गुणात्मक शोध विधि के मुख्य चरण - Main steps of qualitative research method
गुणात्मक शोध विधि के मुख्य चरण - Main steps of qualitative research method
एरिकसन (1986) के अनुसार, 'पूर्वधारणाओं और निर्देश प्रश्नों को पहले से तैयार किया जा सकता है। लेकिन अनुसंधानकर्ता को आरंभ में ही यह नहीं मान लेना चाहिए कि विशेष रूप से कहाँ तक आरंभिक प्रश्न आगे के चरण का निर्धारण करेंगे।" गुणात्मक शोध विधि के प्रमुख चरणों को निम्नक्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है -
i. पूछताछ के व्यापक प्रश्नों की पहचान करना-
पहले, शोधकर्ता से यह आशा की जाती है कि वे सामाजिक व्यवस्थाओं से संबद्ध उन मामलों अथवा प्रश्नों को बताए जिसका निराकरण अथवा उत्तर अध्ययन क्षेत्र के द्वारा दिया जा सकता है। शोधकर्ता का मुख्य ध्यान किस सामाजिक घटना की सामान्य विशेषता की बजाय घटनाओं की विशिष्ट संरचना पर आकृष्ट होना चाहिए। प्रश्न न केवल घटनाओं अथवा तथ्यों के अध्ययन के लिए बल्कि किसी विशेष घटना अथवा प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों के दृष्टिकोण की पहचान करने के लिए भी पूछे जा सकते हैं।
ii. प्रारम्भिक स्तर के आँकड़ों को संकलित करना-
एक बार जब जांच के विस्तृत प्रश्नों की पहचान कर ली जाती हैं तो अध्ययन के तहत समस्याओं से सम्बन्धित सामाजिक और संगठनात्मक व्यवस्थाओं में समस्तभिन्नताओं की पहचान के लिए प्रयत्न किया जा सकता हैं। सामाजिक व्यवस्था जैसे ग्रामीण / जनजातीय समुदाय में घटनाओं के विशिष्टरूप से घटित होने की जांच करने से पूर्व स्थिति के विस्तृत संदर्भ में जांच शुरू की जा सकती हैं।
iii. आँकड़ों को संकलित करने के लिए प्रक्रियाएँ-
आँकड़े संकलित करने का कार्य विभिन्न प्रावस्थाओं में भागीदारों के प्रेक्षण द्वारा सम्पन्न किया जा सकता है। शोधकर्ता का परिचय अध्ययन की जाने वाली सामाजिक व्यवस्था के एक आंतरिक सदस्य/भागीदार के रूप में कराया जा सकता है। ये संभव है कि प्रणाली के वास्तविक भागीदार जैसे व्यक्ति, समुदाय के नेता और मुखिया अथवा सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष अध्ययन के लिए अवलोकनकर्ता जैसे कार्य करें। सभी प्रासंगिक और उपलब्ध स्रोतों और साधनों से आँकड़े संकलित किए जा सकते हैं यथा उपलब्ध साहित्य, डायरियों, रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों, चित्रों, फोटोग्राफ आदि का अध्ययन एवं कार्यक्रम से सम्बन्धित व्यक्तियों से परस्पर वार्तालाप और कार्यक्रमों/स्थितियों के सम्बन्ध में प्रत्यक्ष शोधकर्ता के अवलोकन / प्रेक्षण और अनुभव। एक क्षेत्र कार्यकर्ता के रूप में उन महत्वपूर्ण स्थितियों अथवा व्यवहारों के सोद्देश्यपूर्ण प्रतिदर्श का इस्तेमाल किया जा सकता हैं, जिनका अध्ययन किया जाना हैं और साथ ही उन व्यक्तियों का भी जिनसे बातचीत की जानी चाहिए।
iv. आँकड़े संकलित करने की युक्तियाँ-
आँकड़े संकलित करने के लिए विभिन्न युक्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता हैं, यथा- अवलोकित गई स्थिति पर नोट्स लेना, इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों जैसे वीडियो कैमरा और टेपरिकॉर्डर का इस्तेमाल करना, फोटो लेना और समस्या पर उपयुक्त दस्तावेज और साहित्य संकलित करना। प्रतिक्रिया करने वालों के विभिन्न समूहों से नियोजित अनौपचारिक साक्षात्कार/वार्तालाप किया जा सकता है और उनके मत और अनुभूतियों को साक्षात्कार के समय अथवा साक्षात्कार के तत्काल पश्चात रिकॉर्ड किया जा सकता है। क्षेत्र कार्य के अनुभवों के बारे में दैनिक डायरी में लिखने की भी जरूरत होती है।
V. अध्ययन के तहत मामले अथवा कार्यक्रम के संदर्भ में अपनी अनुभूतियों के अलग रिकार्ड बनाने पड़ते हैं। यथा -
• उस स्थिति में शोधकर्ता द्वारा क्या अवलोकित किया गया?
• समस्या / घटना के बारे में प्रतिक्रिया करने वाले की अनुभूति।
• व्यक्तियों और मुद्दे या कार्यक्रम में उनकी भागीदारी के बारे में।
vi. आँकड़ों का विश्लेषण-
आँकड़ों का विश्लेषण, गुणात्मक अध्ययनों में विवरणात्मक रूप से किया जाता है। अधिक विशिष्ट रूप से, आवृत्ति के आँकड़ें दो अथवा तीन मुखी संगत सारणियों में व्यवहार के पैटर्न को बताते हुए वर्णित किए जाते हैं। यदा-कदा सांख्यिकीय तकनीकों यथा- काई-वर्ग परीक्षण, मेन-व्हिटनी के दो सिरीय परीक्षणों अथवा श्रेणी क्रम सहसम्बन्ध तकनीकों का इस्तेमाल अध्ययन के तहत विशिष्ट स्थिति के संदर्भ में सम्बन्धों के कुछ पैटनों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
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