सामाजिक नीति अध्ययन विषय के रूप में - Social Policy as a Study Subject

सामाजिक नीति अध्ययन विषय के रूप में - Social Policy as a Study Subject

सामाजिक नीति अध्ययन विषय के रूप में - Social Policy as a Study Subject

 सामाजिक नीति अध्ययन विषय के रूप में निम्नलिखित शीर्षकों को समाहित करती है - 


• सामाजिक कल्याण, समाज और व्यक्तियों के बारे में विभिन्न विचारधाराएं, मूल्य और विश्वास 


• वास्तविक जीवन एवं समकालीन सामाजिक समस्याएं 


• सामाजिक कल्याण मुद्दों पर राज्यों और सरकारों के दृष्टिकोण एवं कार्य 


• सामाजिक नीति निर्माण और कार्यान्वयन का राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संदर्भ 





सामाजिक नीति अपने आप में नीति निर्माण, क्रियान्वयन एवं प्रभावों का अध्ययन है जिससे जनता के सामाजिक हित जुड़े होते हैं। सामाजिक नीति का लक्ष्य समाज में कल्याणकारी सेवाओं के जरिए मानव जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि ला कर कल्याण को बढ़ाना होता है।


2. सामाजिक नीति उपकरण के रूप में 


इस नीति के उपकरण द्वारा सरकारें बाजार एवं अन्य संस्थाओं पर नियमन एवं नियंत्रण रखती हैं ताकि सामाजिक हितों की रक्षा हो सके। यह संसाधनों की लामबंदी में सहायक है। अपने व्याक कार्यक्षेत्र में मौद्रिक नीति, भूमि सुधार सामाजिक विधान, कल्याणकारी उपायों की सहायता से सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति करती है। सामाजिक नीति सामाजिक बदलाव का एक सकारात्मक उपकरण है।


3. वितरणात्मक एवं पुनर्वितरणात्मक भूमिका


 सामाजिक नीति दोनों ही भूमिकाओं का निर्वाह करती है। यह लोगों के मध्य समाज में विद्यमान संसाधनों का वितरण करती है और ऐसा करते हुए अपने सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति भी करती है। यदि ऐसा प्रतीत होता है कि समाज में आवंटित संसाधन सामाजिक लक्ष्योंकी प्राप्ति में सहायक नहीं हो रहे हैं या किसी वर्ग को संसाधनों की कमी है तो वह संसाधनों के पुनर्वितरण को भी तरजीह देती है।


4. समाज के एक वर्ग से दूसरे वर्ग को संसाधन हस्तांतरण


यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है। एक लोकतांत्रिक समाज एवं सरकार में दोनों का दायित्व है कि हर व्यक्ति और समाज के लिए सामाजिक न्याय और अवसर की समानता स्थापित करें। यदि सरकार यह अनुभव करें कि सभी व्यक्तियों एवं समाजों को संसाधनों का वितरण उनकी आवश्यकता अनुसार नहीं हुआ है तो वह संसाधनों का वितरण उन समाजों में ज्यदा कर सकती है जो वंचित तबके हैं। यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरी कम करने का माध्यम है। हैं।










5. समाज के वंचित एवं उपेक्षित वर्ग से संबंधित 


सामाजिक नीति का एक मुख्य सरोकार समाज के हाशिए एवं वंचित तबकों की बेहतरी से है। इन वंचित एवं हाशिए के वर्गों में गरीब स्त्रियां, वृद्ध, विकलांग बच्चे / बच्चियां आदिवासी, तृतीयपंथी, अनुसूचित जाति विस्थापित आदि समाहित है। इस नीति का मकसद इन वर्गों को समाज में उचित स्थान प्रदान करना और सशक्त बनाना है।


6. नीतियों के साथ सहसंबंध


सामाजिक नीति एक प्रदत्त समाज विशेष के अनुभवों से जन्म लेती है, वह अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अन्य आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक आदि का भी सहारा लेती है। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि सामाजिक नीति के लक्ष्यों को पूरा करने में इन सभी का योगदान होता है। मसलन आर्थिक नीतियां ऐसी बनायी जानी चाहिए जिनसे समाज में असमानता कम होती हो तो यह सामाजिक नीति की पूरक नीति हो जाती है।