तीन तुगलक वंश, मोहम्मद बिन तुगलक की नीतियां, फिरोजशाह तुगलक के सुधार एवं धार्मिक नीति

Three Tughlaq dynasties, policies of Muhammad bin Tughlaq, reforms and religious policy of Firoz Shah Tughlaq

Three Tughlaq dynasties, policies of Muhammad bin Tughlaq, reforms and religious policy of Firoz Shah Tughlaq

ख्यातिप्राप्त सेनानायक और पंजाब के तत्कालीन सूबेदार गाज़ी मलिक गियासुद्दीन तुगलक ने नासिरुद्दीन खुसरो शाह को पराजित कर सितम्बर, 1320 में दिल्ली के तख्त पर अधिकार कर लिया। तुगलक वंश में दो शासकों मुहम्मद तुगलक और फिरोज तुगलक ने इतिहास में अपनी अलग छाप छोड़ी है। मुहम्मद तुगलक जहां अपनी विवादास्पद नीतियों और चारित्रिक दुरुहता के लिए कुख्यात है वहीं दूसरी ओर फिरोज तुगलक अपने प्रशासनिक सुधारों के लिए विख्यात है।

दिल्ली सल्तनत के इतिहास में तुगलक वंश का शासन, बाकी सभी राजवंशों से अधिक, कुल 94 वर्ष तक रहा था। किन्तु इस काल में तैमूर के आक्रमण जैसी विनाशकारी घटना भी हुई थी और इस आक्रमण के बाद सुल्तान दिल्ली से पालम तक के क्षेत्र के ही शासक रह गए थे। परन्तु दिल्ली सल्तनत के विघटन की प्रक्रिया मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में बहमनी तथा विजयनगर राज्यों की स्थापना से ही प्रारम्भ हो गई थी। फिरोज़ तुगलक की सैनिक दुर्बलता और उसके उत्तराधिकारियों की अयोग्यता ने इसकी गति को और भी अधिक तेज़ कर दिया था।

 

 



तुगलक वंश में दो शासकों मुहम्मद तुगलक और फिरोज तुगलक ने इतिहास में अपनी अलग छाप छोड़ी है। मुहम्मद तुगलक जहां अपनी विवादास्पद नीतियाँ और चारित्रिक दुरुहता के लिए कुख्यात है वहीं दूसरी ओर फिरोज तुगलक अपने प्रशासनिक सुधारों के लिए विख्यात है। मुहम्मद तुगलक की अव्यावहारिक योजनाओं दोआब में कर वृद्धि, राजधानी परिवर्तन, सांकेतिक मुद्रा तथा खुरासान व कराचल अभियान ने दिल्ली सल्तनत को खोखला कर दिया। सल्तनत के विघटन की प्रक्रिया मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में बहमनी तथा विजयनगर राज्यों की स्थापना से प्रारम्भ हो गई। फिरोज तुगलक प्रशासनिक सुधार कर राज्य में शान्ति स्थापित करने एवं कृषि, उद्योग तथा व्यापार का विकास करने में सफल रहा किन्तु उसकी सैनिक दुर्बलता, अनावश्यक उदारता और धर्माधता ने उसके राज्य को इतना कमजोर बना दिया कि वह वाह्य आक्रमणकारियों से अपनी रक्षा करने में नितान्त असमर्थ हो गया। यद्यपि तैमूर के आक्रमण से तुगलक वंश का पतन अवश्यम्भावी हो गया था किन्तु तुगलक वंश के दोनों महत्वपूर्ण शासक मुहम्मद तुगलक तथा फ़िरोज़ तुगलक, तुगलक वंश के पतन के लिए एक सीमा तक उत्तरदायी कहे जा सकते हैं।