समाज कल्याण प्रशासन में सांत्वना देना अथवा मदद करना - to console or help

सांत्वना देना अथवा मदद करना - to console or help

समाज कल्याण प्रशासन में सांत्वना देना अथवा मदद करना - to console or help

कल्याण प्रशासन के क्षेत्र में कर्मचारी का व्यवहार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसे सांत्वना अथवा मदद की जरूरत पड़ती है जिससे कि सेवार्थी की समस्याओं, संकटों, दुखों और निराशाओं पर शांत प्रभाव पड़े। सेवा प्रदाता की ओर से मानव सम्बन्ध और सहानुभूति में कमी, समाज के वंचित वर्गों के कल्याण और हित के लिए बने कार्यक्रमों के प्रयोजन को हतोत्साहित कर सकते हैं। दूसरे जब स्टाफ और स्वयंसेवक एकजुट होकर कर कार्य करते हैं तब यह संभावना प्रतीत होती है कि संस्थाअपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगी तथा सेवार्थियों और सेवा प्रदाताओं को एक अच्छा अनुभव प्राप्त होगा, लगन और विश्वास के साथ एकजुट होकर कार्य करने से प्रयत्न सार्थक होंगे। बड़े आकार वाले संगठनों के लिए नौकरशाही की विशेषताएं जरूरी हो सकती हैं परन्तु यह महत्वपूर्ण है कि लचीलापन न होना, नियमों और प्रक्रियाओं में लालफीताशाही आदि पर अधिक जोर देने से बचा जाए जिससे कि सेवा वितरण में मानवीय दृष्टिकोण और देखरेख करने वाला दृष्टिकोण बनाए रखा जा सके। स्टाफ का मनोबल और अभिप्रेरण बनाए रखना, नियमित प्रशिक्षण, कैरियर विकास के लिए अवसर की समानता, लोकतांत्रिक निर्णयन प्रक्रियाएं और अंतससंगठनात्मक संप्रेषण, सकारात्मक कार्य संस्कृति प्राप्ति के लिए जरूरी हैं। अगला महत्वपूर्ण कार्य संगठन के भीतर समन्य होता है। किसी संगठन के कार्य वातावरण का आकलन उस सम्बन्ध और समन्वय से किया जा सकता है जो एजेंसी के अनेक विभागों के मध्य स्टाफ सदस्यों के बीच और स्टाफ तथा प्रबंध के मध्यउपलब्ध होता है। अन्य पक्षसहभागी निर्णयन है। इसी प्रकार सभी कर्मचारियों के पास निर्णयन में योगदान करने के लिए समान अवसर मिलना चाहिए जिससे प्रतिबद्धता की पर्याप्त भावना और ज़िम्मेदारी की संयुक्त भावना उत्पन्न हो, इससे सृजनात्मकता का अनुकूल वातावरण भी उत्पन्न होता है।









संगठनात्मक परिवेश सुधारने के लिए श्रेष्ठ प्रबंधन व्यवहार बहुत जरूरी हैं। कुछ महत्वपूर्ण प्रबंधन व्यवहारों में, सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति संवृद्धि के अवसरों का पता लगाना और समस्याओं का निवारण, संघर्ष से निपटना संसाधनों का समान बंटवारा प्राथमिकताएं निर्धारित करना, कार्य आबंटित करना, सामाजिक निदान, भविष्य के लिए अनुमान और विकल्पों की व्यवस्था और चयन तथा कार्य विभाजन की व्यवस्था और विभाजन शामिल हैं। इसके अलावा, तथ्यों पर आधारित वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सेवाओं की नवीनता और संशोधन परिणामों का मूल्यांकन और सुधार करना, सार्वजनिक निधि का किफायती और बुद्धिमत्तापूर्वक इस्तेमाल सुनिश्चित करना तथा लाभार्थियों के जीवन स्तर में सुधार करना भी सम्मिलित है। समाज कार्य की पद्धतियों, विधियों और कौशलों का इस्तेमाल, संगठन की प्रभावकारिता को सुधारने के लिए प्रबंधन व्यवहार के हर स्तर पर अत्यंत आवश्यक है। प्रभावी प्रबंधकों के दस कौशलों का बार-बार सर्वाधिकविवरण दिया जाता है, वे हैं-मौखिक संप्रेषण, समय और तनाव का प्रबंधन करना, समस्याओं की पहचान करना परिभाषित करना और उनका समाधान करना, अभिप्रेरण करना और दूसरों को प्रभावित करना प्रत्यायोजन करना, लक्ष्य निर्धारित करना और दृष्टि स्पष्ट करना, स्वजागरूकता, टीम निर्माण और संघर्ष नियंत्रण करना।






संगठनात्मक परिवेश के कुछ पक्ष व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण, बेहतर कार्य निष्पादन, पुरस्कार, टीम भावना ईमानदारी, व्यक्तिगत मतभेदों पर खुलापन, विकास प्रेरित करना, नए विचारों और पद्धतियों का इस्तेमाल, जोखिम उठाना और व्यक्तिगत व्यवहार को नियंत्रित करने की स्वायत्ता हैं। प्रबंधकीय मूल्यों में, स्वायत्ता, समानता, सुरक्षा और अवसर शामिल हैं। अधिकार, सेवाओं के प्रभावी तथा दक्ष आबंटन का निर्धारण बहुत सीमा तक ऊच अभिप्रेरण, स्टाफ की प्रतिबद्धता और संगठनात्मक लक्ष्यों के साथ उनकी पहचान से किया जाता है। प्रबंधकों को संगठन के स्टाफ के मध्य सामूहिक भावनाओं और सहयोग को विकसित करना चाहिए। परिवेश को संगठन की पूर्ण प्रगति, सतत मानव सम्बन्धों और स्टाफ विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा, प्रभावी पर्यवेक्षण भी जरूरी होता है। कर्मियों को अपनी कार्य स्थितियों में चुनौतियाँ स्वीकार करने, दूसरों की सेवा करने धन कमाने, प्रतिष्ठा और परिस्थिति का इस्तेमाल करने के लिए अवसर की जरूरत पड़ती है और वे इस प्रकार सृजनात्मक और स्वायत्त हो सकते हैं। पहल करने का व्यवहार, कार्यकलाप और इस्तेमालों का उच्च स्तर उत्पन्न करता है। नियोक्ता और कर्मचारी के सुखद और शांतिपूर्ण सम्बन्ध बेहतर लाभार्थ सम्बन्ध प्रदान कर सकते हैं जो सफल संगठनात्मक परिवेश के लिए बहुत जरूरी हैं।