अवधि के आधार पर नियोजन - Period based Planning

अवधि के आधार पर नियोजन - Period based Planning

 अवधि के आधार पर नियोजन - Period based Planning


(1) अल्पकालिक नियोजन 


यह सामान्यतः एक वर्ष और इससे कम की अवधि के लिए तैयार किया जाता है। इसके अंतर्गत अल्पकालीन क्रियाओं का निर्धारण इस प्रकार । किया जाता है ताकि दीर्घकालीन नियोजन के उद्देश्यों को आसानी से प्राप्त किया जा सके। इसके द्वारा तात्कालीन समस्याओं को ध्यान में रखकर योजना बनाई जाती है। इसे परिचालनात्मक (Action or operational) नियोजन भी कहा जाता है। अल्पकालीन नियोजन का संबंध चूँकि अल्पकाल होता है इसलिए इसका पूर्वानुमान लगाया जाना आवश्यक है। इनका क्रियान्वयन सफलता पूर्वक किया जा सकता है तथा इसमें आवश्यक संशोधन एवं परिवर्तन संभव है। बाद, भूकम्प, ऐसे प्राकृतिक या मानवीय आपदा के समय का नियोजन हो या किसी व्यापक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए, सहायक योजना के लिए किया गया नियोजन हो, दरअसल यह कार्यात्मक नियोजन होता है जो कार्य संपादित करते हुए बनाया जाता है। अल्कालीन नियोजन की कुछ सीमाएं हैं। इसमें उपक्रम के विकास एवं स्थायित्व को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता और कर्मचारियों को निर्णयन में हिस्सेदारी देना कठिन है। इसके अलावा उतावले निर्णयों का नुकसान भी इस नियोजन में होता है। 







( 2 ) मध्यकालिक नियोजन 


सामान्यता यह योजना वर्ष से अधिक लेकिन 5 वर्ष से कम की अवधि की होती है तथा इनमें उन तमाम क्रियाओं का निर्धारित किया जाता है। जिसे आधारभूत समस्या का समाधान करने में मदद मिले।


(3) दीर्घकालिक नियोजन 


लम्बे समय के लिए बनाए गए नियोजन को व्यूहरचनात्मक नियोजन भी कहा जाता है। यह नियोजन संस्था को दीर्घकाल तक प्रभावित करता है इसमें अनिश्चितता होती है। यह समयावधि संगठन की प्रकृति आकार, विकासदर और वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें खण्ड मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। शोध, विकास, क्षमता निर्माण, सशक्तिकरण, न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था आदि के लिए दीर्घकालीन नियोजन करना होता है। साधारणतया ये योजनाएं 5 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए तैयार की जाती है। आधारभूत समस्याओं को पूर्व में ही पहचानने तथा उनके बार में निर्णय लेने की बात इनयोजनाओं में निहित होती है।