समाज मनोविज्ञान - परिभाषा, उपयोगिता, क्षेत्र, प्रकृति, महत्व - Social Psychology - Definition, Utility, Scope, Nature, Significance

समाज मनोविज्ञान - परिभाषा, उपयोगिता, क्षेत्र, प्रकृति, महत्व - Social Psychology - Definition, Utility, Scope, Nature, Significance

समाज मनोविज्ञान - परिभाषा, उपयोगिता, क्षेत्र, प्रकृति, महत्व - Social Psychology - Definition, Utility, Scope, Nature, Significance

समाज मनोविज्ञान

मनुष्य जन्म से जिज्ञासु होता है। इस कारण मनुष्य व्यवहार और व्यवहार के विभिन्न स्वरूपों को जानने व समझने का प्रयास करता है। प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न प्रकार का व्यवहार करता है। इसी व्यवहार के 'क्यों' 'कैसे' और 'किस लिए' को समझने का प्रयास ही समाज मनोविज्ञान करता है।


समाज मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत सामाजिक समस्याओं, सामाजिक व्यवहार तथा मनुष्य की सामाजिक अंतःक्रिया का क्रमबद्ध तथा वैज्ञानिक रूप सै अध्ययन किया जाता है।

 

मनोविज्ञान की शाखा के रूप में समाज मनोविज्ञान का विस्तार तथा विकास मैक्डूगल की पुस्तक "Introduction to Social Psychology", 1908 के प्रकाशित होने के बाद तेजी से हुआ।

 

समाज मनोविज्ञान की परिभाषाएँ


किम्बल यंग (1961) के अनुसार

"समाज मनोविज्ञान व्यक्तियों की पारस्परिक प्रतिक्रिया का और इससे प्रभावित व्यक्ति के विचारों, संवेगो, तथा आदतों का अध्ययन है।" 

 फिशर (1982) के अनुसार 

समाज मनोविज्ञान को पारिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि किस प्रकार से व्यक्ति का व्यवहार सामाजिक वातावरण में उपस्थित दूसरे लोगों के द्वारा प्रभावित होता है, बदले में उस व्यक्ति का व्यवहार भी प्रभावित होता है।

 फेल्डमैन (1985) के अनुसार

"समाज मनोविज्ञान वह विज्ञान है जिसमें यह अध्ययन किया जाता है कि एक व्यक्ति के विचार भावनाएं तथा क्रियाएं दूसरे व्यक्तियों द्वारा किस प्रकार प्रभावित होती हैं।"

बैरन तथा बाइरनी (2003) के अनुसार

"समाज मनोविज्ञान, वह विज्ञान है जो सामाजिक परिस्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार की प्रकृति और कारणों के ज्ञान से सम्बन्धित होता है। 

समाज मनोविज्ञान की प्रकृति

सामाजिक मनोविज्ञान की परिभाषाओं पर विचार करने पर स्पष्ट होता है कि

सामाजिक मनोविज्ञान एक विज्ञान है। यह भी स्पष्ट होता है कि इसमें व्यक्ति के उन व्यवहारों तथा अनुभवों का अध्ययन किया जाता है, जिनका प्रदर्शन या उत्पत्ति सामाजिक परिस्थिति के कारण होता है। ऐसे व्यवहार जिनकी उत्पत्ति सामाजिक कारणों से नहीं होती है। 

वे सामाजिक मनोविज्ञान की परिधि में नहीं आते हैं।

इसका मूल उद्देश्य सामाजिक व्यवहार को समझाना तथा कारणों की स्पष्ट करना होता है। सामाजिक व्यवहार सामाजिक अन्तक्रिया या सामाजिक प्रभाव का परिणाम होता है। सामाजिक उददीपक परिस्थिति का निर्माण अन्य व्यक्ति, अन्य व्यक्तियों के समूहों तथा सांस्कृतिक कारकों से होता है। इनसे प्रभावित होने पर सामाजिक व्यवहार प्रदर्शित होता है।

 




समाज मनोविज्ञान विज्ञान है इस तथ्य का परीक्षण विज्ञान के आवश्यक तत्वों के आधार पर कर सकते हैं। विज्ञान के आवश्यक तत्व निम्नलिखित हैं:

 वैज्ञानिक पद्धति

 किसी भी विषय को विज्ञान तभी कहा जा सकता है तब उसकी अध्ययन पद्धतियां वैज्ञानिक हो। निरीक्षण विधि, श्रेणी, मापनी विधियां, मनोमिति विधियां तथा सांख्यिकीय विधियां ऐसी वैज्ञानिक विधियां हैं जिनका प्रयोग समाज मनोविज्ञान की समस्याओं के अध्ययन हेतु किया जाता है। प्रमाणिकता: किसी भी विषय को विज्ञान तभी कहा जाता है जब उसकी विषय सामग्री में प्रमाणिकता का गुण पाया जाता है अर्थात् उस विषय सामग्री को जितनी बार जांचा जाये उससे एक ही परिणाम प्राप्त हो समाज मनोविज्ञान की विषय सामग्री प्रमाणिक होने के कारण समाज मनोविज्ञान इस कसौटी पर खरी उतरती है।

सार्वभौमिकता

 वैज्ञानिक विषयों के सिद्धांत तथा नियमों के सार्वभौमिक होने का अर्थ है कि यह सिद्धांत और नियम किसी देश या काल में खरे उतरते हैं। समाज मनोविज्ञान की विषय सामग्री में वस्तुनिष्ठता, प्रमाणिकता और भविष्यवाणी की योग्यता है तो निश्चित रूप से यह सिद्धांत और नियम सार्वभौमिक होंगे।

वस्तुनिष्ठता

जब हम किसी घटना का परीक्षण वास्तविक रूप में करते हैं और जब शोधकर्ता की मनोवृत्तियों का परीक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता तो ऐसे परीक्षणों से प्राप्त परिणाम वस्तुनिष्ठ परिणाम कहलाते हैं। शोध करने वाले

सभी शोधकर्ता एक ही निष्कर्ष प्राप्त करते हैं तो उस परिणाम में वस्तुनिष्ठता पायी जाती है।

भविष्यवाणी की योग्यता

 वैज्ञानिक विषयों में भविष्यवाणी की योग्यता भी पायी जाती है। इसका तात्पर्य यह है कि यदि किसी समूह के व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाये तो यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि वह समूह भविष्य में किस तरह का व्यवहार करेगा। चूंकि समाज मनोविज्ञान की समस्याओं का परीक्षण वैज्ञानिक विधियों द्वारा किया जाता है अतः समाज मनोविज्ञान के अध्ययनों के आधार पर भविष्यवाणी की जा सकती है।

 

समाज मनोविज्ञान का महत्व या उपयोगिता

व्यवहारिक उपयोगिता

सुखद सामाजिक जीवन स्थापना

स्वस्थ सामाजिक समायोजन में।

सामाजिक प्रकृति के अध्ययन में ।

भेदभाव मुक्त सामाजिक विकास में।

सामाजिक अंतःक्रियाओं के अध्ययन में ।

अपराध तथा समाज विरोधी व्यवहार के अध्ययन में।

 पारिवारिक समायोजन के अध्ययन में ।

क्रांति, युद्ध आदि गंभीर सामाजिक समस्याओं के अध्ययन

 जनमत, प्रचार तथा फैशन आदि क्षेत्र के अध्ययन में ।



 सैद्धान्तिक उपयोगिता 

सामाजिक मनोविज्ञान की कुछ सैद्धान्तिक उपयोगिताएं भी हैं, जिसके कारण मनोविज्ञान की यह शाखा काफी लोकप्रिय हो गई है।

सामाजिक परिस्थिति में व्यक्तियों के अन्तःक्रियाओं का अध्ययन कर समाज मनोवैज्ञानिकों द्वारा ऐसे नियम एवं सिद्धान्त तैयार किए जाते हैं जिससे स्वस्थ सामाजिक क्रम (Social order) बना रहे। निश्चित सामाजिक क्रम एवं सामाजिक व्यवस्था के परिणामस्वरूप व्यक्तियों में खुशहाली छाई रहती है।

 

प्रत्येक समाज का एक मानक (Norm) तथा मूल्य (Value) होता है, जिसके अनुसार व्यक्तियों को व्यवहार करनी पड़ता है। इन मानकों के आधार पर समाज मनोवैज्ञानिक यह बताने की कोशिश करते हैं कि अमुक व्यक्ति का व्यवहार समाज विरोधी क्यों है। इसके कारण क्या हैं। इनका उपचार कैसे हो सकता है।

 

समाज मनोविज्ञान व्यक्तित्व के स्वस्थ विकास में मदद करता है। समाज मनोविज्ञान व्यक्तियों को एक सफूल, सजग एवं सूंदर नागरिक बनाकर एक आदर्श समाज की स्थापना करने में मदद करता है।

 

समाज मनोविज्ञान दूसरे व्यक्तियों का सही सही प्रत्यक्षण करने तथा उनके बारे मे सही-सही निर्णय लेने में मदद करता है। 

सामाजिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा व्यक्ति प्रत्यक्षण (Social perception) के क्षेत्र में अनेक सिद्धान्तों एवं नियमों का प्रतिपादन किया गया है। जिनसे अन्य व्यक्तियों को समझने एवं उनके साथ सामाजिक अन्तःक्रिया करने में मदद मिलती है।





समाज मनोविज्ञान का विषय क्षेत्र

 

बालक के सामाजीकरण

शिशु जैसे बड़ा होता है वैसे-वैसे उसमें सामाजिक समझ भी बढ़ती है। तदनुसार वह सामाजिक व्यवहार भी करने लगता है। शिशु के सामाजिक अधिगमे प्रक्रम का जीवन में अत्यधिक महत्व है। अतः बच्चों में अच्छे गुणों का विकास तथा अवांछित व्यवहारों को नियंत्रित करने हेतु उपर्युक्त परिस्थितियाँ उत्पन्न करना सामाजिक मनोवैज्ञानिकों का मुख्य कार्य है।


सामाजिक मनोवृत्तियों का अध्ययन  

समाज के विभिन्न पक्षों, व्यक्तियों तथा विचारों के प्रति प्रतिक्रिया करने की मनोवैज्ञानिक तत्परता ही सामाजिक मनोवृत्ति कहलाती है। यह मनोवृत्तियां जन्मजात न होकर अर्जित की हुई होती हैं। हमारे अधिकतर कार्य व्यक्तियों, वस्तुओं और विचारों के प्रति प्रतिक्रियाएं हमारी इन्ही मनोवृत्तियों से प्रभावित तथा निर्देशित होती है इनमें से कुछ मनोवृत्तियां सकारात्मक होती हैं जो समाज तथा व्यक्ति के विकास में सहायक होती हैं जबकि कुछ मनोवृत्तिया नकारात्मक होने के कारण सामाजिक विकास में बाधा डालती हैं।

समाज तथा देश के विकास के लिए इन बाधाओं को दूर करना आवश्यक होता है। समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत मनोवृत्ति निर्माण, परिवर्तन, परिवर्तन की विधियों तथा सिद्धांतों का विस्तार से अध्ययन किया जाता है।


संस्कृति तथा व्यक्तित्व का अध्ययन 

व्यक्ति जिस समाज में रहता है उसी की संस्कृति के अनुरूप उसका व्यक्तित्व विकसित होता है। पृथक-पृथक संस्कृतियों में. पालन पोषण को तरीका भी भिन्न-भिन्न होता है। इसी कारण एक ही समाज में दो भिन्न-भिन्न जातियों में पलने वाले बच्चों के व्यक्तित्व काम करने का तरीका, सोचने समझने का तरीका, उसकी आदत आदि भिन्न-भिन्न होती हैं। व्यक्तित्व पर संस्कृति के प्रभाव का अध्ययन समाज मनोविज्ञान के विषय क्षेत्र के अंतर्गत आता।


अंतरवैयक्तिक आकर्षण का अध्ययन:-

जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति या समूहों से अंतःक्रिया करता है तो उनके बीच आकर्षण या विकर्षण उत्पन्न होने लगता है। इस आकर्षण-विकर्षण के कई रूप हैं तथा इसे कई तत्व प्रभावित भी करते हैं इन सबका अध्ययन भी समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत आता है। 

सामाजिक व्याधियों का अध्ययन: 

समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत समाज में व्याप्त सामाजिक व्याधिकीय समस्याओं का अध्ययन भी किया जाता है। जिस प्रकार एक व्यक्ति के अंदर पूर्वाग्रह, पक्षपात तथा गलत विचार होते हैं उसी प्रकार समाज में भी ये व्याधियां हो सकती हैं। वेश्यावृत्ति, भिक्षावृत्ति बाल अपराध, पारिवारिक विघटन, सामूहिक संघर्ष आदि सामाजिक रोग आज समाज में बढ़ते जा रहे हैं इनका अध्ययन, निदान तथा इन के मानवीय एवं सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण करना तथ इनके समाधान के लिए विकल्प तैयार करना समाज मनोविज्ञान की आवश्यक विषय वस्तु है।

 




संचार माध्यमों का अध्ययन

 आधुनिक संचार माध्यम जैसे रेडियो, समाचार पत्र, टेलीविजन आदि व्यक्ति के व्यवहार, मत तथा सोचने के तरीके को प्रभावित करते हैं। इन्हीं माध्यमों के आधार पर मनोवृत्ति परिवर्तन सम्भव होता है। इनका अध्ययन भी समाज मनोविज्ञान के ही अंतर्गत किया जाता है।

प्रचार (Propaganda)

आज प्रचार का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। इसके द्वारा व्यक्ति के राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं अन्य प्रकारों के व्यवहारों का निर्देशन तथा नियंत्रण होता है। विषयवस्तु लोकप्रिय बनाने के लिए उपयोगी सुझाव देना साथ ही कुप्रचारों से बचने का भी सुझाव देना सामाजिक मनोविज्ञान का कार्य है।

समूह तथा सामूहिक व्यवहार का अध्ययन: समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत समूह उसके प्रकार तथा समूह के व्यवहार पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का अध्ययन भी किया जाता है।

सामाजिक एकता एवं तनाव का अध्ययन:- आधुनिक युग में विभिन्न जाति, धर्म, भाषा के कारण व्यक्ति में तनाव की स्थिति बनी हुई है। इन लोगों में एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या, घृणा और पक्षपात उत्पन्न हो गया है। जिस

राष्ट्रीय एकता का विखण्डन हो रहा है। सामाजिक एकता को स्थापित करके ही किसी भी देश या समाज का विकास सम्भव हो सकता है इसलिए सामाजिक एकता को स्थापित करने वाले घटकों तथा तनावों को दूर करने वाले कारकों का अध्ययन भी समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत किया जाता है।

 




सामाजिक अंतःक्रियाओं का अध्ययन:- समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत तीन प्रकार की अंतःक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है:

 

(क) व्यक्ति तथा व्यक्ति के मध्य अंतःक्रिया। 

(ख) व्यक्ति तथा समूह के मध्य अंतःक्रिया ।

(ग) समूह तथा समूह के बीच अंतःक्रिया ।

सामाजिक अंतःक्रियाओं के अंतर्गत प्रतिस्पर्धा, संघर्ष, सामंजस्य तथा संघर्ष, सहयोग आदि से सम्बन्धित समस्याओं का अध्ययन किया जाता है।


आक्रामकता और हिंसा:-

आज समूचे विश्व में आक्रामकता सम्बन्धी समस्या बढ़ती जा रही है जिसके फलस्वरूप उत्पन्न हो रही है। आक्रामकता और हिंसा को बढ़ाने वाले कारक तथा इसे दूर करने के उपायों का अध्ययन भी समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत किया जाता है ।

 

परोपकारिता 

समाज के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए परोपकारिता का गुण आवश्यक है और यही समाज में सुख, शांति स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। परोपकारिता को प्रभावित करने वाले कारक, परोपकारिता की सैद्धांतिक व्याख्या भी समाज

मनोविज्ञान के विषय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रश्न हैं।

 

सामाजिक संज्ञान का अध्ययन

हम विभिन्न संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के द्वारा अपने चारों ओर के वातावरण में उपस्थित उद्दीपकों के बारे के में जानकारी प्राप्त कर मस्तिष्क में उनकी छवि बनाते हैं जिसे व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण कहते हैं इस पर सामाजिक सांस्कृतिक तत्वों के प्रभाव को सामाजिक प्रत्यक्षीकरण कहते हैं। इन सब प्रक्रियाओं तथा इन्हें प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन समाज मनोविज्ञान के अंतर्गत किया जाता है।

 

उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त और भी अनेक समस्याओं का अध्ययन समाज मनोविज्ञान के क्षेत्र में किया जाता है। वास्तव में समाज मनोविज्ञान का क्षेत्र उतना ही व्यापक और विस्तृत है। जितना समाज और व्यक्ति का सामाजिक जीवन ।

सारांश

समाज मनोविज्ञान में भी व्यक्ति के व्यवहार का ही अध्ययन किया जाता है। समाज मनोविज्ञान में व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार पर सामाजिक अंतःक्रिया का प्रभाव किस प्रकार पड़ता है यही अध्ययन हम मनोविज्ञान की इस शाखा में करते हैं।

सिकोर्ड तथा बैकमैन (1974) ने लिखा है कि सामाजिक मनोवैज्ञानिक व्यक्तियों के व्यवहार का अध्ययन सामाजिक संदर्भ में करता है।" इसलिए समाज मनोविज्ञान को समाज में घटित होने वाले व्यवहार का अध्ययन करने वाला विषय कहा जाता है।

वैज्ञानिक स्वरूप के कारण इसमें प्रामाणिकता, भविष्यवाणी की योग्यता, सार्वभौमिकता, वस्तुनिष्ठता आदि के गुण पाये जाते हैं।