माँग का नियम, विभिन्न रूप, निर्धारक तत्व - Law of Demand, Various Forms, Determining Elements

माँग का नियम, विभिन्न रूप, निर्धारक तत्व - Law of Demand, Various Forms, Determining Elements

माँग का नियम, विभिन्न रूप, निर्धारक तत्व - Law of Demand, Various Forms, Determining Elements

माँग का नियम

माँग से आशय

माँग का नियम

माँग सारणी तथा व्यक्तिगत माँग वक्र

माँग का स्वरूप

बाजार माँग वक्र

माँग के नियम के विभिन्न रूप

माँग में परिवर्तन

माँग के निर्धारक तत्व

माँग से आशय

'माँग' से क्या आशय है, पर विचार करना उचित होगा। किसी दिये गये

समय में दिये हुए मूल्य पर कोई उपभोक्ता, बाजार में किसी वस्तु की जो

विभिन्न मात्रायें क्रय करता है, उसे वस्तु की माँग कहते हैं।

किसी वस्तु की माँग वस्तु के मूल्य (P), उपभोक्ता की आय (Y), अन्य 'वस्तु वस्तुओं के मूल्य (P), रूचि तथा फैशन (T), सम्पत्ति (W) आदि पर निर्भर करती है। इसके बीच एक आश्रितता या फलनात्मक सम्बन्ध होगा जिसे हम माँग फलन कहते हैं। इसे फलन के रूप में हम इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं

P. = f (P, Y, P, T.......)

माँग का नियम

मार्शल ने माँग का नियम प्रतिपादित करते हुए कहा कि किसी वस्तु की माँगी गई | मात्रा तथा उस वस्तु के मूल्य के बीच विलोमात्मक सम्न्ध पाया जाता है तथा जैसे-जैसे किसी वस्तु का मूल्य गिरता जाता है, उसकी माँग बढ़ती जाती है तथा इसके विपरीत जैसे-जैसे वस्तु का मूल्य बढ़ता जाता है, उसकी माँग घटती जाती है। मार्शल के शब्दों में 'माँग का एक सामान्य नियम है किसी वस्तु की अधिक - मात्राओं में बिक्री के लिए उसके मूल्य में निश्चित रूप से कमी होनी चाहिए ताकि उसके अधिक क्रेता मिल सकें। दूसरे शब्दों में मूल्य के बढ़ने से माँग घटती है और मूल्य के गिरने से माँग बढ़ती है।" इस प्रकार मार्शल के अनुसार वस्तु की माँगी गई मात्रा (D) तथा वस्तु के मूल्य (P) के बीच विपरीत फलनात्मक सम्बन्ध पाया जाता है जिसे माँग का नियम कहते हैं।

• Dx = f (P) अन्य बातें समान रहें ...

. जहाँ P, तथा Y समान हैं। y

| माँग-नियम कुछ मान्यताओं पर आधारित है क्योंकि यह नियम तभी सत्य होगा जब अन्य बातें स्थिर रहें। ये निम्नलिखित हैं

- लोगों की आय यथास्थिर रहें। -

अन्य वस्तुओं के मूल्य स्थिर रहें।

- लोगों की स्वाद एवं अभिरूचि में परिवर्तन न हो।

माँग का स्वरूप

(1) सीमान्त उपयोगिता ह्रास नियम

. (2) समसीमान्त उपयोगिता नियम तथा माँग वक्र का नीचे दाहिनी ओर गिरना:- मार्शल के अनुसार उपभोक्ता अधिकतम सन्तुष्टि या संस्थिति की स्थिति में वहाँ होगा, जहाँ MU / P = MU an m

जबकि माँग वक्र नीचे दाहिनी ओर गिरता हुआ न हो, ऐसी स्थिति में मूल्य-माँग सम्बन्ध धनात्मक होगा। ये परिस्थितियाँ निम्नांकित होंगी

(क) प्रतिष्ठा सूचक वस्तुयें

(ख) गिफेन वस्तुयें

(ग) मूल्य में वृद्धि का डर तथा कमी की आशा

(घ) अज्ञान तथा भ्रम

(ङ) जीवन निर्वाह: (अनिवार्य वस्तुएँ) -

 

माँग के निर्धारक तत्व

(1) उपभोक्ता की आय तथा संचित धन की मात्रा

(2) रूचि, फैशन तथा रीति-रिवाजः उपभोक्ता की रूचि, प्रचलित फैशन तथा समाज के रीति-रिवाज का प्रभाव माँग पर पड़ता है।

(3) आय तथा धन का असमान वितरण

 (4) बाजार में उपभोक्ता की संख्या

(5) भविष्य में वस्तु के मूल्य में परिवर्तन की आशा

(6)जनसंख्याः जनसंख्या में वृद्धि के कारण भी माँग प्रभावित होती है। जनसंख्या बढ़ने से अनेक वस्तुओं की माँग बढ़ जाती है जैसे खाद्यान्नों की माँगा।

(7) मुद्रा की मात्रा में परिवर्तन

(8) स्थानापन्न तथा पूरक वस्तुओं की कीमत

(9) जलवायु: जाड़े के दिनों में ऊनी कपड़ों की माँग बरसात में छाते की माँग तथा गर्मी में शीतलता देने वाली वस्तुओं की माँग में वृद्धि जलवायु द्वारा माँग को प्रभावित करने के स्पष्ट उदाहरण हैं।

(10) व्यापार की दशा

(11) बचत तथा उपभोग की प्रवृत्ति

(12) औद्योगिक विकास