अनुकरण - अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व, सिद्धांत नियम एवं स्वरूप | Imitation - Meaning, Definition, Types, Significance, Principle, Rules

अनुकरण - अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व, सिद्धांत नियम एवं स्वरूप | Imitation - Meaning, Definition, Types, Significance, Principle, Rules and Forms

अनुकरण - अर्थ, परिभाषा, प्रकार, महत्व, सिद्धांत नियम एवं स्वरूप | Imitation - Meaning, Definition, Types, Significance, Principle, Rules and Forms

अनुकरण (Imitation )- अर्थ एवं स्वरूप

साधारण भाषा में अनुकरण का अर्थ नकल करना होता है। जब एक बच्चा या व्यक्ति दूसरों के व्यवहार को देखकर वैसा ही व्यवहार करता है तो इस प्रक्रिया को अनुकरण की संज्ञा दी जाती है। नकल किए जाने वाले व्यवहार का मतलब नकल करने वाला व्यक्ति जानता भी न हो, तो भी वह नकल करता है।

अनुकरण की प्रक्रिया सभी प्राणियों, पशु, पक्षियों के दैनिक जीवन में पाई जाती है। बंदरों में अनुकरण की योग्यताओं से तो हम भली भांति परिचित होंगे ही। यह देखा जाता है कि पशु, पक्षी भी अपने बच्चों को अनुकरण के लिये प्रेरित करते हैं।

उदाहरण

पिता को लिखते देख कर बच्चा भी पेंसिल से रेखाएं खीचना प्रारम्भ कर देता है।

पिता को किसी मूर्ति के सामने झुकते हुए देखकर बच्चा भी सिर झुकाने लगता

पिता को चश्मा लगाते देख कर पुत्र भी मौका देखकर चश्मा चढ़ा लेता है। सिनेमा में अभिनेता एंव अभिनेत्रियों के पहनावा को देखकर युवक-युवतियां उनकी नकल करने लगती हैं।

किसी मधुर संगीत को सुनकर व्यक्ति स्वतः अपनी उंगलियों से तान या थाप देना प्रारम्भ कर देता है।



अनुकरण की परिभाषाएं 

मैकडुगल के अनुसार:- "एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के क्रियाकलाप और शरीर संचालन की नकल मात्र को अनुकरण कहते हैं। "

लिन्टन के अनुसार:- "अनुकरण से तात्पर्य दूसरों के व्यवहारों की नकल करने से है, चाहे नकल करने वाले व्यक्ति को उस व्यवहार की जानकारी प्रत्यक्ष निरीक्षण द्वारा या किसी दूसरे द्वारा सुनकर या अधिक प्रगतिशील समाज में पढ़कर मिली हो।

इस प्रकार कह सकते हैं। अनुकरण एक क्रियात्मक प्रक्रिया है।

अनुकरण में किसी अन्य व्यक्ति के कार्य या व्यवहार की पुनरावृत्ति होती है। 

अनुकरण यंत्रवत होता है।

अनुकरण व्यक्ति द्वारा प्रयास करके किया जाता है।

अनुकरण अधिगम की सरल तकनीक है।

अनुकरण में तदात्मीकरण भी निहित हो सकता है।

व्यवहार या शारीरिक क्रिया ऐसी हो जिसे अनुकरण करने वाला व्यक्ति महत्व देता हो ।

अनुकरण चेतन तथा अचेतन दो प्रकार से किया जाता है। जब अनुकरण जानबूझकर या चेतन ढंग से किया जाता है तो उसे नकल (Copy) कहते हैं। U समेल निर्भरता (Matched dependent) कहलाता है।


अनुकरण के प्रकार

सहानुभूति पूर्ण अनुकरण (Sympathetic imitation)- किसी के दुख पीड़ा या कष्ट को देखकर व्यक्ति वैसी ही अनुभूति करके उसके जैसा व्यवहार करता है। जैसे किसी को रोता देखकर स्वयं भी रोने लगना।


विचार चालक अनुकरण (Ideo motor imitation)

किसी के व्यहार या कार्य को देखकर कोई अन्य व्यक्ति आन्तरिक रूप से प्रेरित होकर स्वतः वैसा व्यवहार करने लगता है जैसे गीत या नृत्य से प्रभावित होकर सिर हिलाना या पैर का थिरकना। इसे स्वाभाविक अनुकरण भी कहते हैं।

 

आरम्भिक अनुकरण (Rudimentary Imitation)

ऐसे अनुकरण छोटे बच्चों में प्रायः दिखाई पड़ते हैं। जैसे किसी केहँसने पर बच्चों का हँसना, जीभ निकालने पर जीभ निकालना या मुँह चिढ़ाने पर मुँह चिढ़ाना आदि इसके उदाहरण हैं। इसे निरर्थक अनुकरण भी कहते हैं।

तार्किक अनुकरण (Rational Imitation) इसमें अनुकरणकर्ता किसी व्यक्ति के व्यवहार का सोच समझ कर पुनरोत्पादन करता है। जैसे किसी प्रशिक्षु द्वारा अपने प्रशिक्षक के व्यवहार का अनुकरण करना।

 

ऐच्छिक अनुकरण (Voluntary Imitation)- यदि कोई बालक या व्यक्ति किसी अन्य का अनुकरण अपनी इच्छा से करता है तो उसे ऐच्छिक या उद्देश्यपूर्ण अनुकरण के हैं। इसे चेतन अनुकरण भी कहते हैं।

 

अभिनयात्मक अनुकरण (Dramatic Imitation) 

किसी के व्यवहार का अभिनय करना अभिनयात्मक अनुकरण कहते हैं- जैसे-बच्चों द्वारा पिता का चश्मा पहनना या राजा का व्यवहार आदि करना।

 

अनुकरण के नियम (Laws of Imitation)

टार्डे (1903) ने अनुकरण सम्बन्धी तीन नियमों का प्रतिपादन किया है:

अनुकरण ऊपर से नीचे की ओर चलता है:- समाज के धनी या प्रतिष्ठित वर्ग या वरिष्ठों द्वारा जो कार्य या व्यवहार पहले किया जाता है, उसका अनुकरण बाद में निचले स्तर के लोगों या बच्चों द्वारा किया जाने लगता है।

अनुकरण अन्दर से बाहर की ओर चलता है- अनुकरण पहले अपने परिवार तथा पड़ोस के लोगों का किया जाता है। इसके बाद ही बाहर के समूहों के लोगों का के अनुकरण किया जाता है।

 




अनुकरण ज्यामितीय क्रम में चलता है इसका आशय यह है कि अनुकरण की गति

काफी तीव्र होती है। अर्थात् अनुकरण की गति प्रारम्भ में जितनी होती है बाद में

उससे ज्यादा और आगे चलकर और भी अधिक हो जाती है।

 

अनुकरण के सिद्धांत  (Theories of Imitation) 

थार्नडाइक का सिद्धान्त ( Thorndike's Theory) व्यक्ति प्रायः उन्हीं कार्यों या व्यवहारों का अनुकरण करना चाहता है जिनके द्वारा उसकी किसी आवश्यकता की पूर्ति होती है। अनुमोदित व्यवहारों का अनुकरण अधिक एवं तिरस्कृत व्यवहारों का अनुकरण कम होता

है। प्रयत्न एवं त्रुटि (Trial & Error) सिद्धान्त के आधार पर करते हैं। अतः यदि बालक या व्यक्ति सीखने के लिए तत्पर एवं समुचित अभ्यास करता है तो अनुकरण सरल हो जाता है। यदि अनुकरण प्रभाव सुखद होगा तो उस व्यवहार की पुनरावृत्ति होगी। यदि परिणाम कष्टदायक होगा तो उसका दमन कर दिया जायेगा।

 

मिलर एवं डोलाई का सिद्धान्त (Miller and Dollard's theory)

मिलर एवं डोलाई (1941) के अनुसार अनुकरणमूलक व्यवहार पर पुरस्कार तथा दण्ड का प्रभाव पड़ता है।

पुरस्कृत व्यवहार का अनुकरण शीघ्रता से किया जाता है। दण्डित व्यवहार का अनुकरण नहीं किया जाता है। बच्चों द्वारा किए गये अनुकरण व्यवहार पुरस्कृत करने पर अनुकरण तीव्र गति से होने लगता है।

 

बन्दूरा का सिद्धान्त (Banduras Theory)

बन्दुरा (1963 1966 1969) के अनुसार बच्चे ऐसे व्यक्तियों या प्रतिमानों (Models) के व्यवहारों का अनुकरण करते हैं जो व्यवहार करते समय पुरस्कृत किए जाते हैं। जिन व्यवहारों के लिए वे दण्डित किए जाते हैं उन व्यवहारों का बच्चों द्वारा अनुकरण नहीं किया जाता है। बन्दूरा ने प्रयोग द्वारा यह बताया कि आक्रमकता का व्यवहार करने पर प्रतिमान (Model) को पुरस्कृत किया गया तब बच्चों ने भी आक्रामकता का अनुकरण किया। दण्डित करने पर आक्रमकता व्यवहार का अनुकरण नहीं किया गया।

 

बेगहॉट का सिद्धांत (Theory of Bagehot)

इस सिद्धांत के अनुसार अनुकरण करने की प्रवृत्ति व्यक्ति में जन्म से ही मौजूद होती है। इसका मतलब यह हुआ कि इन्होने अनुकरण को एक मूलप्रवृत्ति की श्रेणी में रखा है। इस तरह के अनुकरण के बारे में बेगहॉट का विचार बहुत कुछ मैकडुगल के विचार से मिलता जुलता है। क्योंकि मैकडुगल ने भी अनुकरण की प्रक्रिया को ऍक जन्मजात प्रक्रिया कहा है। इन्होंने यह भी कहा है कि बच्चों में अनुकरण की प्रवृत्ति अधिक होती है। क्योंकि बच्चे मूलप्रवृत्ति द्वारा अधिक नियंत्रित होते हैं परन्तु वयस्कों में अनुकरण करने की प्रवृत्ति बच्चों की अपेक्षा कम होती है क्योंकि इनके मूल स्वभाव पर सामाजिक सीखने का प्रभाव अधिक होता है। इन्होंने यह भी कहा है कि जनजाति के व्यक्तियों में सभ्य जाति के व्यक्ति की अपेक्षा अनुकरण करने की क्षमता अधिक होती है। क्योंकि इन व्यक्तियों का व्यवहार मूलप्रवृत्ति द्वारा ही अधिक नियंत्रित होता है तथा साथ ही साथ इनके स्वभाव पर विकास का प्रभाव कम पाया जाता है।

 




टाई का सिद्धांत (Theory of Tarde)

टाई ने भी अपने सिद्धांत में अनुकरण को एक मूलप्रवृत्ति ही कहा है। परन्तु साथ ही साथ इसमें अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों के भी महत्व को कुछ हद तक उन्होंने स्वीकार किया है। उन्होंने अनुकरण को इतना प्रभावकारी बतलाया है कि इनके बिना समाज का अस्तित्व संभव नहीं है। उनके अनुसार सचमुच में पूरा समाज ही एक साकार अनुकरण है।

टार्ड के अनुसार किसी समाज का विकास उनके सदस्यों के बीच होने वाली अन्तः क्रियाओं पर निर्भर करता है। इन अन्तःक्रियाओं के मुख्य तीन रूप होते हैं। पुनरावृत्ति विरोधी और अनुकूलन। इन तीनो तरह की प्रक्रियाओं में से प्रत्येक के तीन स्वरूप होते हैं- भौतिक स्वरूप प्राणीशास्त्रीय स्वरूप तथा सामाजिक स्वरूप टार्ड ने अनुकरण की व्याख्या करने के लिए पुनरावृति के इन तीनों स्वरूपों की चर्चा को ही पर्याप्त माना है उनके अनुसार पुनरावृति के तीन स्वरूप इस प्रकार होंगे भौतिक - पुनरावृत्ति प्राणी शास्त्रीय पुनरावृत्ति तथा सामाजिक पुनरावृत्ति हवा के माध्यम से हम प्रतिध्वनि सुनते है, यह भौतिक पुनरावृत्ति का उदाहरण है। अपने पुत्र या पुत्रियों में माता पिता के गुणों एवं लक्षणों का दिखाई देना प्राणीशास्त्रीय पुनरावृत्ति का उदाहरण है। एक व्यक्ति के व्यवहार एवं गुणों को दूसरे व्यक्ति द्वारा उसी रूप में दोहराया जाना सामाजिक पुनरावृत्ति का उदाहरण है।

 



टाई ने उन सामाजिक आर्थिक कारकों पर भी प्रकाश डाला है जिनसे प्रेरित होकर व्यक्ति नये-नये विचारों एवं रीति रिवाजो का अनुकरण करता है।


 अनुकरण का महत्व

सामाजिक अधिगम एवं समायोजन (Social Learning and Adjustment) सामाजिक अधिगम के लिए बच्चे अपने मित्रों तथा वरिष्ठों के कार्यों का अनुकरण करते हैं।

 

व्यक्तित्व का विकास (Development of Personality) अनुकरण के अध्ययन से व्यक्ि साहस एवं धैर्य की भावना विकसित करता है और सामाजिक मूल्यों एवं आदर्शों को ग्रहण करके व्यक्तित्व को गत्यात्मक संगठन (Dynamic organization) का रूप प्रदान करता है।

 

आवश्यकता संतुष्टि (Need satisfaction) व्यक्ति अपनी जिन आवश्यकताओं की पूर्ति अपने स्वयं के प्रयासों से नहीं कर पाता है, उनकी अपूर्ति अन्य लोगों के व्यवहारों का अनुकरण करके करता है। अतः व्यक्ति के जीवन में अनुकरण का प्रभाव तथा महत्व का काफी व्यापक है।

 

सामाजिक प्रगति (Social Progress) बच्चे, किशोर या प्रौढ व्यक्ति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के पथ पर अग्रणी लोगों के कार्यक्रमों का अनुकरण करके स्वयं को भी प्रगति के पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरणा प्राप्त करते हैं। यह प्रेरणा एक समूह या राष्ट्र दूसरे समूह या राष्ट्र से भी ग्रहण करते हैं।


अनुरूपता (Conformity) बालक अपने परिवार समूह या समाज के रीति-रिवाजों, नियमों तथा आदर्शों का अनुकरण करते हैं। इससे उनके व्यवहार में एक रूपता आती है। सामजिक मानकों (Norms) के प्रति सम्मान बढ़ता है।