तथ्यों के विश्लेषण हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-requisites for analysis of data

तथ्यों के विश्लेषण हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-requisites for analysis of data

तथ्यों के विश्लेषण हेतु पूर्व आवश्यकताएँ - Pre-requisites for analysis of data


तथ्यों का विश्लेषण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है परंतु इसकी वैज्ञानिकता के साथ न्याय करने के लिए यह आवश्यक है कि शोधकर्ता, शोध की नैतिकता के अनुरूप कार्यों को सम्पन्न करे। शोधकर्ता द्वारा तथ्यों का व्यवस्थित रूप से विश्लेषण तभी किया जा सकता है जब कुछ आवश्यक शर्तों को पूरा करे विश्लेषण के लिए आवश्यक शर्ते/ पूर्व आवश्यकताएँ निम्नलिखित हैं


1. तथ्यों के संबंध में पूर्ण जमकारी


तथ्यों के बारे में व्यवस्थित विश्लेषण प्रस्तुत करने हेतु प्रमुख शर्त यह है कि शोधकर्ता को तथ्यों के बारे में पूर्ण व यथार्थ जानकारी प्राप्त होनी चाहिए। यदि उसे तथ्यों के बारे में पूर्ण संज्ञान प्राप्त हो तो वह उनका विश्लेषण सरलता और प्रभावी तरीके से कर पाने में सक्षम हो सकेगा।


2. घटनाओं के बारे में अंतर्दृष्टि


शोधकर्ता द्वारा अनेकों तथ्यों का संकलन कार्य सम्पन्न किया जाता है, लेकिन विश्लेषण के दौरान वह अनेक घटनाओं और परिस्थितियों व दशाओं का स्वयं ही अवलोकन करता रहता है। इन घटनाओं तथा परिस्थितियों व दशाओं के बारे में शोधकर्ता की अंतर्दृष्टि जितनी ही गहरी और स्पष्ट होती है विश्लेषण में उतनी ही वैज्ञानिकता का समावेश होता है।









3. आलोचनात्मक कल्पनाशक्ति


विश्लेषण का तात्पर्य उनके वर्गीकरण और विवेचन के इतर विभिन्न तथ्यों के मध्य पाए जाने वाले सह-संबंधों का स्पष्टीकरण भी होता है। इस स्पष्टीकरण के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि शोधकर्ता में आलोचनात्मक कल्पनाशक्ति हो । 


4. ज़िम्मेदारी, अनुभव और बौद्धिक ईमानदारी


तथ्यों का विश्लेषण कार्य सम्पूर्ण शोध की प्रक्रिया की गुणवत्ता और उसकी वैधानिकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होता है तथा इसके लिए वैज्ञानिक कार्यविधि निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक होता है। इसके लिए एक शोधकर्ता में ज़िम्मेदारी / उत्तरदायित्व, अनुभव और बौद्धिक ईमानदारी का गुण होना अति आवश्यक होता है तथा वह इन्हीं आधारों पर नियमों का पालन दृढ़ता से कर पाता है। 


5. पक्षपात रहित


जैसा कि ऊपर भी बताया जा चुका है कि तथ्यों के विश्लेषण के लिए यह आवश्यक है कि वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप ही विश्लेषण की प्रक्रिया की जानी चाहिए। इसका स्पष्ट आशय शोधकर्ता द्वारा तथ्यों के विश्लेषण में पक्षपात अथवा अभिनति की भावना से दूर रहने से है।