गुणात्मक शोध में विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता/वास्तविकता से सम्बन्धित मुद्दे - objectivity/reality in qualitative research

गुणात्मक शोध में विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता/वास्तविकता से सम्बन्धित मुद्दे - objectivity/reality in qualitative research

गुणात्मक शोध में विश्वसनीयता और वस्तुनिष्ठता/वास्तविकता से सम्बन्धित मुद्दे


परिणामों की विश्वसनीयता- 


समाज विज्ञानियों पर उनकी जांच की प्रक्रिया में विश्वसनीयता के मुद्दे पर प्रहार होते रहे हैं यह कहा जाता है कि गुणात्मक अभिगम जांच में वस्तुनिष्ठता/वास्तविकता नहीं ला सकते हैं और शोधकर्ता के पूर्वाग्रह से संभव है कि अन्य के लिए विश्वसनीय जानकारी प्रस्तुत नहीं की जा सके। गुणात्मक शोध की विश्वसनीयता की जाँच के लिए कुछ निश्चित मानक निम्न प्रकार से रेखांकित किए जा सकते हैं -


• विश्वसनीयता का सम्बन्ध शोधकर्ता के आँकड़ों और व्याख्याओं के मध्य सहमति के स्तर और उत्तरदाताओं के मस्तिष्क में पाई जाने वाली बहु-वास्तविकताओं से है। 


• निर्भरता अनिवार्य रूप से किसी विशेष मसले पर अलग स्थितियों में पाई गई जानकारी की स्थिरता और प्राप्त की गई व्याख्या है।


• स्थानांतरणीयता वह गुण है जो किसी विशेष संदर्भ में प्रासंगिक व्याख्या पर जानकारी के यथार्थ अभिप्राय को प्राप्त करना संभव बनाता है।


• सत्यापनता का अभिप्राय भिन्न शोधकर्ताओं द्वारा संकलित की गई वस्तुनिष्ठ अथवा क्रमिक जानकारी का अध्ययन करने और समान निष्कर्षों पर पहुँचने की संभावना से है।


अवलोकन की समस्याएँ- 


गुणात्मक जांच की शक्ति आँकड़े संकलित करने के साधनों, तकनीकों और रूपरेखाओं की अपेक्षा क्षेत्र कार्यकर्ता की क्षमता पर ज्यादा आश्रित करती है। क्षेत्र कार्यकर्ता के अनुभव और विशेषज्ञता के सम्बन्ध में कुछ मुद्दे यथा- अध्ययन किए जाने वाले समूह में उसके सम्बन्ध, सघन आँकड़ें संकलित करने की प्रक्रियाओं मेंशामिल नियम, कानून इत्यादि हैं। यहाँ इनमें से कुछ मुद्दों पर वर्णन किया गया है









• सर्वप्रथम यह जरूरी है कि केवल समस्या की स्पष्ट समझ वाले शोधकर्ता को गुणात्मक अध्ययन करने का कार्य करना चाहिए। चूँकि किए गए अध्ययन की अर्थपूर्णता पूरी तरह से मानव कारक पर आश्रित करती है, इसलिए यह देखना अत्यंत आवश्यक है कि अध्ययन कौन कर रहा है और वह अध्ययन किस प्रकार करता है ?


• बाहरी कार्यकर्ता को भागीदारी करने वाले अवलोकनकर्ता की भाँति कार्य के दौरान कुछ समस्याएँ हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में यह माना जाता है कि अजनबी (अवलोकनकर्ता) को जानबूझकर जानकारी इसलिए दी जाती है अथवा देखने के लिए आमंत्रित किया जाता है क्योंकि वह अजनबी होता है। अजनबी ऐसी घटनाओं को देख सकते हैं जिनकी उन्होंने आशा नहीं की थी।


• आंतरिक अवलोकनकर्ता अर्थात अध्ययन किए जाने वाले संस्थान के व्यक्ति जो अब अवलोकनकर्ता की भाँति कार्य करते हैं, आँकड़े संकलित करने की प्रक्रिया में प्रमुख समस्याओं से रूबरू हो सकते हैं। प्रेक्षक के जैसे कार्य करने वाला समूह का सदस्य प्रेक्षक के रूप में अपनी भूमिका और समूह के सदस्य की भूमिका के मध्य भ्रमित हो सकता है। उसे अपने समूह अथवा संस्थान के बारे में समूह के साथ अपने व्यक्तिगत / भावनात्मक जुड़ाव के कारण पूर्वाग्रही की प्राप्ति हो सकती है।


• संक्षेप में, अन्वेषणकर्ता को गुणात्मक पड़ताल को अर्थपूर्ण बनाने के लिए अत्यधिक स्व जागरूकता और समूह की प्रक्रियाओं की अच्छी तरह से पूरी समझ होनी चाहिए।