आवास नीति - housing policy

आवास नीति - housing policy

 आवास नीति - housing policy


हर व्यक्ति के लिए आवास एक मूलभूत आवश्यकता होती है। आजादी के भारत सरकार ने लगातार प्रयास किया है कि वह अपने नागरिकों को आवास की सुविधा प्रदान करें। सरकार इस हेतु बैंकों से सस्तेऋण, रियायती दरों पर भूखंड आयकर में छूट इत्यादि सुविधाएं प्रदान करती है। समाज के वंचिततबकों के लिए आवास हेतु प्रबंध करती है। भारत में पहली आवास नीति 1989 में बनायी गयी। इस नीति में जोर दिया गया कि आवास केवल एक वस्तु नहीं बल्कि एक उत्पादक निवेश भी है। इस संबंध में एक व्यपक परिप्रेक्ष्य में काम करने की आवश्यकता है। इस नीति की प्रमुख बातें निम्नानुसार हैं -





• 2000 तक सभी को भवन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया


• राष्ट्रीय भवन बैंक की स्थापना


• गृह निर्माण की गति को जनसंख्या वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में तेज करना


• गृह निर्माण हेतु बचत को प्रोत्साहन


• गृह निर्माण सहकारी समितियों को प्रोत्साहन


• गृह निर्माण कार्य हेतु विभिन्नमदों छूट का प्रावधान में


• भूमि, संसाधन, तकनीक और वित्त तक आसान पहुँच बना कर बेघर लोगों को आश्रय हेतु गृह निर्माण की सुविधा प्राथमिकता पर उपलब्ध कराना


• गृह निर्माण के साथ-साथ स्वच्छ पेयजल, मल-निस्तारण और अन्य पहलुओं पर जोर देना ताकि स्वस्थ पर्यावरण के जरिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके। 


• अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों मुक्त बंधुआ मजदूरों ग्रामीण भूमिहीन श्रमिकों और आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराना।


इसके पश्चात 1998 में घोषित राष्ट्रीय आवास नीति का लक्ष्य भी सभी लोगों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराना था। 

इस नीति के प्रमुख तत्वोंको निम्नानुसार बताया जा सकता है-






• कम लागत दर पर आवास निर्माण करना


• प्राथमिकता के आधार पर समाज के वंचित एवं हाशिए के वर्गोंको घर उपलब्ध कराना और संबंधित सुविधाएं प्रदान करना


• प्राथमिकता के आधार पर समाज के वंचित एवं हाशिए के वर्गोंको घर उपलब्ध कराना और संबंधित सुविधाएं प्रदान करना 


• गृह निर्माण से संबंधित विभिन्न आयामों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना


• गृह निर्माण में तकनीकी, वित्तीय एवं संसाधनों की समस्याओं को दूर करना


• निजी एवं सरकारी सहयोग के जरिए आवास निर्माण एवं सहकारिता आधारित आवास निर्माण को प्रोत्साहन