सामाजिक नियोजन - Social Planning
सामाजिक नियोजन - Social Planning
सामाजिक नियोजन एक ऐसा आंदोलन है जिसमें हाल ही में महत्ता प्राप्त की है। अधिकांश समाज वैज्ञानिकों का मानना है कि मनुष्य को अपनी समस्याओं के प्रभावी समाधान हेतु वैज्ञानिक शोध द्वारा खने गए तथ्यों के आधार पर नियोजन करना चाहिए। इनका यह अनुभव है कि अधिकांशत सामाजिक समस्याएँ मानव निर्मित होती है एवं इनका समुचित उपचार मनुष्य द्वारा किया जा सकता है। अतः मनुष्य अपने सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु सामाजिक नियोजन का सहारा लेता सामाजिक नियोजन का प्रमुख कार्य आर्थिक विकास की निरंतर वृद्धि हेतु आवश्यक सामाजिक निवेशों को प्रोत्साहन देना है तथा उसकी उपलब्धता को सुनिश्चित कराना है ताकि मानव द्वारा उत्पन्न किये गये ये सामाजिक निवेश, मानव समाज व व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सक्रिय रूप से सहायक हो साथ ही साथ इसका कार्य सामाजिक एवं आर्थिक कारकों के बीच इच्छित समन्वय स्थापित करना है ताकि विकास प्रक्रिया तीव्र गति से चलाई जा सके। आत्मनिर्भरता की दृष्टि से विकास की प्रक्रिया का इस प्रकार कार्यान्वयन करना ताकि नियोजन, कार्यान्वयन, मूल्यांकन इत्यादि सभी स्तरों पर जन सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा सके। सामाजिक नियोजन के प्रकार्यों को निम्नलिखित बिदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है।
1) विकास के प्रतिफल को समाज के विभिन्न वर्गों तक समान रूप से उपलब्ध कराने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन तथा समाज सुधार की गति को तीव्रता प्रदान करना।
2) संस्थागत तथा प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना ताकि समाज से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके।
3) विकास के लक्ष्यों को निर्धारित करने से संबंधित निर्णय प्रक्रिया में समुदाय कोसंवेगात्मक रूप से सम्मिलित करना।
4) समुदाय के उत्पादन एवं उत्पादकता को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए प्रेरित करना।
(5) स्थानीय शक्तियों स्त्रोतों तथा ज्ञान का उपयोग अधिकाधिक करना ताकि विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
(6) उचित तकनीकी ज्ञान को उपलब्ध कराना तांकि समुदाय रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके एवं निर्धन वर्ग को अधिक से अधिक लाभान्वित किया जा सके
(7) निर्धन वर्ग को लाभकारी योजनाओं तथा कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना तथा निर्णय लेने, लिये गये निर्णयों को लाभों से लाभान्वित कराना।
8) पिछड़े वर्ग से संबंधित समुदाय को स्वाथ्य, शिक्षा, पेयजल की उपलब्धता तथा उत्पादन एवं कार्यक्षमता स्तर को बढ़ाने के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराना तथा आवश्यक प्रशिक्षण का प्रबंध कराना।
9) ग्रामीण जनसंख्या के प्रवास को रोकना तथा संतुलित नगरीय ग्रामीण संबंधों द्वारा जनसंख्याका समुचित वितरण प्रारूप प्रदान कराना जिससे शहरों पर बोझ कम हो सके।
10) विकास संबंधी कार्यक्रमों के लिए पर्यावरण का सावधानीपूर्वक उचित प्रयोग करना।
11) आर्थिक एवं स्थानिक नियोजन को एकीकृत करना जिससे सामाजिक विकास की प्रक्रिया बढ़ाई जा सके।
12) व्यवस्था को इस प्रकार कार्यान्वित करना कि उच्चस्तरीय प्रयासों और विकास में पारस्परिक संबंध स्थापित किया जा सके।
13) सामाजिक नियोजन के अंतर्गत समाज की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा कार्यक्षमता, सांस्कृतिक उन्नति, जीवन स्तर में सुधार वैज्ञानिक दृष्टिकोण आदि का भी विकास महत्वपूर्ण है।
वार्तालाप में शामिल हों