भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ - India's five year plans

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ - India's five year plans

भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ - India's five year plans

प्रथम पंचवर्षीय योजना


1951 में योजना आयोग ने प्रथम पंचवर्षीय योजना के दो उद्देश्य निर्धारित किए थे - 


1. अर्थव्यवस्था में उत्पन्न असंतुलन को ठीक करना 


2. संतुलित विकास की प्रक्रिया के लिए खाद्य एवं कच्चेमाल के उत्पादन में वृद्धि करना, ऐसी योजनाओं को कार्यान्वित करना जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हो तथा सेवायोजना के अवसर बढ़ सके। समाज सेवा का विस्तार भी योजना का उद्देश्य था।


पहली पंचवर्षीय योजना में सार्वजनिक क्षेत्र हेतु 2069 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया गया था जिसे पुनः बढ़ाकर 2378 करोड़ रुपये कर दिया गया था किन्तु वास्तविक व्यय 1960 करोड़ रुपये ही रहा।


इस प्रकार यह मौलिक अनुमान से भी कम रहा। कृषि एवं सामुदायिक विकास पर लगभग 15% सिंचाई पर 16% बिजली पर 13% ग्रामीण तथा लघु उद्योगों पर 2% परिवहन तथा संचार पर 27% तथा समाज सेवाओं पर23% खर्च किया गया। इस अवधि में राष्ट्रीय आय में भी 18% की वृद्धि हुई। राष्ट्रीय आय 9110 करोड़ रूपये से बढ़कर 10800 करोड़ रूपये हो गयी। इसी योजना अवधि में 2 अक्टूबर 1953 को सामुदायिक विकास तथा राष्ट्रीय प्रसार सेवाएं एवं 1953 में केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड का गठन किया गया। इस योजना काल में निसंदेह प्रगति हुई लेकिन जो प्रगति होनी चाहिये थी वो नहीं हुई। बहुत कम लोगों को सेवा योजना का लाभ मिल सका भारी उद्योग भी पर्याप्त संख्या में नहीं स्थापित हो पाये। शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति नहीं हो सकी और सबसे बड़ा कारण इसमें जन सहभागिता का नहीं हो पाना था। 


द्वितीय पंचवर्षीय योजना


उद्देश्य


• समाजवादी ढाँचे की स्थापना 


• राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना


• औद्योगीकरण, भारी उद्योगों का विकास


• रोजगार के अवसरों की वृद्धि


• असमानता को कम करना


• आर्थिक विकेंद्रीकरण को प्रोत्साहित करना


यह योजना प्रमुखतः सिंचाई तथा परिवहन पर आधारित थी। इसमें प्रारंभिक विकास से सम्बंधित सार्वजनिक क्षेत्र में परिव्यय 4800 करोड़ रूपये तथा निजी क्षेत्र में 2400 करोड़ रूपये था। इसमें वास्तविक सार्वजनिक निवेश 4600 करोड़ तथा निजी निवेश 2150 करोड़ रूपये रहा। द्वितीय पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य 5% वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त करना था। 10 करोड़ लोगों को अतिरिक्त रोजगार प्रदान करना तथा औद्योगीकरण को बढ़ावा देना था। राष्ट्रीय आय में मामूली बढ़ोतरी हुई निर्धारित 25% की जगह 29% की वृद्धि हुईइस योजना की अवधि में पूंजीपति अधिक सुदृढ हुये और मूल्यों में पर्याप्त वृद्धि हुई।


तृतीय पंचवर्षीय योजना


उद्देश्य


• राष्ट्रीय आय और निवेश में वृद्धि करना


• कृषि उत्पादन को बढ़ाकर खाद्यान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना


• आधारभूत उद्योगों को विस्तार देना


• मशीनों के निर्माण के लिए दक्षता हासिल करना


• सेवा योजना में व्यवहारों की वृद्धि कर जनशक्ति का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना


• आय की असमानता को कम करना


• आर्थिक शक्ति का समानतापूर्ण वितरण सुनिश्चित करना


दूसरी पंचवर्षीय योजना की अपेक्षा इसमें 54 प्रतिशत अधिक धनराशि निर्धारित की गई थी। फिर भी इस योजना की अवधि में औद्योगिक क्षेत्र कृषि सामान्य शिक्षा एवं सेवायोजन के क्षेत्र में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई फिर भी तकनीकी शिक्षा में प्रगति उत्साहवर्धक रही। जनस्वास्थ्य चिकित्सा पिछड़े वर्गों एवं जनजातियों के कल्याण निम्न आय समूहों के लिए आवास इत्यादि के प्रावधान में वृद्धि हुई।


वार्षिक योजनाएं 1966-67,1967-68,1968-69)


31 मार्च 1966 को तीसरी पंचवर्षीय योजना की समाप्ति के बाद चौथी पंचवर्षीय योजना नहीं बन सकी। तीन वार्षिक योजना के बाद 1969 से चतुर्थ योजना प्रारंभ की जा सकी। इन वार्षिक योजनाओं का लक्ष्य उन कठिनाईयों को दूर करना था जो तीसरी योजना की अवधि के दौरान कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं तथा भारत पाकिस्तान युद्ध के कारण उत्पन्न हो गयी थी। इन वार्षिक योजनाओं में संबंधित क्षेत्रों पर व्यय निम्नलिखित रूप में हुआ कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों पर 16.7%, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रणपर 7.12% बिजली पर 18.03%, खाद्य एवं लघु उद्योग 1.9%, उद्योग तथा खनिज 22.8% परिवहन तथा संचय 18.5%, समाज सेवाओं पर 14.72% इन वार्षिक योजनाओं काकुल योजना व्यय 6625.4 करोड़ रूपये था। राष्ट्रीय आय में भी 1.1% वृद्धि हुई। 









चतुर्थ पंचवर्षीय योजना


उद्देश्य 


सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन तथा समाजवादी समाज की स्थापना करना इसका सामान्य लक्ष्य था।


इस योजना का विशिष्ट उद्देश्य निम्नलिखित था


I.  आयात को कम करते हुए निर्यात को बढ़ाना 


II. आत्मनिर्भरता प्राप्त करना


III. घाटे की अर्थव्यवस्था को दुरूस्त कर मूल्यको स्थिर रखने का प्रयास


IV. ग्रामीणों की आय में वृद्धि के लिए कृषि उत्पादन को बढ़ाना 


V. सामान्य आवश्यकताओं की वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि करना


VI. परिवार नियोजन द्वारा जनसंख्या वृद्धि में कमी लाना


VII. कृषि उत्पन्न तथा कृषि संसाधन (रसायनिक खाद, कीटनाशक, कृषि यंत्र) की व्यवस्था करना


VIII. मानव संसाधनों के विकास हेतु प्रयास


IX. परिवार नियोजन का विस्तार कर जनसंख्या वृद्धि में कमी लाना तथा जनता का जीवन स्तर ऊपर उठाना इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये 5% वार्षिक वृद्धि दर का लक्ष्य निश्चित किया गया। कृषि में 5.6% वार्षिक वृद्धि दर का लक्ष्य निर्धारित किया गया। 1970-71 के बाद पी. एल 480 के अंतर्गत खाद्यानों का आयात न किया जाय एवं उद्योगों में 8 से 10% बार्षिक वृद्धि हों निर्यात को 7% प्रतिवर्ष की दर से बढ़ाया जाय। अखाद्य सामग्री के आयात को 5% की दर से घटाया जाय। इस योजना का कुल परिव्यय 16,000 करोड़ रूपये का था।


पाँचवी पंचवर्षीय योजना


उद्देश्य


● निर्धनता को दूर करना


● आत्मनिर्भर समाज बनाना


● कृषि तथा उद्योग के क्षेत्र में वृद्धि करना


● आर्थिक शक्ति के केन्द्रियता को कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत बनाना। 


● समाज में सभी की न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए निर्धनता को कम करना इसके लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित करना


● 14 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं उनके घर के आसपास प्रदान करना 


● सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना।


● पेयजल, सड़क, भूमिहीनों को जमीन, ग्रामीण विद्युतीकरण की योजना के लिए प्रावधान करना निर्धनता और बेकारी जैसी समस्याओं की दिशा में सफलता नहीं मिली। 


कृषि उत्पादन बढ़ा परन्तु यह लक्ष्य से औसत रहा वार्षिक वृद्धि पहले की सभी योजनाओं से अधिक रही लेकिन जनसंख्या वृद्धि के कारण 5.2 प्रतिशत वृद्धि दर तो बनी रही लेकिन प्रति व्यक्ति आय वृद्धि दर मात्र 2.29 प्रतिशत ही रही।







छठी पंचवर्षीय योजना


उद्देश्य


• निर्धनता और बेकारी पर नियंत्रण करना एवं उसको कम करना


• अर्थव्यवस्था में सुधार लानावृद्धि दर को बढ़ाना तथा आधुनिकीकरण को प्रोत्साहन प्रदान करते हुए प्रौद्योगिकी तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना


• पारम्पारिक ऊर्जा के स्रोत के विकास के साथ ही साथ गैरपरम्परागत ऊर्जा स्रोतों का तीव्र गति से विकास करना। 


• सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अक्षम लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना


• जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के प्रयास


• शिक्षा और संचार का प्रसार कर सभी को विकास प्रक्रिया में शामिल करना


• आय एवं धन की असमानता को कम करना


• पर्यावरणीय संरक्षण को प्रोत्साहित करना 


इस योजना काल में समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार शुरू किया गया जिस ग्रामीण अंचलों में निर्धनता को दूर किया जा सके इस योजना अवधि के दौरान आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य 5.2% रख गया तथा प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि दर का लक्ष्य 3.3% प्रतिशत रखा गया। इसमें कुल योजना व्यय 172210 करोड़ रूपये ग्रामीण अंचलों में निर्धनता को दूर किया जा सके इस योजना अवधि के दौरान आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य 5.2% रखा गया तथा प्रतिव्यक्ति आय में वृद्धि दर का लक्ष्य 3.3% प्रतिशत रखा गया। इसमें कुल योजना व्यय 172210 करोड़ रूपये रखा गया। इस योजना के दौरान आर्थिक स्थायित्व आया तथा वृद्धि एवं विकास की गति तीव्र हुई।


सातवीं पंचवर्षीय योजना 


योजना लक्ष्य


विकास दर 5.00 प्रतिशत रखी गई 

कृषि विकास दर 4.00 प्रतिशत रखी गई

औद्योगिक विकास दर 7.00 प्रतिशत रखी गई 


उद्देश्य


● खाद्यान उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सिंचाई, सघन खेती एवं कृषि संबंधी नई प्रौद्योगिकी का विकास


● सेवा योजन के अवसरों को बढ़ाना 


● उत्पादकता में वृद्धि करना


● विकास कार्यक्रम में जनता की सहभागिता को बढ़ाना


● निर्धनता को दूर करना विभिन्न राज्यों, प्रदेशों, शहरों तथा गांवों के बीच असमानता को कम करना 


● खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता हेतु प्रयास करना


● शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और पोषाहार एवं आवास के क्षेत्रों में सामाजिक उपभोग के उच्च स्तर को प्राप्त करना


● महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना


● उर्जा संरक्षण पर बल देना तथा ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का विकास करना 


● पर्यावरण संरक्षण एवं परिवेशके लिए प्रयास करना


● निर्यात को बढ़ावा एवं आयात प्रतिस्थापन के माध्यम से आत्म निर्भरता में आंशिक वृद्धि करना 


● उद्योगों में प्रतिस्पर्धा, कार्य कुशलता एवं आधुनिकीकरण की दर में वृद्धि करना 


सातवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान ही राष्ट्रीय ग्रामीण सेवायोजन कार्यक्रम ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक सेवायोजन गारंटी कार्यक्रम का प्रावधान भी किया गया।


आठवीं पंचवर्षीय योजना


इस योजना में मानव विकास पर विशेष जोर दिया गया। इस योजना के लक्ष्य थे - 


1. रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हुए 2000 तक पूर्ण रोजगार के स्तर को प्राप्त करना 


2. जनसंख्या नियंत्रण के लिए जन सहभागिता को बढ़ावा देना 


3. 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के सभी लोगों की निरक्षरता को खत्म करना तथा प्राथमिक शिक्षा को सर्वसुलभ में प्रारम्भ बनाना


4. स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना


5. ऊर्जा, सिंचाई, संचार और परिवहन जैसे स्थायी विकास के आधारभूत ढाँचे को विकसित करना। 


6. खाद्यान्न में आत्म निर्भरता प्राप्त कर निर्यात हेतु प्रयास करना, आर्थिक सुधारों को इस अवधि किया गया।


7. आर्थिक सुधार प्रारंभ होने की वजह से अर्थव्यवस्था की औसत वृद्धिदर में बढ़ोतरी हुई। इस योजना अवधि के दौरान यह औसत वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही जबकि सातवीं योजना काल में यह 6% थी। 






नौवी पंचवर्षीय योजना


इस योजना में वृद्धि के साथ सामाजिक न्याय और समानता पर जोर दिया गया। नौवीं योजना का विशिष्ट लक्ष्य बाजार शक्तियों पर अधिक विश्वास और सार्वजनिक नीति की अनिवार्यताओं से उत्पन्न था। इसके उद्देश्य निम्नवत थे-


1. उत्पादक रोजगार कायम करने तथा गरीबी को दूर करने के लिए कृषि और ग्राम विकास को प्राथमिकता देना। 


2. कीमतों में स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को त्वरित करना।


3. समाज के कमजोर वर्गों का ध्यान रखते हुए सभी के लिए खाद्य और पौष्टिक सुरक्षा उपलब्ध कराना। 


4. न्यूनतम बुनियादी सेवाएँ निश्चित समय में उपलब्ध कराना। इसके अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ तथा पेयजल उपलब्ध कराना सभी को आवास यातायात एवं परिवहन द्वारा सभी से संबंध स्थापित करना।


5. जनसंख्या वृद्धि दर को रोकना एवं नियंत्रण प्राप्त करना। 


6. स्त्रियों और सामाजिक रूप से निर्बल वर्ग के लोगों को अधिक अधिकार संपन्न बनाकर सामाजिक आर्थिक परिवर्तन एवं विकास का एजेन्ट बनाना।


7. ऐसे साधनों को सबल बनाना जिससे आत्म निर्भरता को बढ़ाया जा सकता है। 


8. विकास की प्रक्रिया एवं पर्यावरण संपोषणीयता के बढ़ाने के लिए सामाजिक गतिशीलता और सभी स्तरों पर जन साहभागिता को बढ़ाना। 


9. जन सहभागिता को प्रोत्साहित एवं विकसित करना और इसके लिए सहभागी संस्थानों, सहकारिताओं और अन्य स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना।


इस पंचवर्षीय योजना में वार्षिक वृद्धि दर कम हो गयी। जहाँ आठवीं पंचवर्षीय योजना में वार्षिक वृद्धि दर 6.5% रही वही इस योजना में वृद्धि दर 5.35% हो गयी। कृषि विकास दर एवं विनिर्माण दर में भी कमी आ गयी।


दसवीं पंचवर्षीय योजना


इस योजना के अधिकांश लक्ष्य विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण के क्षेत्र में सामाजिक संकेतकों में महत्वपूर्ण सुधारोंसे संबंधित थे जिनका संबंध विकास तथा रोजगार से संबंधित लक्ष्यों की प्राप्ति से है। इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य थे.


1. महिला सशक्तिकरण की नीति लागू करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करना


II. बच्चों के लिए राष्ट्रीय नीति तथा चार्टर तैयार करना


बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय बाल आयोग का गठन


IV. दसवीं योजना में 8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर प्राप्त करने का प्रावधान किया गया। 








ग्यारहवी पंचवर्षीय योजना


इस योजना का लक्ष्य 7 वर्ष या उससे अधिक के बच्चे व व्यक्तियों के साक्षरता दर को 85% तक बढ़ाना और रोजगार को 700 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करना जैसे मुख्य लक्ष्य थे। 

इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य थे -


1. जीडीपी वृद्धि दर को 8% से बढ़ाकर 10% करना और इसे 12 वीं योजना के दौरान 10% बरकार रखना ताकि 2016-17 तक प्रतिव्यक्ति आय को दोगुना किया जा सके। 


2. कृषि आधारित वृद्धि दर को 4% प्रतिवर्ष तक बढ़ाना।


3. रोजगार के 7 करोड़ नए अवसर पैदा करना।


4. साक्षर बेरोजगारी की दर को 5% से नीचे लाना। 


5. 2011 से 2012 तक प्राथमिक स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में 2003-04 के 52.2% की तुलना में 20% की कमी करना। 


6. 7 वर्ष या उससे अधिक के बच्चों व व्यक्तियों की साक्षरता दर को 85% तक बढ़ाना। 


7. प्रजनन दर को घटाकर 21 के स्तर पर लाना।


8. बाल मृत्युदर को घटाकर 28 प्रति 1000 व मातृमृत्युदर को प्रति 1000 तक करना।


9. 2000 तक सभी के लिए पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना।


10.0.3 वर्ष की आयु में बच्चों के बीच कुपोषण के स्तर में वर्तमान के मुकाबले 50% तक की कमी लाना।


11. लिंग अनुपात को बढ़ाकर 2011-12 तक 935 व 2016-17 तक 950 करना। 


12. सभी गाँवों तक बिजली पहुंचाना।


13 नवम्बर 2007 तक प्रत्येक गाँव में टेलीफोन की सुविधा मुहैया कराना 


14. देश के वनक्षेत्र में 5.7% की वृद्धि कराना।।


15. देश के प्रमुख शहरों में 2011-12 तक विश्व स्थास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप वायु शुद्धता का स्तर प्राप्त करना ।


16, 2016-17 तक उर्जा क्षमता में 20% की वृद्धि करना।








बारहवीं पंचवर्षीय योजना


बारहवीं पंचवर्षीय योजना की अवधि 2012 से 2017 तक निर्धारित है। इसमें 10% वार्षिक वृद्धि दर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। 


12वीं योजना के लक्ष्य


1) योजना आयोग में वर्ष 2011 से 2017 तक चलने वाली 12 वीं पंचवर्षीय योजना में सलाना 10 फीसदी की आर्थिक विकास दर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 


2) वैश्विक आर्थिक संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। इसी के चलते 11 पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास दर की रफ्तार को 9 प्रतिशत से घटाकर 8.1 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।


3) सितम्बर 2008 में शुरू हुए आर्थिक संकट का असर इस वित वर्ष में बड़े पैमाने पर देखा गया है। यही वजह थी कि इस दौरान आर्थिक विकास दर घटकर 6.7 प्रतिशत हो गयी थी। जबकि इसमें पहले के तीन वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में नौ फीसदी से ज्यादा की दर में आर्थिक विकास हुआ था।