राष्ट्रीय बाल नीति - National Children's Policy
राष्ट्रीय बाल नीति - National Children's Policy
आज के बालक कल के नागरिक हैं। अत: उनका सर्वागींण विकास किसी भी राष्ट्र के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। बाल विकास से तात्पर्य बच्चे-बच्चियों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं भावनात्मक विकास करना होता है जिससे उनका सामाजिक समायोजन बेहतर तरीके से हो सके। उनका विकास अपने आसपास के परिवेश के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से हो सके।
भारत में राष्ट्रीय बाल नीति 22 अगस्त 1974 को स्वीकार की गयी। जिसमें राज्य का उत्तरदायित्व माना गया कि वह जन्मपूर्व एवं पश्चात बच्चे - बच्चियों के विकास हेतु पर्याप्त एवं समुचित सेवाएं उपलब्धकराएगा । इस नीति का उद्देश्य देश में हर बच्चे / बच्ची के समग्रतापूर्ण विकास को सुनिश्चित करने की राज्य की वचनबद्धता को दर्शाती है। यह राष्ट्र के बच्चे/बच्चियों को अत्यंत मूल्यवान परिसंपत्तिमानती है और इस तरह से राष्ट्रीय योजनाओं में उनके महत्व को उजागर करती है। इस नीति में निहित आकांक्षाएं समानता के अवसर और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित हैं। इस नीति का उद्देश्य बच्चे बच्चियों के लिए विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों और राष्ट्र संघ बाल अधिकार घोषणा, 1959 के अधिदेश से मेल खाता है।
राज्य में जन्म से पूर्व और जन्म के बाद तक विकास काल के दौरान बच्चे / बच्चियों को यथोचित सेवाएं प्रदान करने का भार है ताकि उनका पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित किया जा सके। राज्य ऐसी सेवाओं के दायरे का क्रमिक रूप से विस्तार करेगा जिससे कि उपयुक्त समय में देश के सभी बच्चे - बच्चियां अपने संतुलित विकास की अनुकूलतम स्थितियों का उपयोग कर सकें।
इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए यह नीति बहुआयामी और बहुक्षेत्रीय उपायों की परिकल्पना करती है यह व्यापक स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं 14 वर्ष तक के सभी बच्चे/ बच्चियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने और साथ ही बच्चे / बच्चियों के चहुंमुखी विकास के लिए अन्यप्रकार के मनोरंजनात्मक कार्यकलापों सहित शारीरिक शिक्षा प्रदान करने की पैरवी करती है। साथ ही यह नीति उन बच्चे / बच्चियों पर विशेष ध्यान देने का आवाहन करती है जो बच्चे / बच्चियां समाज के कमजोर तबकों के, विकलांग हैं और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं। इनके अलावा यह नीति / बच्चियों की उपेक्षा, दुराचार और क्रूरता से बच्चे रक्षा का प्रयास भी करती है।
इस नीति का एक उल्लेखनीय लक्षण बच्चे/बच्चियों से संबंधित सभी आवश्यक सेवाओं के उपयुक्त नियोजन समीक्षा, समन्वयन और विस्तार के लिए राष्ट्रीय बाल बोर्ड का गठन है। नीति इस बात को भी सामने रखती है कि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा से संबंधित कार्यक्रम तैयार करतेसमय बच्चे / बच्चियों की ज़रूरतों को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी। इसके अलावा यह उपयुक्त कानूनी और प्रशासनिक सहायता के साथ नीति का लक्ष्य हासिल करने में स्वैच्छिक संस्थाओं और जन भागीदारी के योगदान को भी विस्तार से प्रस्तुत करती है।
सन 2001 में बाल विकास से संबंधित जीने स्वास्थ्य, पोषण, खेलने, शिक्षा, आर्थिक शोषण से संरक्षण प्राप्त करने, समानता प्राप्त करने के अधिकार को स्वीकार किया गया।
राष्ट्रीय बाल नीति 2012 जो 2013 में लागू हुई की मुख्य बातें निम्नानुसार है -
• केंद्रीय मंत्रिमंडलीय समिति ने राष्ट्रीय बाल नीति 2012 को 18 अप्रैल 2013 को स्वीकृति प्रदान की।
• यह नीति 18 वर्ष से कम उम्र के देश के सभी लोगों को बच्चे बच्चियों के रूप में मान्यता देती है क्योंकि बचपन तथा उस दौरान विकसित मूल्य किसी भी व्यक्ति के जीवन का अत्यन्त ही महत्वपूर्ण भाग होता है इसलिए बच्चे / बच्चियों की सुरक्षा तथा उनके समन्वित विकास हेतु दीर्घकालीन संवहनीय, बहुस्तरीय, एकीकृत तथा समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
• यह नीति देश के सभी बच्चे / बच्चियों के अधिकारों की प्राप्ति हेतु सरकार के संकल्प की पुष्टि करती है।
• इस नीति के मुख्य प्रावधानों में सभी बच्चे/बच्चियों को स्वस्थ वातावरण में जीने का अधिकार, उत्तरजीविता विकास, शिक्षा, सुरक्षा एवं भागीदारी तथा बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चेबच्चियों को समान अधिकार, बच्चे / बच्चियों को प्रभावित करने वाले सभी कार्यों और निर्णयों में प्रारंभिक आवश्यकता के रूप में बच्चे बच्चियों का बेहतरीन हित तथा उनके बहुमुखी विकास के लिए सबसे अनुकूल बात के रूप में पारिवारिक महौल प्रदान करना शामिल है।
• बच्चे / बच्चियों के समावेशी विकास हेतु बहुस्तरीय, अंतर्संबंधित एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्कता होती है तथा इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय बाल नीति, 2012 के निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं -
܀ प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों और स्तरों में उद्देश्यपूर्ण रूपांतरण एवं सशक्त समन्वय
܀ सभी हितधारकों के मध्य सक्रिय संलग्नता और भागीदारी व्यापक एवं विश्वसनीय ज्ञान आधार की स्थापना
܀ पर्याप्त संसाधनो का प्रावधान तथा
* बच्चों के लिए एवं बच्चों के साथ काम करने वाले सभी लोगों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराना एवं उनकी क्षमता का विकास करना है।
• इस नीति को लागू करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना विकसित की जाएगी। इस नीति को लागू करने की प्रगति की निगरानी के लिए राष्ट्रीय समन्वय एवं कार्रवाई समूह बनाया जाएगा।
• राज्य एवं जिला स्तर भी ऐसी ही योजनाएं और समन्वय एवं कार्रवाई समूह बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर स्तर पर सभी क्षेत्रों में इस नीति के सिद्धांतों का आदर किया जाए।
• हर पांच साल में इस नीति की समीक्षा का भी प्रावधान किया गया है।
• महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस नीति के अवलोकन और कार्यान्वयन में समन्वय करने के लिए नोडल मंत्रालय होगा तथा समीक्षा प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा।
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