सर्व शिक्षा अभियान - Sarva Shiksha Abhiyan

सर्व शिक्षा अभियान - Sarva Shiksha Abhiyan

सर्व शिक्षा अभियान - Sarva Shiksha Abhiyan


विद्यालय पद्धति के सामुदायिक स्वामित्व द्वारा आरंभिक शिक्षा के सार्वभौम करने का प्रयत्न है। यह पूरे देश में बेहतर बुनियादी शिक्षा को प्रदान करने का एक प्रयत्न है। सर्वशिक्षा अभियान का लक्ष्य, वर्ष 2010 तक 6 से 14 वर्ष की आयु समूह के सभी बालकों के लिए उपयोगी और प्रासंगिक आरंभिक शिक्षा मुहैया कराना है। विद्यालयों के प्रबंध में समुदाय की सक्रिय सहभागिता के साथ सामाजिक क्षेत्रीय और लिंग अंतरालों की खाई को भरनेका दूसरा लक्ष्य भी है। इसका लक्ष्य बालकों को उनके प्राकृतिक पर्यावरण के बारे में इस तरीके से जानने और निपुणता प्राप्त करने देना है जिससे कि वे अपनी मानवीय क्षमता को आध्यात्मिक और भौतिक रूप से पूरी तरह इस्तेमाल कर पाएं। सर्वशिक्षा अभियान ने कार्यान्वयन के लिए एक ऐसा स्वरूप प्रदान किया है, जो राज्यों को समूचे स्वरूप के अंतर्गत संदर्भ से संबन्धित विशिष्ट मार्गदर्शी सिद्धांत तैयार करने की अनुमति देता है इससे स्थानीय विशिष्टता प्रदर्शित करने और जरूरत आधारित योजना का संवर्धन करने के लिए राज्यों में जिलों और संघ राज्य क्षेत्रों को प्रेरित किया जाता है। सर्वशिक्षा अभियान की व्यापक कार्यनीतियों में, सांस्थानिक सुधार, सतत वित्तीयन समुदाय आधारित निरीक्षण और पूरी पारदर्शिता के साथ सामुदायिक स्वमित्व, राष्ट्रीय, राज्य और जिला संस्थाएं जैसे एनआई.पी.ए./एन.सी.ई.आर.टी/एन.सी.ई.टी/एस.आई.ई.एम.ए.टी./ डी.आई.ई.टी. के लिए सांस्थानिक क्षमता निर्माण सम्मिलित हैं। यह बालिकाओं को वरीयता देता है और शैक्षिक प्रक्रिया में विशेष समूहों (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के बालकों, अल्पसंख्यक समूहों, शहरी वंचित बालकों, वंचित समूहों और विशेष जरूरत वाले बालकों) पर विशेष जोर देता है।