भारत का धार्मिक इतिहास - religious history of india

भारत का धार्मिक इतिहास - religious history of india

भारत का  धार्मिक इतिहास - religious history of india

धर्म इतिहास का अत्यंत रोचक विषय है। अधिकांश इतिहासकारों ने धार्मिक भावना से प्रेरित होकर इस विषय पर अधिकाधिक चर्चा की है। वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म का इतिहास विभिन्न युगों में लिखा गया है। यूरोप में पुनर्जागरण तथा धर्मसुधार काल धार्मिक इतिहास लेखन की दृष्टि से स्वर्णकाल माना जाता है। धार्मिक विषयों पर प्रोटेस्टेंट तथा कैथेलिक इतिहासकारों ने बहुत लिखा है।


मानव समाज को नैतिक रूप से संयमित एवं नियंत्रित करने में धर्म की महत्वपूर्ण भूमिका है। समस्याओं में जकड़े हुए समाज की प्राण वायु धर्म ही है। मानव समाज की धर्मसम्मत जिज्ञासाओं की पूर्ति के लिए धार्मिक इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इतिहासकारों का एक वर्ग धार्मिक इतिहास लेखन की ओर अग्रसर हुआ। आरंभ से लेकर अब तक होने वाले समस्त धार्मिक क्रियाकलाप धार्मिक इतिहास के अंतर्गत आते हैं। धर्म एवं धार्मिक इतिहास की दिशा में आरंभिक काल से ही भारत ने समस्त विश्व का आध्यात्मिक नेतृत्व किया है।









भारत के प्राचीन धार्मिक साहित्य वेद, वेदांग, पुराण, ब्राह्मण, स्मृतियाँ, गीता की धार्मिक इतिहास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका है। वैदिक धर्म के पतन के काल में उसके पुनरोद्धारक श्री शंकराचार्य ने गीता पर भाष्य लिखकर उसमें निहित तत्वज्ञान को सुस्पष्ट किया। प्राचीन भारतीय संदर्भ में छठी शताब्दी ई. पू. के धार्मिक आंदोलन, मध्य युग में भक्ति आंदोलन एवं सूफीवादी आंदोलन एवं आधुनिक युग में 19वीं शताब्दी के धार्मिक आंदोलन धार्मिक इतिहास लेखन के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इस दृष्टिकोण से गोविन्द चन्द्र पाण्डेय कृत बौद्ध धर्म के विकास का इतिहास, आचार्य नरेन्द्र देव कृत 'बौद्ध धर्म दर्शन, राहुल सांकृत्यायन कृत 'बौद्ध दर्शन, कुआंग चाऊ सिआग कृत चीनी बौद्ध धर्म का इतिहास, यू. डी. बरोडिया कृत 'History and Literature of Jainism', राहुल सांकृत्यायन कृत 'इस्लाम धर्म का इतिहास, तारा चन्द्र कृत 'The Influence of Islam on Indian Culture G. H. Westcot कृत 'Kabir and the Kabir Panth के. एन. निजामी कृत 'Some Aspects of Religion and Politics in India During the Thirteenth Century, J. Arberry d "Doctrine of the Sufism, गम्भीरानन्द स्वामी कृत 'History of the Ramkrishna Math and Mission', रोमा रोलैण्ड कृत Nr 'The Life of Vivekananda and the Universal Gospel', लाजपत राय कृत 'आर्य समाज एम. जी. रनाडे कृत 'Religious and Social Reform' आदि विभिन्न कृतियों का धार्मिक इतिहास लेखन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।





मानव के सर्वांगीण विकास में धार्मिक इतिहास की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैदिक, बौद्ध, इस्लाम, क्रिश्चियन, सिक्ख एवं जैन धर्म के सिद्धांत आज भी पूर्णतः प्रासंगिक हैं। जातिगत भेद को दूर करने की दिशा में क्रिश्चियन समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्ति आंदोलन के प्रमुख प्रणेता नानक एवं कबीर की शिक्षाएँ वर्तमान में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की दिशा में उपयोगी एवं प्रासंगिक हैं।