राजनीति विज्ञान और इतिहास का सहसंबंध - Political science and history correlation
राजनीति विज्ञान और इतिहास का सहसंबंध - Political science and history correlation
राजनीति विज्ञान और इतिहास एक-दूसरे से स्वाभाविक रूप से संबंधित है। इतिहास में व्यक्ति समाज एवं राज्य के भूतकालिक जीवन का अध्ययन किया जाता है और राजनीति विज्ञान में राज्य के तीनों कालो भूत, वर्तमान और भविष्य का अध्ययन किया जाता है। इन दोनों विषयों का पारम्परिक संबंध हुए सीमहोदय लिखते हैं कि राजनीति विज्ञान के बिना इतिहास का मूल नहीं और इतिहास के बिना राजनीति विज्ञान का कोई मूल नहीं अर्थात् प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक इतिहास को गति दिशा एवं अर्थ देने का कार्य राजनीति विज्ञान ने ही किया है।
प्राचीन काल में राजनैतिक संस्थाएँ एवं राज्य ही इतिहास लेखन की मुख्य विषय वस्तुथी उदाहरणार्थ ऋग्वैदिक काल में 'सभा', 'समिति' एवं 'विदध' जैसी राजनैतिक संस्थाओं को इतिहासकारों ने अपने अध्ययन की विषयवस्तु बनाया, जिसके परिणामस्वरूप राजनैतिक इतिहास को गति एवं दिशा अतः हम कह सकते हैं कि इतिहास तत्कालीन राजनैतिक घटनाओं का साक्षी है। सीले महोदय का कथन है कि इतिहास मूल है और राजनीति विज्ञान फल है। ए एल राउज महोदय ने तो राजनीति विज्ञान को इतिहास की रीढ़ माना है।"
राजनीति विज्ञान में जिन समस्याओं का अध्ययन किया जाता है उनके गर्भ में उनका अपना इछिपा होता है। अतः इतिहास से परिचित हुए बिना न तो इन समस्याओं को ठीक रूप से समझा जा सकता है और न ही हल किया जा सकता है, क्योंकि कोई भी राज्य राजनैतिक संस्था, राजनैतिक घटना का निर्माण एक विशेष समय पर नहीं होता, बल्कि इनका निर्मित होना एक विकास प्रक्रिया का ही परिणाम है और किसी भी घटना, संस्था, राज्य इत्यादि को पूर्णतया समझने के लिए इतिहास के आधार पर उनके विकास का क्रमबद्ध ज्ञान प्राप्त किया जाना आवश्यक है। अतः इतिहास का ज्ञान आवश्यक है। हम कह सकते हैं कि राजनीति विज्ञान इतिहास पर निर्भर है, क्योंकि वर्तमानकालान राजनैतिक व्यवस्था का अध्ययन और भविष्य के लिए आदर्श व्यवस्था का चित्रण ऐतिहासिक अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकता है।
इतिहास राजनीति की प्रयोगशाला या पथप्रदर्शक भी है। विभिन्न समयों में मानवों द्वारा अपने जीवन में राजनैतिक क्षेत्र में अनेक कार्य किए गए जिनके परिणाम और सफलता-असफलता का वर्णन इतिहास से प्राप्त होता है। राजनैतिक क्षेत्र के ये भूतकालीन कार्य, एक प्रयोग के समान ही होते हैं और ये भूतकालीन प्रयोग भविष्य के लिए पथ प्रदर्शन का कार्य करते हैं। उदाहरणार्थ भारतीय इतिहास के अध्ययन से हमें अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पता चलता है, जिसके आधार पर एक विशाल एवं मजबूत साम्राज्य की स्थापना की। इसके विपरीत औरंगजेब के द्वारा धार्मिक पक्षपात की नीति अपनाने का परिणाम यह हुआ कि साम्राज्य पतन की ओर अग्रसर हो गया।
जियाउदीन बन सल्तनत काल का प्रमुख इतिहासकार था। उसने सर्वप्रमुख कृति तारीख-ए फिरोजशाही में लिखा है- यदि मेरे ग्रंथ में प्रशासन के नियमों एवं संघर्ष समाप्त करने के उपायों को खोजा जाएगा तो वे इसमें मिलेंगे।" बनों का मानना था कि वर्तमान शासक यदि अतीत के शासकों के क्रियाकलाप एवं उनकी समस्याओं को इतिहास द्वारा समझ लें तो वे इस प्रकार की समस्याओं से निजात पा सकते हैं। बन का यह कथन इतिहास एवं राजनीति विज्ञान के सहसंबंध को रेखांकित करता है।
मनुष्य अपने ऐतिहासिक अनुभव के आधार पर वर्तमान राजनैतिक जीवन में सुधार करते हुए भविष्य के लिए मार्ग निश्चित कर सकता है लाई एक्टन (Lord Acton) के शब्दों में कहा जा सकता है। कि राजनीति विज्ञान इतिहास की धारा में उसी भाँति संचित है जैसे कि नदी की रेत में सोने के का" इतिहास एवं राजनीति का सहसंबंध प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। कौटिल्य ने अपने ग्रंथ 'अर्थशास्त्र में राजाओं को राजधर्म की शिक्षा ऐतिहासिक उदाहरणों के आधार पर ही दी थी। इतिहास एवं राजनीति के सहसंबंध का उल्लेख करते हुए हम कह सकते हैं कि इतिहास संपूर्ण भूतकालीन जीवन का ब्यौरा प्रस्तुत करता है, लेकिन प्रमुख रूप से इसमें मानव की राजनैतिक गतिविधियों का ही अध्ययन किया जाता है।
भारत के इतिहास में से यदि चन्द्रगुप्त अशोक बाबर, अकबर शाहजहाँ, औरंगजेब इत्यादि के राजनैतिक कार्यों और उपलब्धियों को अलग कर दिया जाए तो उसमें शेष क्या रह जाएगा। 17वीं सदी का यूरोप का इतिहास राष्ट्रवाद, व्यक्तिवाद, साम्राज्यवाद और समाजवाद जैसी राजनैतिक विचारधाराओं के अध्ययन के बिना महत्वहीन ही माना जाएगा। इसी प्रकार यदि हम 20वीं सदी के भारतीय इतिहास का अध्ययन करना चाहते हैं तो हमें राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, सांप्रदायिक निर्वाचन का प्रारंभ और मुस्लिम लीग का उदय भारतीय शासन अधिनियम द्वैध शासन, साइमन कमीशन नेहरू रिपोर्ट, सविनय अवज्ञा आंदोलन गोलमेज सम्मेलन, क्रिप्स मिशन, भारत छोड़ो आंदोलन केबिनेट मिशन, अंतरिम सरकार की स्थापना भारत की स्वतंत्रता भारत के वर्तमान संविधान का निर्माण और भारतीय संविधान के अन्तर्गत हुए आम चुनाव का अध्ययन अनिवार्य है। इस प्रकार लीकॉक महोदय के शब्दों में हम कह सकते हैं कि इतिहास का बहुत कुछ भाग राजनीति विज्ञान
राजनीति विज्ञान के द्वारा इतिहास को यह दृष्टिकोण प्रदान किया जाता है, जिसके परिपेक्ष्य में घटनाओं को उनके वास्तविक अर्थों में समझा जा सकता है।
एस. के. कोचर (S.K. Kochhar) महोदय ने इतिहास तथा राजनीति के सहसंबंध को दर्शाते हुए लिखा है कि शासन और इतिहास का संबंध कुछ ऐसा ही है जैसा कि वनस्पति शास्त्र का वनस्पति से तथा जीव शास्त्र का प्राणियों से।"
इतिहास एवं राजनीति के सहसंबंध में हम यह भी कह सकते हैं कि ऐतिहासिक घटनाएँ राजनैतिक विचारधाराओं का परिणाम होती है अर्थात् राजनैतिक विचारधाराएँ ऐतिहासिक घटनाओं को जन्म देती है। उदाहरणार्थ कार्ल मार्क्स के विचारों का सोवियत रूस की राज्य क्रांति पर तथा महात्मा गांधी के विचारों का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर निर्णायक प्रभाव पड़ा। स्वतंत्रता समानता और सामाजिक न्याय जैसे राजनैतिक विचार भूतकाल से लेकर आज तक इस प्रकार हम कह सकते हैं कि इतिहास और राजनीति अन्योन्याश्रित है। दोनों की पारस्परिक निर्भरता के विषय में उल्लेख करते हुए सौले महोदय लिखते हैं कि राजनीति उच्छृंखल हो जाती है, यदि इतिहास द्वारा ओ उदार नहीं बनाया जाता और इतिहास कोरा साहित्य रह जाता है, यदि राजनीति से उसका संबंध विच्छेद हो जाता है। इसी प्रकार बगैस (Burgess) महोदय भी लिखते हैं कि यदि राजनीति विज्ञान और इतिहास का संबंध विच्छेद कर दिया जाए तो उसमें से एक मृत नहीं तो पंगु अवश्य हो जाएगा और दूसरा केवल आकाश कुखुम बनकर रह जाएगा
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