सामाजिक नीति और समाज कल्याण प्रशासन - Social Policy and Social Welfare Administration
सामाजिक नीति और समाज कल्याण प्रशासन - Social Policy and Social Welfare Administration
'नीति' शब्द के सर्वाधिक सामान्य, सामाजिक और राजनीतिक इस्तेमाल से अभिप्राय कार्रवाई अथवा लक्षित कार्रवाई से है जिसे खोजे गए अथवा खोजे जाने वाले संभावित विकल्पोंकी समीक्षा के बाद तार्किक तरीके से अंगीकृत किया गया समझा जाता है। पहले यह समझा गया कि नीति निर्माण अथवा नीति निर्धारण प्रशासन की तुलना में उच्च क्रम कार्यकलाप है और सामाजिक योजनाकारों ने सिफारिश की है कि नीति-निर्धारण को प्रशासन अथवा नीति-निष्पादन से बिल्कुल पृथक होना चाहिए। विल्सन ने दावा किया है कि प्रशासन न केवल नीति निर्धारकों से नीचे थे अपितु वे सम्भवतया मूल्य-तटस्थ और कुशलभी थे। निष्पादन के सम्बन्ध में, अधिकारी तंत्र सामान्य रूप से वे साधन हैं जो लोक नीति लागू करते हैं। नौकरशाही उन नीतियों के लिए जरूरी है जिन्हें कुछ पूर्वानुमान समता और उचित प्रक्रिया के साथ लागू किया जाना चाहिए। फिर भी, नौकरशाही के नकारात्मक अर्थ (उयथा- लालफीतशाही, कठोरता, नियमों और विनियमों आदि पर ज्यादा बल देना) लोकनीति की क्षमता में सार्वजनिक विश्वास लौटाने पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं।
इस समय, प्रशासन का अभिप्राय नीति निर्माण है। प्रशासन की भूमिका नीति के निष्पादन तक सीमित नहीं है क्योंकि प्रशासन नई नीतियों के निर्माण में अत्यधिक सक्रिय भाग ले रहे हैं और पुरानी नीतियों की समीक्षा तथा उनमें बदलाव कर रहे हैं। प्रशासन भविष्य के लिए नीति निर्माण करने में अन्य तरीके से भी भाग लेते हैं। वे विधान के लिए सिफारिशें तैयार करते हैं और यह नीति निर्धारण का एक भाग होता है। आधुनिक समय में, नीति और प्रशासन के मध्य सम्बन्ध इतना ज्यादा अस्पष्ट हो गया है कि यह कहना कठिन है कि कहाँ नीति समाप्त होती है और प्रशासन कहाँ शुरू होता है अथवा प्रशासन कहाँ समाप्त होता है अथवा कहाँ नीति शुरू होती है।
नीति आधार स्तर पर, कार्यक्रम नियोजन और निष्पादन के लिए, दिशा प्रस्तुत करती है। अत: सामाजिक नीति निर्माण किसी भी सामाजिक प्रशासन प्रणाली के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है। जब तक सामाजिक प्रशासन की मदद पर्याप्त सामाजिक विधान की प्रणाली और ठोस सामाजिक नीति द्वारा नहीं की जाती तब तक इसका ठीक प्रयोजन प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि सामाजिक नीति के बिना सफल सामाजिक प्रशासन नहीं हो सकता है। इसके अलावा, सही तरीके से बनाई गई नीति तब तक अनुपयोगी है जब तक इसका प्रभावपूर्ण तरीके से कार्यान्वयन नहीं किया जाता। इस प्रकार प्रशासन को प्रभावित करने वाले कारक नीति निष्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करते हैं। लोकनीति के सफल कार्यान्वयन पर संगठनात्मक दक्षता का सीधा और ठोस प्रभाव पड़ता है।
सामाजिक नीति, सामाजिक नियोजन के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इसका अवधारणात्मक रूप से स्पष्ट और सरल, सैद्धांतिक रूप से ठोस और लक्ष्य समूहों में प्राप्त किए गए इष्टतम बदलावों के संदर्भ में वर्णन होना चाहिए। भूमिकाओं के स्पट उल्लेख और सभी हिस्सेदारो की जिम्मेदारियों, स्पष्ट निर्देशों और संगठनात्मक संरचनाओं वाली नीति अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी तरीके से सामाजिक नीति, उस विशेष कार्य के लिए सरकार की वचनबद्धता प्रस्तुत करती है जिसके लिए नीति का पूरा करती रहेगी। निर्माण किया गया है। इसमें सरकार की वरीयताएँ और संसाधन वितरण शामिल होते हैं। इस प्रकार तकनीकी और बजट सम्बन्धी साधनों के साथ-साथ नीति में समय सीमा का भी वर्णन होना चाहिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, भारत में महिला सशक्तिकरण सम्बन्धी नीति, विकलांग व्यक्तियों के लिए विकलांग नीति, राष्ट्रीय युवा नीति, राष्ट्रीय बाल नीति इत्यादि कुछ उदाहरण हैं।
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