पोषाहार नियोजन - nutrition planning
पोषाहार नियोजन - nutrition planning
पहली पंचवर्षीय योजना में बाल कल्याण केन्द्रों से बच्चों / बच्चियों तथा धात्री माताओं के लिए आहार कार्यक्रम चलाने, समुदाय में पोषाहार सम्बन्धी शिक्षा प्रदान करने, उपलब्ध खाद्यान्नों को खाने योग्य बनाने के लिए उपयुक्त ढंगों का विकास करने खाने की आदतों में सुधार करने तथा केन्द्र एवं राज्यों में जन स्वास्थ्य विभाग के अधीन पोषाहार अनुभागों की स्थापना करने पर बल दिया गया।
दूसरी पंचवर्षीय योजना में पहली योजना में प्रावधानित कार्यक्रमों के अतिरिक्त पोषक शोध तथा सर्वेक्षण और चिकित्सालयों में रोगियों को प्रदान किये जाने वाले भोजन में सुधार करने का प्रावधान किया गया।
तीसरी पंचवर्षीय योजना में बड़े पैमाने पर पोषक खाद्यानों का उत्पादन तथा संरक्षण करने, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन तथा मत्स्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने, व्यावहारिक पोषाहार कार्यक्रम प्रारम्भ करने, स्थानीय उत्पादों के लिये ग्रामवासियों तथा कृषि प्रसार कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने, भोजन में पोषक तत्वों की प्रचुरता पर बल देने तथा मध्याह्न आहार (Mid-day meals) कार्यक्रम को प्रारम्भ करने का प्रावधान किया गया।
चौथी पंचवर्षीय योजना में शोध के माध्यम से पोषाहार सम्बन्धी ज्ञान में वृद्धि करने तथा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं प्रसार सेवाओं के माध्यम से इस ज्ञान का प्रचार करने, भोजन की आदतों में सुधार करने तथा पोषक तत्वों के उपभोग के लिए अपेक्षित ज्ञान प्रदान करने के कार्यक्रम चलाने, पोषाहार सम्बन्धी कमियों का पता लगाने और समस्याग्रस्त समूहों, विशेष रूप से विद्यालय जाने वाले तथा न जाने वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त भोजन की व्यवस्था करने तथा पोषाहार कार्यक्रम के कार्यान्वयन से सम्बन्धित सभी संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ाने के सम्बन्ध में प्रावधान किये गये।
पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में विभिन्न पोषाहार कार्यक्रम के बीच समन्वय स्थापित करने, न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम के अन्तर्गत पोषाहार कार्यक्रमों को सम्मिलित किये जाने तथा समेकित बाल विकास सेवाओं का शुभारम्भ किये जाने पर बल दिया गया। समेकित बाल विकास सेवाओं जिनका शुभारम्भ 1975-1976 में किया गया, के अधीन 0-5 वर्ष के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के लिये स्वस्थ्य एवं शिक्षा सम्बन्धी कार्यक्रम चलाये गये।
छठीं पंचवर्षीय योजना में पोषाहार नियोजन तथा पोषाहार से सम्बन्धित विभिन्न योजनाओं में समन्वा पर बल दिया गया।
सावतीं पंचवर्षीय योजना में कुपोषण तथा अर्द्धपोषण की समस्याओं पर नियन्त्रण, पेयजल की व्यवस्था तथा विभिन्न पोषाहार सम्बन्धी कार्यक्रमों के शिक्षण संस्थाओं द्वारा मूल्यकन के सम्बन्ध में प्रावधान किये गये।
आठवीं पंचवर्षीय योजना में खाद्य उत्पादन बढ़ाना, खाद्य वितरण में सुधार लाना, क्रयशक्ति में सुधार, काम के बदले अनाज कार्यक्रम, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष खाद्य सब्सिडी (आर्थिक सहायता), कमजोर वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्य की अनुपूर्तितथा एकीकृत बाल विकास सेवाओं के सम्बंध में प्रावधान किये गये।
नौवीं पंचवर्षीय योजना में पोषाहार नियोजन तथा पोषाहार से सम्बन्धित योजनाओं में समन्वय पर बल दिया गया।
दसवीं योजना के मुख्य लक्ष्य हैं -
1. शिशु और बाल भोजन और देखभाल की आदतों में सुधार के लिए पोषण और स्वास्थ्य में तीव्रता लाना।
2. रक्ताल्पता की व्यापकता को 25 प्रतिशत तक कम करना और मध्यम गम्भीर रक्ताल्पता को 50 प्रतिशत तक कम करना।
3. जनस्वास्थ्य समस्या के रूप में विटामिन 'ए' की कमी को दूर करना।
4. वर्ष 2010 तक देश में आई.डी. डी. की व्यापकता कम करके 10 प्रतिशत से कम तक लाना।
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