अभिप्रेरणा और पूर्वाग्रह - Motivation and Prejudice

अभिप्रेरणा और पूर्वाग्रह - Motivation and Prejudice

अभिप्रेरणा और  पूर्वाग्रह - Motivation and Prejudice 


अभिप्रेरणा

अभिप्रेरणा एक विशिष्ट आतंरिक कारक या दशा है जो क्रिया की पहल करती है या उसे बनाये रखती है। यह एक भावनात्मक क्रियात्मक - करक है जो कि चेतन एवं अवचेतन रूप से व्यक्ति के व्यवहार या लक्ष्य की ओर अग्रसारित करती है | अभिप्रेरणा से सम्बंधित विभिन्न सिद्धांत है जैसे- मनोविश्लेष्णात्मक सिद्धांत (फ्रायड), क्षेत्र या गेस्टाल्ट का सिद्धांत (कर्ट लेविन ), प्रकार्यात्मक स्वायत्ता का सिद्धांत (जॉन डीवी और ऑलपोर्ट) एवं आत्म कार्यान्वयन सिद्धांत (मैस्लो) का अध्ययन किया जाना समीचीन है |


सामाजिक सीख के द्वारा अभिवृत्ति को ग्रहण किया जाता है | सामाजिक विश्व के किसी भी पक्ष का मूल्यांकन अभिवृत्ति द्वारा ही किया जाता है। | यह जन्मजात नहीं होती है वरन इसका निर्माण सामाजिक सीख एवं सामाजिक तुलना के द्वारा सीखी गयी प्रक्रिया है | इसकी प्रक्रिया बहुधा स्थायी होती है । यह अभिवृत्ति व्यवहार से इतर होती है और सभी व्यक्तियों में एक सामान नहीं होती है ।


पूर्वाग्रह


पूर्वाग्रह एक प्रकार की मनोवृत्ति है जिसकी प्रकृति नकारात्मक है । किसी समूह है। के प्रति प्रतिकूल मनोवृत्ति व्यक्ति के स्थापित आदर्शों का प्रतिफल है । इसी के आधार पर वह किसी के प्रति पूर्व निर्णय कर लेता है । पूर्वाग्रह रुढीयुक्तियों, लोक कथाओं एवं पौराणिक कथाओं के सम्मिलन से बनती है। पूर्वाग्रह में स्थिरता पाई जाती है परन्तु ये स्थायी नहीं होती है अपितु इसमें परिवर्तन संभव है | पूर्वाग्रह के सामाजिक संस्कृतिक दृष्टिकोण के अंतर्गत प्रचार एवं शिक्षा को महत्वपूर्ण मन गया है जिससे पूर्वाग्रह को कम करने में सहायता मिलती है ।










साधारण शब्दों में कहें तो रुढीयुक्तियाँ एक मिथ्या वर्गीकरण करने वाली अवधारणा है |रुढीयुक्तियाँ मानस पर बनी धरणा या चित्र है जो किसी समूह के प्रति विशिष्ट शीलगुणों या विशेषताओं का निर्धारण करता है । ये सकारात्मके एवं नकारात्मक दोनों ही होती है । इसका पूर्वाग्रह से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है । सकारात्मक प्रत्यक्षीकरण के मध्य्यम से इनको कम किया जा सकता है | जिससे पूर्वधारित विश्वासों को कम करने में सहायता मिलती है । अतः नकारात्मक प्रवृति हेतु पूर्वाग्रहों का यथायोग्य अध्ययन करना अति आवश्यक है । सामाजीकरण की । प्रक्रिया में पूर्वाग्रह एवं रुढीयुक्तियाँ विस्तृत अध्ययन के साथ साथ विश्लेषण की प्रक्रिया से की जाये तो पूर्व धारणाओं में परिवर्तन संभव है |


उपर्युक्त अध्ययन के पश्चात यह स्पष्ट होता है कि यह सामाजिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं सामाजीकरण की वो प्रक्रियाएं है जो एक व्यक्ति को सामाजिक प्राणी बनाती है । प्रथमतः प्राथमिक समूह और इसके पश्चात द्वितीयक समूहों में सामाजीकरण में ये मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएं सहभागी की भूमिका निभाती है । इस प्रकार से सीखने की प्रक्रिया में ये सभी युक्तियाँ व्यक्ति को सामाजिक बनाने के साथ-साथ ही समाज के अनुरूप व्यवहार करने एवं सही एवं गलत के विभेद में सहभागी बनती है एवं एक सामाजिक प्राणी का निर्माण करती है | आप सभी शिक्षार्थियों से अपेक्षा है कि सारगर्भित रूप में यहाँ यह समझाने का प्रयास किया गया है कि सामाजीकरण किस प्रकार होता है परन्तु अधिक विस्तृत अध्ययन हेतु आपको अपनी पाठ्य सामग्री का अध्ययन करें ।