अनुसंधान रिपोर्ट लेखन हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-Requirements for Writing Research Reports

अनुसंधान रिपोर्ट लेखन हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-Requirements for Writing Research Reports

अनुसंधान रिपोर्ट लेखन हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-Requirements for Writing Research Reports

रिपोर्ट लेखन का कार्य बहुत ही सावधानीपूर्ण और कठिन कार्य होता है। इसमें यह ध्यान देने योग्य बात है कि शोध की किसी भी बात का उल्लेख छूट न जाए जिसका उल्लेख शोध की वैज्ञानिकता, प्रामाणिकता और विश्वसनीयता के लिए आवश्यक हो। रिपोर्ट लेखन के लिए प्रमुख पूर्व शर्तें निम्नानुसार हैं -


• रिपोर्ट के सफल लेखन के लिए विषय अथवा समस्या की प्रकृति और उसके क्षेत्र के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए।


• विषय से संबंधित उपलब्ध साहित्यों का अध्ययन कर लेना चाहिए। इसमें पूर्व में किए गए शोध, विभिन्न दस्तावेज़, न्यूज पेपर, पत्र-पत्रिका, लेख, जर्नल, इंटरनेट आदि की सहायता ली जाती है। इन अध्ययनों से इस बात का संज्ञान होगा कि रिपोर्ट लेखन कैसे तैयार किया जाता है? उसमें सामान्य तौर पर कौन-सी गलतियाँ आती हैं? इसके अलावा तुलनात्मक परीक्षण के आधार पर यह भी समझा जा सकता है कि उनसे कैसे बचा जाए?


• रिपोर्ट की भाषा सरल और संतुलित होनी चाहिए। यह यह भी ध्यान देने की बात है कि भाषा इतनी भी सरल न हो कि रिपोर्ट का स्तर ही गिर जाए। आवश्यकता पड़ने पर पाद टिप्पणी (फूटनोट) का भी प्रयोग किया जाना चाहिए।






• शोध की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए शोध में प्रयुक्त विधियों और में तकनीकों का उल्लेख विस्तार से किया जाए। इसके अलावा इस बात का विवरण भी दिया जाना चाहिए कि इस विधि अथवा तकनीक का प्रयोग ही क्यों किया गया? इसके पीछे कौन-सा वैज्ञानिक तर्क है?


• रिपोर्ट लेखन को कुछ यांत्रिक उपकरणों की सहायता से अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है। इसमें पाद टिप्पणी, उप-शीर्षक, सारणी, फोटो, रेखाचित्र, मानचित्र आदि यांत्रिक उपकरणों की मदद से और भी प्रभावी बनाया जा सकता है।


• रिपोर्ट में शोध अध्ययन क्षेत्र का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही अध्ययन की कमियों को भी उल्लेखित किया जाना चाहिए। इसके अलावा भविष्य के शोध कार्य के लिए कुछ दिशा-निर्देशों को भी शामिल करना चाहिए।


• शोध को वस्तुनिष्ठ स्वरूप प्रदान करने के लिए आवश्यक है कि रिपोर्ट में सांख्यिकी का प्रयोग किया जाय। साथ ही सांख्यिकीय सीमाओं का विवरण भी किया जाना चाहिए।


• शोधकर्ता को रिपोर्ट लेखन के पूर्व ही रिपोर्ट की रूपरेखा निर्मित कर लेनी चाहिए। इससे वह भ्रमित नहीं होगा।