जलाउद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, बाजार नियंत्रण नीति एवं सैनिक उपलब्धियां - Jalauddin Khilji, Alauddin Khilji, Market Control Policy and Military Achievements
जलाउद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, बाजार नियंत्रण नीति एवं सैनिक उपलब्धियां - Jalauddin Khilji, Alauddin Khilji, Market Control Policy and Military Achievements
1287 ईसवी में सुल्तान बलबन की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद उसके अयोग्य वंशज मात्र तीन वर्ष तक ही सत्ता सम्भाल सके। जून, 1290 में सेनापति के रूप में उत्तर पश्चिमी सीमा पर मंगोलों का मुकाबला करने में प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका और तत्कालीन आरिज-ए-मुमालिक मलिक फ़िरोज़ खिलजी सुल्तान क्यूमर्स की हत्या कर स्वयं जलालुद्दीन फिरोज शाह के नाम से सुल्तान बन बैठा। 6 वर्ष तक जलालुद्दीन खिलजी का, 20 वर्ष तक अलाउद्दीन खिलजी का तथा 4 वर्ष तक कुतबुद्दीन मुबारक शाह का शासन रहा ।
खिलजी
शासकों में अलाउद्दीन खिलजी ने मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
अलाउद्दीन की नीतियों का प्रभाव परवर्ती शासकों की नीतियों पर स्पष्ट रूप से देखा
जा सकता है। शेरशाह अकबर यहां तक कि कुछ मायनों में ब्रिटिश भारतीय शासकों की
नीतियों पर भी उनका प्रभाव देखा जा सकता है।
दिल्ली सल्तनत में खिलजी वंश का शासन सन् 1290 से 1320 तक रहा। जलालुद्दीन
खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी तथा कुतबुद्दीन मुबारक शाह इस वंश के
प्रमुख शासक थे। जलालुद्दीन खिलजी एक उदार किन्तु शिथिल शासक था। उसके शासनकाल की
सबसे बड़ी उपलब्धि उसके भतीजे अलाउद्दीन के भिलसा तथा देवगिरि अभियान थे।
अलाउद्दीन खिलजी अपने उपकारी चाचा सुल्तान जलालुद्दीन की हत्या कर सुल्तान बना था।
उसने अपने विरोधियों का दमन करने में कभी भी देर नहीं की। अलाउद्दीन ने बलबन के
राजत्व के सिद्धान्त को अपनाया। उसने अमीरों की शक्तियों को क्षीण किया तथा उनकी
गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गुप्तचर नियुक्त किए। अलाउद्दीन ने धर्म को राजनीति
से अलग रखने में सफलता प्राप्त की। मंगोल समस्या का समाधान करना उसकी एक बड़ी
उपलब्धि थी। अलाउद्दीन की बाजार नियन्त्रण की नीति मुख्य रूप से राज्य के सीमित
संसाधनों में एक विशाल सेना के रख-रखाव को सम्भव बनाने के लिए अपनाई गई थी। किन्तु
इसके क्रियान्वयन में उसने जिस सक्षमता और व्यावहारिक बुद्धि का परिचय दिया उसकी
सभी प्रशंसा करते हैं। अलाउद्दीन दिल्ली के सुल्तानों में सबसे बड़ा विजेता था।
अलाउद्दीन ने गुजरात, रणथम्भौर, मालवा,
मेवाड़, जालौर और मारवाड पर विजय प्राप्त कर
उत्तर भारत की विजय का विस्तार किया। देवगिरि, वारंगल
द्वारसमुद्र और मदुरा जीतकर उसने दिल्ली सल्तनत का दक्षिण में विस्तार कर उसे एक
साम्राज्य का रूप दिया अलाउद्दीन की मृत्यु बाद उसके अयोग्य उत्तराधिकारी केवल 4
वर्ष और शासन कर सके। शक्ति के एकीकरण का दोषी अलाउद्दीन अपने वंश
के पतन के लिए एक सीमा तक स्वयं उत्तरदायी था।
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