, ब्रिटिश सरकार ने भी प्रशासनिक तंत्र स्थापित किया जिसका प्रयोजन प्रमुख रूप से कानून व्यवस्था बनाए रखना था। वर्ष 1829 में और 1856 में पारित अधिनियमों द्वारा सती प्रथा पर निषेध लगाने और विधवा विवाह की अनुमति देने के लिए समाज सुधार के कुछ समाधान किए गए। 1947 में हमारे देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचना के अनुकूल जरूरी बदलावों के साथ कमोबेश पुराना प्रशासनिक विन्यस जारी रहा। समाज कल्याण के क्षेत्र में, पांचवी पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत सरकार ने महसूस किया कि सरकार अकेले हमारे पूरे देश की असंख्यसामाजिक समस्याओं का खयाल नहीं रख सकती इसलिए इसने इस प्रक्रिया में लोगों की मदद के लिए स्वैच्छिक संगठनों की मदद प्राप्त करनी चाही। इस कारण अस् 1953 में एक अनोखे प्रशासनिक तंत्र को नियोजित किया गया। जिसका नाम केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड था, जो एक स्वायत्त बोर्ड था। इसी प्रकार राज्य स्तर पर समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड का प्रमुख प्रयोजन समाज कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वैच्छिक संगठनों को वित्तीय और तकनीकी मदद प्रस्तुत करना रहा है।
समाज कल्याण परियोजनाएं, योजनाएं और कार्यक्रम जो सरकार द्वारा संचालित हैं और जिन्हेंकमोबेश रूप में केंद्रीय सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है उनके निष्पादन के अलावा, राज्य सरकारें और संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन अपने-अपने क्षेत्रों में कल्याण सेवा कार्यक्रम बनाते हैं तथा उनका कार्यान्वयन करते हैं। राज्य सरकार/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन कल्याण सम्बन्धी जिम्मेदारियों और कार्यक्रमों को मुख्य रूप से अपने समाज कल्याण विभाग और स्वैच्छिक संगठनों की सहायता से कार्यान्वित करते हैं। ज्यादातर राज्यों में, या तो समाज कल्याण के लिए पूर्णकालीन सचिव होता है अथवा सचिव का एक प्रमुख विभाग होता है। इस प्रकार, समाज कल्याण योजनाओं का फैलाव एक से अधिक विभागोंनिदेशालयों में हैं। कुछ योजनाएं जैसे, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और अनुपूरक पोषण कार्यक्रम प्रत्येक राज्य में भिन्न-भिन्न हैं।
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