सामाजिक लेखा परीक्षा - Social Audit

सामाजिक लेखा परीक्षा - Social Audit

सामाजिक लेखा परीक्षा - Social Audit

सामाजिक लेखा परीक्षा भारत में तुलनात्मक रूप से खासकर विकास क्षेत्र में एक नवीन विषय है, यह समुदाय के लोगों को सशक्त करने का साधन है और विकास तथा संबन्धित कार्यों में पदधारकों की जवाबदेही की मांग करता है। सामाजिक लेखापरीक्षा एक प्रक्रिया है, जिसमें समुदाय द्वारा किसी परियोजना, क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्य अथवा कार्यक्रम के लाभ-हानी का जनता में मुक्त रूप से अवलोकन किया जाता है। सामाजिक लेखा परीक्षा की मान्यता है कि जहाँ तक सम्भव हो सभी संबन्धित लोगों की सहमति तथा समझ-बूझ से लोकतांत्रिक स्थानीय प्रशासन किया जाना चाहिए।







सामाजिक लेखा परीक्षा संगठन की सामाजिक और नैतिक कार्य क्षमता का मापन करने समझने, रिपोर्ट करने और सुधारने का ढंग है। यह दृष्टिकोण और वास्तविकता के मध्य अंतरालों को कम करता है। यह लेखा परीक्षा हिस्सेदारों की आवाज को महत्व देता है जिनमें वंचितगरीब समूह सम्मिलित हैं जिनकी आवाज मुश्किल से सुनी जाती है तथा स्थानीय शासन के प्रयोजनों से खासकर स्थानीय निकायों में जवाबदेही और पारदर्शिता मजबूत करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता हैं। सामाजिक लेखा परीक्षा सहभागी स्थानीय नियोजन पर समुदाय को प्रशिक्षित करता है और लोकतंत्र तथा सामुदायिक भागीदारी को प्रेरित करता है। यह सामूहिक निर्णयन का विकास करता है और मानव संसाधन व सामाजिक पूँजी विकसित करता है।








सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए सबसे अधिक उपयुक्त संस्थानिक स्तर ग्राम सभा है जिसे पंचायत के चुने गए प्रतिनिधियों और सहकारी कार्यकर्ताओं का पर्यवेक्षण और निगराणी करने के लिएपंचायती राज अधिनियमों द्वारा, निगरानी की शक्तियाँ और जिम्मेदारी दिए गए हैं। इसके अलावा, ग्राम सभा, वार्षिक लेखा विवरण और लेखा परीक्षा रिपोर्टों की भी जांच-पड़ताल करती है। ये अंतर्निहित शक्तियाँ हैं जो ग्राम सभा को अन्य कार्यों के अलावा, सामाजिक लेखा परीक्षा के लिए अप्रत्यक्ष रूप से अधिकार प्रदान करती हैं। ग्राम सभा के पास जांच करने के लिए बजट आवंटनों लाभार्थियों की सूची प्रत्येक योजना के अंतर्गत मदद नामावली, बिलों, वाउचरों, खातों आदि से संबन्धित सभी सार्वजनिक प्रलेखों का निरीक्षण करने, वार्षिक लेख-विवरणों और लेखा परीक्षा रिपोर्टों की जांच करने, पिछले वर्ष के स्थानीय प्रशासन अथवा कार्यक्रम की कोई नई गतिविधि की समीक्षा करने का अधिकार प्रदान किया गया है। इसके अलावा, स्थापित नियमों का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए कर्मियों की जवाबदेही निर्धारित करने, संबन्धित स्थानीय विकास परियोजनाओं की पहचान करने नियोजन करने, कार्यान्वयन करने, निगरानी करने और मूल्यांकन करने में पारदर्शिता का संवर्धन करने का निवारण प्रस्तुत करने तथा सामाजिक लेखा परीक्षा की बैठकों में भाग लेते समय ग्रामीण गरीबों के लिए उनके मुद्दों को उठाने के लिए अवसर सुनिश्चित करने का भी अधिकार प्राप्त है। सामाजिक लेखा परीक्षा में एक अन्य शक्तिशाली अस्त्र, सूचना का अधिकार अधिनियम है जो सूचना प्राप्त करने और दंड प्रदान करने अथवा गलत सूचना भेजने/देने के ढंगों का वर्णन करता है।









सामाजिक लेखा परीक्षा की प्रक्रिया को निम्न चरणों में बांटा जा सकता है -


1. लेखा परीक्षा की जानेवाली परियोजना के संभावित उद्देश्यों का वर्णन करना।


2. हिस्सेदारों की पहचान करना और उनकी विशिष्ट भूमिकाओं और कार्यों पर ध्यान देना।


3. उन कार्य-निष्पादन संकेतकों को परिभाषित करना जिन्हें सामाजिक लेखा परीक्षा की प्रक्रिया में भागीदार ज्यादातर सदस्यों द्वारा इसे समझा और स्वीकार किया जाता हो। 


4. कार्य-निष्पादन संकेतकों पर सूचना की समीक्षा और परिचर्चा करने के लिए नियमित बैठक करना।


5. सामाजिक लेखा परीक्षा की बैठक की अनुवर्ती कार्रवाई करना तथा हिस्सेदारों की कार्रवाइयों की समीक्षा करना तथा हिस्सेदारों के सुझाव अनुसार भावी कार्रवाई पर सहमति देना के ।




6. विश्वसनीय स्थानीय लोगों का समूह स्थापित करना जो प्रतिबद्ध और मुक्त हो और यह देखना कि सामाजिक लेखा परीक्षा पर आधारित निर्णयों का कार्यान्वयन हो गया है।