सामाजिक नियोजन और पंचवर्षीय योजनाएं - Social Planning and Five Year Plans
सामाजिक नियोजन और पंचवर्षीय योजनाएं - Social Planning and Five Year Plans
प्रत्येक समाज अपने समय में अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए अनी शक्ति का आंकलन कर योजना बनाता है। भारत में सामाजिक नियोजन का विचार उपनिवेशकाल से ही देखा जा सकता है। जीवन स्तर में सुधार के लिए योजना बनाने पर दादा भाई नौरोजी, एम. जी. रानाडे और आर. जी. दत्ता ने बल दिया। अंग्रेजी सरकार ने भारत में बढ़ते असंतोष को कम करने के लिए कई आयोग गठित किए। Montage Chelmsford Reform द्वारा स्थानीय स्वशासन, कृषि, सामुदायिक विकास और शिक्षा पर प्रांतीय विधान बनाए गए लेकिन कोई राष्ट्रीय नीति नहीं बनाई जा सकी। साइमन कमीशन और गोलमेज सम्मलेन में भी इस पर चर्चा हुई। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने दलितों के सवाल को हल करने के लिए सरकार को आवश्यक प्रावधान करने पर बल दिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1929 में अपने प्रस्ताव द्वारा तत्कालीन समाज की आर्थिक समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। 1931 में भी कांग्रेस द्वारा एक प्रस्ताव में राजनीतिक आजादी को आर्थिक आजादी के साथ जोड़ने की कोशिश की गयी। 1935 8 राज्यों में अंतरिम सरकार गठित हुई। 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा एक प्रस्ताव पारित कर विशेषज्ञों की अंतरप्रांतीय समिति गठित कीगयी जिसे राष्ट्रीय विकास में बाधक बनने वाले तत्वों और गंभीर समस्याओं पर विचार कर समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करना था।
अर्थशास्त्री एम. विश्वेश्वरैया ने 1934 में प्लांड इकॉनमी नामक पुस्तक प्रकाशित कर भारत में नियोजित सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए सुझाव दिया। 1938 में सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इन्होनें इसके लिए एक राष्ट्रीय नियोजन समिति बनाई। इसमें 15 सदस्य रखे गए। जवाहरलाल नेहरू इसके अध्यक्ष थे। नेहरु जी ने इस कार्य की The Discovery of India में समीक्षा भी की थी। 21 उपसमितियाँ भी बनाई गई थी कुल 350 सदस्य सभी समितियों में थे।
1944 में ब्रिटिश सरकार द्वारा नियोजन तथा विकास विभाग स्थापित किया गया। 1945 में औद्योगिक नीति घोषित हुई। 1946 में कांग्रेस लीग मंत्रालय ने इस विभाग को समाप्तकर नियोजन बोर्ड बनाया। आजादी के बाद 1950 में संविधान लागू हुआ। 1951 में सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पंचवर्षीय योजना को प्रारंभ किया गया। अब भारत एक सम्प्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य था। भारत को एक सम्प्रभु, संपन्न, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए पंचवर्षीय योजनाओं में निम्न लक्ष्य रखे गए।
◆ तीव्र आर्थिक विकास
◆ आय और सम्पति में विषमताओं को कम करते हुए संतुलित करना
◆ सेवा के क्षेत्रों और रोजगार के व्यवहरों में वृद्धि करना समान अवसर उपलब्ध कराना
◆ देश को आत्मनिर्भर बनाना
◆ जीवन स्तर में सुधार
◆ विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास
पंचवर्षीय योजनाओं में सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों को एक दूसरे का पूरक मानते हुएमिश्रित अर्थव्यवस्था का आधार रखा गया। बुनियादी एवं भारी उद्योगों जिसमें अधिक पूँजी निवेश की जरूरत होती है, की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्रों को और निजी क्षेत्रों को जनता की आवश्यकताओं की पूर्ति की जिम्मेदारी दी गई।
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