सहभागी शोध - Participatory Research
सहभागी शोध - Participatory Research
सामान्यत: सहभागी शोध व्यक्तियों द्वारा उनकी वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करने के लिए मानचित्र और चित्र / आरेख बनाकर और उनकी स्थितियों को बदलने की योजनाओं और उन्हें विश्लेषित करने के द्वारा किया जाता है। यह विधि उनकी समस्याओं कोप्रस्तुत करने और यह बताने का मार्ग प्रशस्त करती है कि उनकी स्थिति को सुगम करने के लिए क्या किया जा सकता है ?
अनेक शब्दावलियों के साथ विभिन्न भागीदारी के अभिगम समय के साथ अस्तित्व में आए हैं। सर्वप्रथम द्रुत ग्रामीण मूल्यांकन (Rapid Rural Appraisal-RRA) आया था। इस शब्द का इस्तेमाल फिर विश्रांत ग्रामीण मूल्यांकन (Relaxed Rural Appraisal - RRA ) को इंगित करने के लिए किया जाने लगा। बाद में यह सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (Participatory Rural Appraisal - PRA) में विकसित हो गया। इसे बाद में विकास उद्यमियों के एक वर्ग ने भागीदारी का अधिगम और कार्य (Participatory Learning and Action- PLA) कहना पसंद किया। यद्यपि, ये सभी शब्द सामान्यतः सहभागी अभिगमों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन शब्द का इस्तेमाल शुरू में सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध स्थितियों के मूल्यांकन के लिए किया जाता था। बाद में इसका इस्तेमाल शहरी क्षेत्रों और अन्य क्षेत्रों जैसे प्रौढ़ शिक्षा, नीति प्रभाव और सलाह तथा संगठन विकास के लिए भी किया जाने लगा है। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल न सिर्फ मूल्यांकन के लिए बल्कि विभिन्न अन्य कार्यों के लिए भी किया जाता है। अतः शब्द सहभागी अभिगम और कार्य (PLA) ज्यादा विस्तृत और उपयुक्त प्रतीत होता है।
सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन की विधियाँ
आजकल बड़ी संख्या में सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन की विधियाँ इस्तेमाल की जाती हैं। इन विधियों को विस्तृत रूप से स्थान, समय और सम्बन्ध विधियों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
स्थान सम्बन्धित सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन विधियाँ
स्थान सम्बन्धित सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन विधियाँ व्यक्तियों की वास्तविकता के स्थानीय/क्षेत्रीय विस्तारों के लिए महत्वपूर्ण है। इन विधियों में सामाजिक मानचित्रण शामिल है और इस पर फोकस किया जाता हैं कि लोग किस प्रकार भौतिक आयामों, जिसमें वे होते हैं, की अनुभूति करते हैं और उससे सम्बन्ध स्थापित करते हैं। अन्य सामान्य स्थान / क्षेत्र से सम्बन्धित विधियाँ संसाधन मानचित्र, गतिशीलता मानचित्र, भागीदारी की मॉडलिंग, सेवाएँ और अवसर मानचित्र और ट्रॉन्सेक्ट और गतिशीलता मानचित्र है। सामाजिक मानचित्र का इस्तेमाल आवास के पैटर्न को बताने के लिए किया जाता है जबकि संसाधन मानचित्र प्राकृतिक संसाधनों पर फोकस करते हैं। भागीदारी की मॉडलिंग किसी क्षेत्र का त्रि-आयामी वर्णन होता है। गतिशीलता मानचित्र का इस्तेमाल स्थानीय जन के गतिशीलता पैटर्न के विश्लेषण के लिए किया जाता है जबकि सेवाओं और अवसर के मानचित्र किसी स्थम पर अनेक सेवाओं और अवसरों की उपलब्धता के प्रस्तुतीकरण में मददगार होते हैं। ट्रांसेक्ट किसी क्षेत्र की अनुप्रस्थ अनुभाग को प्रस्तुत करता है और यह खासकर प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।
समय से सम्बन्धित सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन विधियाँ
इसका इस्तेमाल व्यक्तियों की वास्तविकताओं के समयकालिक आयामों के बारे जानकारी प्राप्त करने में के लिए किया जाता है। इस विधि की विशिष्टता यह है कि ये व्यक्तियों द्वारा अपने समय की संकल्पनाओं के इस्तेमाल को संभव बनाती है। इस विधि में समय-रेखा, ऐतिहासिक ट्रांसेक्ट प्रवृत्ति विश्लेषण, दैनिक क्रियाकलाप कार्यक्रम, मौसमी आरेख, वंशावली सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन और स्वप्न मानचित्र शामिल हैं। समय रेखा उन विभिन्न मुख्य घटनाओं को उस रूप मेंइंगित करती है जिसमें स्थानीय लोगों द्वारा उनकी अनुभूति की जाती है। प्रकृतिचलन विश्लेषण उन परिवर्तनों पर प्रकाश डालता है जो किसी निश्चित समय कालों के मध्य घटित होते हैं। ऐतिहासिक ट्रांसेक्ट ‘भूत वर्तमान और भविष्य' और 'तब तथा अब' विधियाँ चलन/प्रवृत्ति विश्लेषण के विभिन्न परिवर्ती / प्रकार मौसमी आरेख वार्षिक चक्र और सत्रों अथवा महीनों में लोगों के जीवन में बदलावों को परिलक्षित करते हैं। दैनिक क्रियाकलाप के कार्यक्रम प्रदर्शित करते हैं कि व्यक्ति किस प्रकार सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अपना समय व्यतीत करते हैं। भागीदारी की वंशावली विभिन्न पीढियों और वंशजों का पता लगाने और समय के साथ पीढियों में होने वाले बदलावों को बताने में मदद करती है। स्वप्न मानचित्र व्यक्ति के भविष्य की योजना और इच्छाओं को प्रस्तुत करने के लिए नियोजित किए जाते हैं।
सम्बन्ध विधियाँ
सम्बन्ध विधियों में प्रवाह चित्र जैसे कारक प्रभाव चित्र / आरेख, प्रभाव चित्र, नेटवर्क/संजाल आरेख, प्रणाली आरेख और प्रक्रिया मानचित्र शामिल हैं। इसमें कल्याण जीविका विश्लेषण, श्रेणीकरण विधि, युग्मानुसार श्रेणीकरण, वेन आरेख, बल क्षेत्र विश्लेषण, मैट्रिक्स अंकलन श्रेणीकरण, पाई आरेख,
स्पाइडर / मकड़जाल आरेख और काया मानचित्रण भी शामिल हैं। इस विधि का प्रमुख उद्देश्य एक ही वस्तु की अनेक प्रकारों और अनेक आयामों के मध्य सम्बन्ध का अध्ययन करना है।
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