पोषण नीति - nutrition policy
पोषण नीति - nutrition policy
किसी भी राष्ट्र का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को मूलभूत आवश्यकताओं को उपलब्ध कराएं। हर नागरिक के व्यक्तित्व विकास हेतु साधन उपलब्ध कराएं। भारत के संदर्भ में आजादी से पूर्व भी अनेक प्रयास हुए जिससे समाज में हर व्यक्ति को मूलभूत आवश्यकताएं प्राप्त हो सके। सभी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि उन्हें समुचित पोषण मिले। हर व्यक्ति के विकास के लिए समुचित पोषण आवश्यक है। पोषण की समस्या का जुड़ाव स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं गरीबी से भी है। ये सभी एकदू सरेको प्रभावित करते हैं। खाद्य एवं पोषण बोर्ड का गठन 1964 में किया गया था। इसका उद्देश्य देश में पोषण के स्तर में सुधारलाना था। तब यह कृषि मंत्रालय के अधीन खाद्य विभाग से जुड़ा था। लेकिन 1993 में राष्ट्रीय पोषण नीति के तहत इसे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कर दिया गया। भारत में 1993 में महिला व बाल विकास विभाग के तत्वावधान में सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण नीति को अंगीकार किया गया था। इसके द्वारा कुपोषण मिटाने और सबके लिए इष्टतम पोषण का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए बहु-सेक्टर संबंधी योजना की वकालत की गई। यह योजना देश भर में पोषण के स्तर की निगरानी करने तथा अच्छे पोषण की आवश्यकता व कुपोषण रोकने की जरुरत के संबंध में सरकारी मशीनरी को सुग्राही बनाने की वकालत करती है। राष्ट्रीय पोषण नीति में आहार व पोषण बोर्ड भी सम्मिलित है, जिसके द्वारा स्तनपान व पूरक फीडिंग के संबंध मेंसही तथ्यों का प्रसार करने के लिए पोस्टर, श्रव्य तुकबंदी (ओडियो जिग्गल्स) और वीडियो स्पाट्स विकसित किए जाते हैं।
राष्ट्रीय पोषण नीति देश की आबादी की पोषण संबंधी स्थिति को प्रस्तुत करती है और पोषण स्तरों विशेषकर महिलाओं, किशोरियों और बालिका शिशु तथा छह वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों केपोषण स्तरों में सुधार की एक व्यापक रणनीति की ज़रूरत को रेखांकित करती है। यह देश में अल्पपोषण की व्यापक व्याप्ति को तथा लोगों के जीवन की गुणवत्ता और उत्पादकता पर उसके घातक प्रभाव की समस्या को हल करने की ज़रूरत पर बल देती है। यह आबादी के असुरक्षित समूहों विशेषकर महिलाओं और बच्चों की पोषण संबंधी स्थिति पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करती है।
यह विकास प्रक्रिया में पोषण और अधोपोषण की समस्या की जटिलता के महत्व की दृष्टि से राष्ट्रीय पोषण नीति की ज़रूरत को उजागर करती है। अल्पपोषण की समस्या को कृषि प्रौद्योगिकी, वृहत और सूक्ष्म स्तर की नीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों के साथ जोड़ कर स्पष्ट किया गया है। इस तरह यह नीति कुपोषण के बहुमुखी और बहुक्षेत्रीय मुद्दे को हल करने हेतु प्रत्यक्ष अल्पकालिक और अप्रत्यक्ष दीर्घकालिक हस्तक्षेपों पर विचार करती है।
प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के अंतर्गत शामिल उपाय इस प्रकार हैं- विशेष रूप से असुरक्षित समूहों के लिए पोषण हस्तक्षेप, आवश्यक खाद्यों का संपुष्टन (फोर्टिफिकेशन), कम लागत के पोषक भोजन को लोकप्रिय बनाना और असुरक्षित समूहों के बीच सूक्ष्म तत्वों की कमी को नियंत्रित करना अप्रत्यक्ष नीति उपाय इस प्रकार हैं- खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना उत्पादन और प्रदर्शन के माध्यम से खुराक के प्रति प्रतिरूप में सुधार लाना आय हस्तांतरण हेतु नीतियां ताकि ग्रामीण और शहरी निर्धनों के लिए हकदारियों में सुधार लाया जा सके, भूमि सुधार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण; बुनियादी स्वास्थ्य और पोषण संबंधी ज्ञान खाद्य मिलावट की रोकथाम आदि।
यह नीति इस बात पर बल देती है कि बच्चे आबादी का सर्वाधिक कुपोषित समूह है और इसलिए समेकित बाल विकास सेवा के तीव्र विस्तार के माध्यम से उनकी पोषण संबंधी स्थिति में सुधार लाने हेतु तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
पोषण सुरक्षा के लिए नीतिगत व्यवस्थाएं -
• राष्ट्रीय बाल नीति- 1974
• एकीकृत बाल विकास परियोजना आईसीडीएस- 1975
• राष्ट्रीय पोषण नीति- 1993
• नेशनल प्लान ऑफ एक्शन फॉर न्यूट्रीशन- 2005
• एनीमिया को रोकने के लिए विशेष योजना, आइरन टेबलेट के संदर्भ में
• देश के सभी शासकीय प्रायमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना। 9 माह से 3 साल तक के बच्चों को विटामिन ए की विशेष खुराक
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली
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