साक्षात्कार के प्रकार - Types of Interview

साक्षात्कार के प्रकार - Types of Interview

साक्षात्कार के प्रकार - Types of Interview


सामाजिक शोध में वैसे तो कई प्रकार की साक्षात्कार विधियों का प्रयोग किया जाता है परंतु अध्ययन की सुविधा के लिए उन्हें निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है।


1) संरचित या नियंत्रित साक्षात्कार 


साक्षात्कार के इस प्रकार में समस्या से संबंधित विषय पर पहले ही प्रश्नों का निर्माण कर लिया जाता है। तथा उसी क्रम में उत्तरदाता से प्रश्न पूछ कर उन्हीं के शब्दों में उत्तर भी संग्रहीत किए जाते हैं। इसमें अनुसूची का प्रयोग किया जाता है। प्रश्न तैयार करते समय यह ध्यान रखा जाता है कि वे विषय से संबंधित हों, उनमें क्रमबद्धता हो और साथ ही साथ वे सरल व समझने योग्य हों।


2) असंरचित या अनियंत्रित साक्षात्कार 


असंरचित साक्षात्कार में प्रश्न पूर्व रचित नहीं होते हैं बल्कि साक्षात्कारकर्ता उत्तरदाता के सामने बैठकर समस्या के संबंध में प्रश्न पूछता है और उत्तरदाता स्वतंत्र रूप से उनके जवाब देता है। इस प्रकार के साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता साक्षात्कार निर्देशिका का प्रयोग करता है जिसमें विषय से संबंधित मूल बिन्दुओं को पहले ही अंकित किया गया होता है और साक्षात्कारकर्ता उसी के अनुरूप प्रश्न पूछता है। इसका उपयोग ज्यादातर मनोवैज्ञानिक अध्ययन में किया जाता है। 










3) केन्द्रित साक्षात्कार


इस विधि का उपयोग जनसंचार के साधनों, जैसे- सिनेमा, रेडियो, पत्र-पत्रिका के किसी विशिष्ट भाग के प्रभाव को जानने के लिए किया जाता है और इसमें उन्हीं लोगों को उत्तरदाता के रूप में शामिल किया जाता है जो उससे संबंधित हों। इसमें आवश्यकतानुसार साक्षात्कार प्रदर्शिका का प्रयोग कर भी सकता है और नहीं भी।


4) सामूहिक साक्षात्कार


साक्षात्कार के इस प्रकार में एक साक्षात्कारकर्ता अनेक व्यक्तियों का एक ही स्थान पर एक ही समय में साक्षात्कार करता है। वह साक्षात्कार अनुसूची के आधार पर सभी व्यक्तियों से सूचनाएँ प्राप्त करता है। इस विधि का प्रयोग प्रायः तब किया जाता है जब साक्षात्कारकर्ता के पास धन व समय का अभाव होता है।


5) पुनरावृत्त साक्षात्कार


इस विधि द्वारा विभिन्न स्थितियों में उत्तरदाताओं की प्रतिक्रियाओं का अध्यन किया जाता है। किसी भी व्यक्ति की समान घटनाओं के प्रति अलगअलग परिस्थिति में धारणाएँ अलग-अलग होती हैं। इन बदलती हुई परिस्थितियों में लोगों की धारणाओं का अध्ययन करने के लिए ही इस विधि का प्रयोग किया जाता है।