व्यवसाय के रूप में समाज कल्याण प्रशासन - Social Welfare Administration as a Business

व्यवसाय के रूप में समाज कल्याण प्रशासन - Social Welfare Administration as a Business

 व्यवसाय के रूप में समाज कल्याण प्रशासन - Social Welfare Administration as a Business


व्यवसाय एक ऐसा पेशा या वृत्ति है जिसके लिए विशिष्टज्ञान, कौशलों और प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है और ये कौशल आत्म-संतुष्टि के लिए नहीं हैं बल्कि ये समाज के व्यापक हितों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं तथा इन कौशलों की सफलता को मात्र धन के संदर्भ में ही नहीं मापा जाता है। इस प्रकार सभी व्यवसाय इस अभिप्राय में वृत्तियाँ हैं कि वे आजीविका के साधन प्रस्तुत कराती हैं फिर भी सभी वृत्तियाँ व्यवसाय नहीं है क्योंकि इनमें से कुछ में व्यवसाय की विशेषताएं नहीं होती। व्यवसाय की विभिन्न विशेषताओं का उल्लेख निम्न किया गया है.





• ज्ञान का संगठित और व्यवस्थित समूह


• ज्ञान के अर्जन की औपचारिक पद्धति


• समिति / संघ के लक्ष्यों के रूप में इसके संघ व्यवसायीकरण समेत अस्तित्व


• नैतिक लक्ष्यों का निर्माण और


• सेवा का ध्येय


ज्ञान का अस्तित्व


समाज कल्याण प्रशासन ने जटिल सामाजिक समस्याओं का प्रभावी तरीके से निवारण करने की जरूरत के प्रत्युत्तर में ज्ञान का विशिष्ट समूह विकसित किया है। भारत में विद्यार्थियों को समाज कार्य के लगभग सभी पाठ्यक्रम, समाज कल्याण प्रशासन पर पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। इस प्रकार यह ज्ञान के अस्तित्व के रूप में व्यवसाय की जरूरत की आपूर्ति करता है।


ज्ञान का अर्जन (प्राप्ति)


कोई भी व्यक्ति औपचारिक प्रशिक्षण के माध्यम से ज्ञान और अपेक्षित कौशलों को प्राप्त करने के बाद किसी व्यवसाय में प्रवेश कर सकता है। उदाहरणस्वरूप, मात्र औपचारिक रूप से प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति ही विधि, इंजीनियरिंग अथवा चिकित्सामें प्रवेश कर सकते है। इस आधार पर समाज कल्याण प्रशासन भी एक व्यवसाय है क्योंकि समाज विद्यापीठ और लोक प्रशासन विद्यापीठें इस विषय में प्रशिक्षण देने का काम करते हैं। 









व्यावसायिक संघ


जो वृत्ति एक व्यवसाय होने की पेशकश करती है, उसका एक संघ होना चाहिए। व्यावसायिकों की इस प्रकार की संस्था व्यवसाय के क्रिया-कलाप को नियंत्रित और विकसित करती हैं। व्यावसायिक संघ उन व्यक्तियों के लिए नियमावली भी निर्धारित कर सकते हैं जो व्यवसाय में प्रवेश पाना चाहते हैं। परन्तु आज भी शीर्ष निकाय के लिए संघर्ष किया जा रहा है जो समाज कल्याण प्रशासन के लिए प्रबंधन और मान्यताओं को विनियमित करेगी जैसे बार काउंसिल आफ इंडिया आदि।


 नीति संहिता


प्रत्येक व्यवसाय की एक पृथक नीति संहिता होती है। संहिताएं उस समय उचित मार्गदर्शन प्रस्तुत करती हैं जब अच्छे और बुरे निर्णय के मध्य चुनाव करने की स्थिति पैदा होती है। अत समाज कल्याण प्रशासन एक व्यवसाय है और इसकी नीति संहिता समाज कार्य व्यवसाय के मूलभूत मूल्योंपर आधारित है जिसमें सभी व्यक्तियों की महत्ता, गरिमा और अनोखेपन के साथ-साथ उनके अधिकार और अवसर सम्मिलित हैं।





सेवा का लक्ष्य


हालांकि सभी व्यसय धन से संबन्धित हैं तथापि व्यावसायिकों को अपनी व्यावसायिक सेवाओं के लिए शुल्क लेते समय सामाजिक हित का खयाल रखना चाहिए। एक समाज कल्याण प्रशासक, समाज कल्याण कार्यक्रमों को क्रियान्वित करता है, न केवल धन और निजी संतुष्टि के लिए बल्कि समाज के व्यापक हित की पूर्ति के लिए अपने ज्ञान का इस्तेमाल करता है। उक्त विमर्श के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समाज कल्याण प्रशासन को अभी एक व्यवसाय का स्तर प्राप्त करना है। एक स्वतंत्र व्यवसाय बनने के लिए इसे केवल अधिकारियों का नियंत्रण होने के बजाए, सामाजिक स्वीकृति प्राप्त करने, व्यावसायिक प्रतिबद्धता, सरकारी स्वीकृति और व्यावसायिक संघ की जरूरत है ताकि व्यवसाय को नियंत्रित किया जा सके और समाज कल्याण प्रशासन के क्षेत्र में प्रशिक्षित कार्मिकों की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।