परीक्षणात्मक शोध में सम्मिलित चरण - Steps Involved in Experimental Research
परीक्षणात्मक शोध में सम्मिलित चरण - Steps Involved in Experimental Research
परीक्षणात्मक शोध में विभिन्न चरण होते हैं। यहाँ 'वास्तविक परीक्षण' की अवस्था तक पहुँचने के लिए चार चरणों के बारे में बताया जाएगा -
1) समस्या से सम्बन्धित सर्वेक्षण करना व साहित्य का संकलन करना।
2) समस्या को पहचानना और उसे परिभाषित करना।
3) परीक्षणात्मक शोध का मुख्य चरण उपकल्पनाओं का निरूपण है। ये सुझाते हैं कि कोई पूर्ववर्ती स्थिति अथवा घटना (स्वतंत्र परिवर्ती) दूसरी स्थितिघटना अथवा प्रभाव (आश्रित परिवर्ती) के घटित होने से जुड़ी होती हैं। उपकल्पना का परीक्षण करने के लिए, परीक्षणकर्ता द्वारा उस स्वतंत्र परिवर्ती के अलावा दूसरी सभी स्थितियों को नियंत्रित करने का प्रयत्न किया जाता है, जिसमें वे बदलाव चाहते है और फिर आश्रित परिवर्ती पर उसके प्रभाव को देखते है ऐसा संभवतः स्वतंत्र परिवर्ती के लिए उद्धासन के कारण होता है।
4) परीक्षणात्मक शोध का अगला चरण परीक्षण की योजना नियोजित करना है। इसका तात्पर्य उस अवधारणात्मक रूपरेखा से है जिसमें परीक्षण सम्पन्न किया जाता है।
इसमें निम्नलिखित बिन्दु शामिलहैं—
• शोध रूपरेखा को चुनना
• दी गई जनसंख्या को प्रदर्शित करने के लिए विषयों (परीक्षण के व्यक्ति) के प्रतिदर्श को चुनना, विषयों को समूहों में विभाजित करना और समूहों के लिए परीक्षण उपचारों का निर्धारण करना (विषय का तात्पर्य उस व्यक्ति अथवा सजीव प्राणी से है जिसका अध्ययन करना है ।
• परीक्षण के परिणामों के मापन के लिए उपकरणों का चुनाव अथवा सृजन करना और उनकी वैधता को निश्चित करना।
• आँकड़े संकलित करने के लिए प्रक्रियाओं को बताना और संभवत उपकरणों, रूपरेखा को ठीक करने के लिए पायलट अथवा 'ट्रायल इन' परीक्षण करना।
• सांख्यिकीय अथवा शून्य उपकल्पना को बताना।
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