सांख्यिकी के चरण - stages of statistics
सांख्यिकी के चरण - stages of statistics
क्राक्सटन तथा काउडन की उपर्युक्त परिभाषा से कुल चार चरण स्पष्ट होते हैं जो सांख्यिकीय शोध के से लिए आवश्यक हैं -
1. तथ्यों का संकलन
तथ्यों का संकलन शोध की व्यावहारिकता और सैद्धांतिकता दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होता है और तथ्यों को मनमाने ढंग से एकत्रित नहीं किया जाता है। इसके लिए विभिन्न वैज्ञानिक तकनीकों और प्रविधियों की सहायता ली जाती है। निष्कर्ष पूरी तरह से तथ्यों के संकलन पर ही निर्भर करता है। यदि तथ्यों का संकलन सही प्रकार से नहीं किया गया है तो निष्कर्ष यथार्थ और विश्वसनीय नहीं प्राप्त हो सकेंगे। प्राथमिक तथ्यों (जो अध्ययन क्षेत्र से शोधकर्ता द्वारा स्वयं संकलित किए जाते हैं) के अलावा द्वितीयक तथ्यों (इनका संकलन विभिन्न पुस्तकों पत्र-पत्रिकाओं, पूर्व में किए गए शोधों आदि के आधार पर किया जाता है) के संकलन में भी पर्याप्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
2. तथ्यों का प्रस्तुतीकरण
तथ्यों के संकलन, वर्गीकरण और सारणीयन के पश्चात उनके प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता पड़ती है। विश्लेषण की सरलता हेतु प्रस्तुतीकरण आवश्यक होता है।
तथ्यों को दो विधियों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है -
• चित्रमय प्रदर्शन
• बिंदु रेखीय प्रदर्शन
3. तथ्यों का विश्लेषण
तथ्यों के विश्लेषण का मुख्य उद्देश्य तथ्यों को आसानी से समझने और तुलनात्मक अध्ययन करने के योग्य बनाना होता है। इसमें विभिन्न गणितीय विधियों का उपयोग किया जाता है। मध्य, विचरण, विषमता, सह-संबंध आदि की सहायता से तथ्यों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।
4. तथ्यों का निर्वचन
तथ्यों के विश्लेषण के बाद सांख्यिकीय शोध का अंतिम चरण तथ्यों का निर्वचन होता है। यह कार्य नितांत लचीला और महत्वपूर्ण है। शोधकर्ता को कुशल योग्य और अनुभवी होना इसकी बुनियादी शर्त है। यदि निर्वचन में सावधानी नहीं बरती गई तो प्राप्त निष्कर्ष भ्रामक, निरर्थक और दोषपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।
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