विज्ञान के रूप में समाज कल्याण प्रशासन - Social Welfare Administration as a Science
विज्ञान के रूप में समाज कल्याण प्रशासन - Social Welfare Administration as a Science
विद्वानों का मत है कि ऐसे कुछ विशेष और स्पष्ट सिद्धांत हैं जिन पर समाज कल्याण कार्यक्रमों का दैनिक प्रशासन संचालित हो रहा है। उनका यह तर्क है कि ये सिद्धांत ठोस और विवेकपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित हैं जिन्हे सार्वभौम प्रकृति का भी समझा जाता है। कुछ प्रमुख तर्क निम्न हैं -
1. वैज्ञानिक पद्धतियों का अनुप्रयोग
समाज कल्याण प्रशासन एक विज्ञान है क्योंकि अध्ययन की वैज्ञानिक पद्धति इस पर लागू होती है, जैसे कि यह अन्य सामाजिक विज्ञानों पर लागू होती है।
2. आलोचनात्मक जाँच
आलोचनात्मक जांच और प्रभाग का अध्ययन किसी भी वैज्ञानिक अध्ययन के लिए प्राथमिक मान्यता होती है, जो कि समाज कल्याण प्रशासन में भी लागू होती है।
3. सार्वभौम मार्गदर्शी सिद्धांत
समाज कल्याण प्रशासन के सार्वभौम सिद्धांत विज्ञान की कसौटी में उसकी स्थिति सुनिश्चित करते हैं। यदि हम उसी प्रकार सभी मार्गदर्शी सिद्धांतों को इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो ये सिद्धांत निश्चय ही समाज कल्याण कार्यक्रमों के उचित कार्यान्वयन में प्रशासक की मदद करते हैं। तथापि, समाज कल्याण प्रशासन के स्वरूप की विज्ञान के रूप में प्रयोग और उद्देश्यपरकता के आधार पर आलोचना की गई है। इस प्रकार यह एक सटीक विज्ञान नहीं है बल्कि यह यह अपने ही तरीके में विज्ञान है। यह कला भी है क्योंकि इसका जुड़ाव न केवल समाज कल्याण कार्यक्रमों के सामान्य सिद्धांतों के निर्माण से है।
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