समाज कल्याण प्रशासन का स्वरूप - Nature of Social Welfare Administration
समाज कल्याण प्रशासन का स्वरूप - Nature of Social Welfare Administration
यह विमर्श का मुद्दा सदैव से रहा है कि समाज कल्याण प्रशासन विज्ञान हैं अथवा कला समाज कल्याण के दो प्रयोग है, इसका अभिप्राय समाज कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने की प्रक्रिया से हैं। यह बौद्धिक चर्चा परिचर्चा का भी क्षेत्र है। पहला व्यवहार है और दूसरा अध्यान है। व्यवहार के रूप में समाज कल्याण प्रशासन निर्णायक रूप से एक कला है।
समाज कल्याण प्रशासन एक कला के रूप में
समाज कल्याण प्रशासन को एक कला के रूप में निम्न तर्कों से समझा जा सकता है
1. समाज कल्याण प्रशासन को प्राप्त किया जा सकता है
कला निःसन्देह एक प्राकृतिक उपहार है। संगीत, नृत्य, नाटक अथवा चित्रकारी कला की इस श्रेणी के उदाहरण हैं परन्तु प्राकृतिक उपहार, उचित प्रशिक्षण द्वारा अपनी सर्वोत्तम अभिव्यक्ति प्राप्त कर सकते हैं। दूसरी तरफ कला के उदाहरण के रूप में बर्तन बनाने वाला कुम्हार भी हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास निम्न तत्व मौजूद हैं -
क) निजी कौशल
ख) व्यवहारिक जानकारी
ग) परिणाम उन्मुख
घ) सृजनशीलता, और
च) निपुणता के लिए सतत अभ्यास
2. यह व्यक्तिपरक प्रकृति का होता है
एक बढ़ई अपने औजारों से अपने सृजन में सुंदरता का संवर्धन करता है। एक समाज कल्याण प्रशासक ज्ञान और कौशलों का इस्तेमाल करके राष्ट्र का चेहरा परिवर्तित करने के लिए मौजूद मानव और भौतिक संसाधनों का उपयोग करके आजनक कार्य कर सकता है और कल्याण कार्यक्रम को सफल बनाने की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका निभा सकता है।
3. ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग
कला व्यवस्थित ज्ञान का व्यावहारिक इस्तेमाल है। यह केवल सिद्धांत नहीं है, अपितु व्यवहार सर्वोत्तम ज्ञान की प्राप्ति अभ्यास से ही हो सकती है।
इसी प्रकार समाज कल्याण प्रशासन केवल एक सिद्धांत न होकर व्यवहारिक उपयोग की वस्तु भी है।
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