परीक्षणात्मक शोध के कारक परिणाम के तर्क - Reasoning for the Factors Result of the Experimental Research

परीक्षणात्मक शोध के कारक परिणाम के तर्क - Reasoning for the Factors Result of the Experimental Research

उक्त वर्णन के स्पष्टीकरण हेतु कारक परिणाम के तर्क को समझना अत्यंत आवश्यक है। कारक परिणाम प्राप्ति हेतु तीन स्थितियों की पूर्ति महत्वपूर्ण है

क्या -


• कारण, प्रभाव से पूर्व समय से होता है?


• सम्बन्ध दो प्रारम्भ में परिलक्षित किए गए परिवर्ती में से प्रत्येक के लिए किसी तीसरे परिवर्ती के प्रभाव के फलस्वरूप नहीं होता है?


• उनके मध्य कोई प्रयोगसिद्ध सहसम्बन्ध है?


प्रारूपिक परीक्षणात्मक अध्ययन में दो समूहों का चुनाव इस प्रकार किया जाता है कि वे संयोग के अलावा एक-दूसरे से ज्यादा अलग नहीं होते हैं। एक समूह स्वतंत्र परिवर्ती (जो परीक्षणात्मक समूह कहा जाता है) के लिए उद्भासित होता है। दोनों समूहों की पुनः प्रभाव जांच हेतु तुलना की जाती है। वह शोध रूपरेखा जिसमें विषय (परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले व्यक्ति) के दो अथवा उससे अधिक ऐसे समूह शामिल होते हैं जो परीक्षण के लिए उद्भासित होते हैं, तो ये माना जाता है कि परीक्षण प्रारम्भ करने से पूर्व तुलना किए जाने वाले समूह एक सदृश्य थे। इसे सुनिश्चित करने के लिए तकनीकों के रूप में 'ऐच्छिकता' अथवा 'मिलान' का इस्तेमाल किया जाता है।