भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति - National Health Policy in India

भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति - National Health Policy in India

भारत में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति - National Health Policy in India

1983 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा की गयी जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढीकरण करके सबके लिए स्वास्थ्य का लक्ष्य प्राप्त करना निर्धारित किया गया। जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के मध्य समन्वय, सर्वव्यापी टीकाकरण, मातृ शिशु तथा स्कूल स्वास्थ्य सेवाओं परनियंत्रण तथा स्वास्थ्य शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया। विगत 50 वर्षों में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ ढांचे के चलते अनेक्स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्ति मिली है जिसमें प्लेग़ हैजा एवं चेचक का उन्मूलन तथा मलेरिया, इंफ्लूएंजा पोलियो एवं कुकर खांसी पर नियंत्रण प्रमुख । इसके अलावा मृत्यु दर में कमी औसत आयु में वृद्धि स्वास्थ्य स्तर में उन्नति भी हुई है। वर्ष 1983 में निर्मित राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के संबंध में निर्धारक तत्वों में उल्लेखनीय परिवर्तनहुए 1983 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में वार्णित कुछ नीतिगत पहलों से संतोषजनक परिणाम निकले हैं। किन्तु अन्य अनेक क्षेत्रों में परिणाम आशा के अनुरूप नहीं रहे। 1983 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में कई नीतियां प्रतिपादित की गई थी।









इस नीति के अन्तर्गत महत्वपूर्ण पहल के विषय थे प्रथम, बृहत प्राथमिक स्वास्थ्यदेखरेख सेवा के केन्द्र दूरदूरतक स्थापित करने का एक चरणबद्ध, समयबद्ध कार्यक्रम, जो प्रसार और स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ा हो, इस जमीनी हकीकत के संदर्भ में तैयार किया जाए कि प्रारंभिक स्वास्थ्य समस्याएं स्वयं लोगों द्वारा हल की जा सकें। दूसरे समुचित ज्ञान, सादा कौशल और अपेक्षित प्रौद्योगिकी रखने वाले स्वास्थ्य स्वयंसेवियों के जरिए मध्यस्थता। तीसरे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऊंचे पदाधिकारियों पर रोगियों का भार उन लोगों द्वारा अनावश्यक रूप से न डाला जाए.