समाजशास्त्र - Sociology
समाजशास्त्र - अर्थ, परिभाषा, विषय वस्तु, प्रकृति - Sociology - Meaning, Definition, Subject Matter, Nature
समाजशास्त्र का परिचय
• समाजशास्त्र एक विज्ञान के रूप में उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध तथा बीसवीं सदी के प्रारम्भिक युग में विकसित हुआ है। इस प्रकार से भारत में भी सदियों पहले के विभिन्न ग्रन्थों में हमें तत्कालीन सामाजिक जीवन के बारे में जानने को मिलता है किन्तु औपचारिक रूप से 1947 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में एक विषय के रूप में समाजशास्त्र का अध्ययन अध्यापन शुरू किया गया।
समाजशास्त्र का अध्ययन सबसे पहले फ्रांसिसी विचारक आगस्ट कोत द्वारा अपनी प्रमुख कृति "पॉजिटिव फिलॉसफी" में 1838 ई. में किया गया। इसीलिए ऑगस्त कोत को समाजशास्त्र का जनक कहा जाता है।
शाब्दिक रूप से समाजशास्त्र दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द
सोशियल लैटिन भाषा से तथा दूसरा शब्द "लोगस" ग्रीक भाषा से लिया गया है। सोशियस' का अर्थ है।
समाज तथा 'लोगस का शास्त्र अतः समाजशास्त्र का शाब्दिक अर्थ
है- समाज का शास्त्र अथवा समाज का विज्ञान
समाज क्या है?
समाजशास्त्र (समाज शास्त्र) समाज का विज्ञान है इसीलिए समाज समाजशास्त्र की एक प्रमुख अवधारणा है हम सब लोग समाज में रहते हैं। समाज के बिना हमारा जीवन सम्भव नहीं है। इसीलिए यह भी कहा जाता है कि जहाँ जीवन है वहाँ समाज भी है। वास्तव में, व्यक्ति एक- -दूसरे के साथ सामाजिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं। इससे ही समूहों एवं समाज का निर्माण होता है।
समाजशास्त्र में व्यक्तियों के समूह या संकलन (एकत्रीकरण) मात्र को ही समाज नहीं कहा जाता है। व्यक्तियों में पाए जाने वाले पारस्परिक सम्बन्धों की व्यवस्था को ही समाज कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि समाज का निर्माण मात्र व्यक्तियों के संकलन से नहीं होता, इसके लिए उनमें पाए जाने वाले सामाजिक सम्बन्धों का होना अनिवार्य है।
समाज सामाजिक सम्बन्धों का जाल (Web) है। - मैकाइवर एवं पेज
"जब सामाजिक सम्बन्धों की एक व्यवस्था पनपती है तभी हम उसे समाज कहते हैं।" -किंग्सले डेविस
अतः समाजशास्त्र में समाज का अर्थ सामाजिक सम्बन्धों का एक सुव्यवस्थित ताना-बाना अथवा जाल है।
समाजशास्त्र की परिभाषा
गिडिंग्स, वार्ड, ओडम तथा समनर आदि विद्वान यह मानते हैं कि समाजशास्त्र सम्पूर्ण समाज को एक इकाई मानकर समग्र रूप से इसका अध्ययन करता है।
● गिडिंग्स के अनुसार, समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है।"
• मैकाइवर तथा पेज क्यूबर, वॉन विज आदि विद्वान समाजशास्त्र को सामाजिक सम्बन्धों का व्यवस्थित अध्ययन करने वाला विज्ञान मानते है।
• हेनरी जॉन्सन के अनुसार समाजशास्त्र सामाजिक समूहों का अध्ययन है जान्सन का मानना है कि समाजशास्त्र विभिन्न सामाजिक समूहों के संगठन, ढाँचे तथा इन्हें बनाने वाले और इनमें परिवर्तन लाने वाले प्रक्रियाओं तथा समूहों के पारस्पिरिक सम्बन्धों का अध्ययन है।
• मैक्स वेबर के अनुसार समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक क्रियाओं का व्याखात्मक बोध कराने का प्रयत्न करता है।"
विभिन्न विद्वानों के मतों के आधार पर कहा जा सकता है कि समाजशास्त्र
समग्र रूप से सामाजिक सम्बन्धों का अध्ययन करता है।
समाजशास्त्र की विषय वस्तु
इमाइल दुर्बीम ने समाजशास्त्र की विषय वस्तु को निम्नलिखित तीन भागों में बाँटा
• सामाजिक स्वरूपशास्त्र इसके अन्तर्गत मानव जीवन के भौगोलिक आधार; सामाजिक जीवन के प्रकार स्वरूप तथा संगठन का निर्माण करने वाले विषयों का अध्ययन किया जाता है। जैसे भौगोलिक परिस्थितियों का सामाजिक जीवन पर प्रभाव, किसी स्थान की जनसंख्या कितनी है तथा जनसंख्या घनत्व का सामाजिक जीवन पर प्रभाव आदि।
• सामाजिक शरीरशास्त्र इसके अन्तर्गत समाज रूपी शरीर
अथवा ढाँचे का निर्माण करने वाली इकाइयों का अध्ययन किया जाता है। ये इकाइयाँ समाज
का निर्माण तो करती ही है साथ ही अपने कार्यों द्वारा इसे व्यवस्थित भी बनाए रखती
है। अध्ययन की सुविधा के लिए इसे अनेक उप-भागों में बाँटा जाता है जैसे कानून का
समाजशास्त्र, धर्म का समाजशास्त्र परिवार का समाजशास्त्र
भाषा का समाजशास्त्र आदि
● सामान्य
समाजशास्त्र- इसके अन्तर्गत उन सामान्य सामाजिक नियमों का अध्ययन किया जाता है जो
सामाजिक जीवन को निरन्तरता तथा स्थिरता प्रदान करते हैं।
समाजशास्त्र की प्रकृति
समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, न कि प्राकृतिक क्योंकि इसमें सामाजिक घटनाओं, सामाजिक सम्बन्धों, सामाजिक समूहों, सामाजिक प्रक्रियाओं एवं सामाजिक समस्याओं का ही अध्ययन किया जाता है।
वास्तविक अथवा प्रत्यक्षवादी विज्ञान है न कि आदर्शात्मक
समाजशास्त्र क्या है। का अध्ययन करता है क्या होना चाहिए का नहीं यह सामाजिक
घटनाओं को अच्छा-बुरा या सही-गलत नहीं कहता है और न ही आर्दशवादी बातें करता है
बल्कि सामाजिक घटनाओं के प्रति तटस्थ रहता है। सामाजिक घटनाएँ जैसी हैं उन्हें उसी
रूप में देखता है एवं प्रस्तुत करता है।
निष्कर्ष
समाजशास्त्र एक विशुद्ध विज्ञान है. व्यवहारिक विज्ञान नहीं है-
समाजशास्त्र एक विशुद्ध विज्ञान है इसीलिए यह सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है
एवं उनका वास्तविक ज्ञान प्राप्त करके सिद्धान्त प्रस्तुत करता है।
• समाजशास्त्र एक अमूर्त विज्ञान है, मूर्त विज्ञान नहीं है समाजशास्त्र सामाजिक सम्बन्धों तथा सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है जो दिखाई नहीं देते हैं अर्थात जिनकी प्रकृति अमूर्त है। इसीलिए समाजशास्त्र को अमूर्त विज्ञान कहते है।
• आशा है कि आप समाजशास्त्र की परिभाषा प्रकति और
विषयवस्तु के बारे मे जान चुके होंगे, मे समाजशात्र एक रोचक
और उपयोगी विषय है इसकी उपयोगिता दिन पर दिन बड़ते ही जा रही है विभन्न संस्थाओं
में भी एक रोज़गारपरक विषय के रूप में भी इसकी मांग बड़ी है.
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