प्रकृति के आधार पर नियोजन - Panning by Nature

 प्रकृति के आधार पर नियोजन - Panning by Nature

प्रकृति के आधार पर नियोजन को दो भागों में बाँटा जा सकता है-


1) स्थायी नियोजन 


यह नियोजन स्थायी प्रकार का होता है जिसे बार-बार उपयोग में लाया जाता है। इसमें उपक्रम की नीतियाँ, संगठन का ढाँचा, प्रमाणित प्रक्रिया एवं विधियाँ सम्मिलित की जाती है। ये दीर्घकाल तक उपयोगी बने रहते हैं। इनका निर्धारण पूर्व में कर लिया जाता है ताकि संगठन के क्रियकलापों को व्यवस्था प्रदान करने के आधार के रूप में काम लिया जा सके।


2) अस्थायी नियोजन 


यह वह नियोजन है जो किसी विशेष स्थिति के लिए बनाया जाता है और उस उद्देश्य के पूरा हो जाने के साथ ही यह समाप्त होता है। इन्हें एकल प्रयोग नियोजन के नाम से भी जाना जाता है। इनकी प्रकृति अस्थायी एवं नवीनता की होती है। बजट इसका अच्छा उदाहरण है।