आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन हेतु स्रोत सामग्री की खोज - Discovery of source material for modern Indian historiography

आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन हेतु स्रोत सामग्री की खोज - Discovery of source material for modern Indian historiography

आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन हेतु स्रोत सामग्री की खोज - Discovery of source material for modern Indian historiography

आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन के लिए स्रोत सामग्री की खोज हेतु इतिहासकार को प्रमुखतः अभिलेखागार एवं समकालीन समाचार पत्र संग्रहालयों की मदद लेनी होता है। आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोतों का स्वरूप प्राचीन एवं मध्य युगीन भारतीय इतिहास के स्रोतों से भिन्न है। पुरातात्विक सोतो एवं दरबारी इतिहासकारों के इतिहास के स्थान पर आधुनिक भारतीय इतिहास के निर्माण में अभिलेखागारीय स्रोतों का महत्व बढ़ जाता है। अभिलेखागारीय दस्तावेज आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन के प्रमुख स्रोत हैं। राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय अभिलेखागारों में विभिन्न दस्तावेजों की कई फाइलें मिलती हैं। इन दस्तावेजों में ब्रिटिश अधिकारियों के पत्र, निजी पत्र, तत्युगीन समाचार पत्र सरकारी फाइलें इत्यादि प्राप्त होती हैं।





आधुनिक भारत में कई पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन आरंभ हो चुका था, इन पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न लोगों के लेख एवं शोध पत्र रहते हैं। ये पत्र पत्रिकाएँ भी आधुनिक भारतीय इतिहास के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। आज ऐसे कई वृद्ध जीवित हैं, जिन्होंने या तो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया या फिर वे भारत छोड़ो आंदोलन के प्रत्यक्षदर्शी हैं। इन्हें खोज कर इतिहासकार इनसे मौखिक साक्षात्कार कर महत्वपूर्ण स्रोत सामग्री जुटा सकता है।


निजीपत्र एवं डायरियाँ भी आधुनिक भारतीय इतिहास के निर्माण का महत्वपूर्ण स्रोत है। आज कुछ विशिष्ट व्यक्तियों, उदाहरणार्थ महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू इत्यादि के निजीपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। जिन लोगों के पत्र एवं डायरियाँ प्रकाशित नहीं है, इतिहासकार को चाहिए कि उन्हें स्वयं खोजे एवं उनसे महत्वपूर्ण स्रोत सामग्री एकत्रित करे। राष्ट्रीय अभिलेखागार दिल्ली में अंग्रेजी भाषा के निम्नलिखित व्यक्तिगत पत्रों का संग्रह सुरक्षित है।


1. मैक्कानी पेपर्स (1776-1798 ई.) 


2. खापढे पेपर्स (1878-1938 ई)


3. गोखले पेपर्स (1889-1915 ई.)


4. गांधी पेपर्स


5. जयकर पेपर्स (1905-1955 ई.)







1857 की क्रांति के दौरान बुंदेलखंड के विभिन्न क्रांतिकारियों ने तात्या टोपे को जो पत्र लिखा उनका संग्रह परशुराम शुक्त विरही' द्वारा 1857 की क्रांति के पत्र के नाम से नगरपालिका शिवपुरी म.प्र. के सौजन्य से तात्या टोपे समिति शिवपुरी द्वारा प्रकाशित कराया गया।


"बुंदेलखंड की पूर्व रियायतों के पत्र पांडुलिपियों का सर्वेक्षण शीर्षक से तत्युगीन पत्र एवं पांडुलिपियों का प्रकाशन डा कामिनी, डॉ. श्यामबिहारी श्रीवास्तव, डॉ. श्यामसुंदर सोनकिया एवं डॉ. सीता किशोर आदि ने 1994 में अनुराधा ब्रदर्स कानपुर से प्रकाशित कराया। आधुनिक भारतीय इतिहास के स्रोतों के लिए नई दिल्ली स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय व ग्रंथालय (नेहरू मेमोरियल म्यूजियम लायब्रेरी) भी अत्यंत उपयोगी है। यह व्यक्तिगत पत्रों व गैर सरकारी दस्तावेजों का सबसे बड़ा संग्रहालय है। यहाँ का पांडुलिपि विभाग भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पत्रों का संग्रह है। इनमें जवाहरलाल नेहरू मोतीलाल नेहरू, गांधी जी जयप्रकाश नारायण, बी आर अंबेडकर, मदन मोहन मालवीय, टी.टी. कृष्णमाचारी, एम. एन. शाह एवं तेज बहाव स्पू आदि के पत्रों का संग्रह प्रमुख है। इसी प्रकार के संग्रहालय विभिन्न राज्यों में भी स्थित है। भोपाल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ पुराने विभिन्न समाचार पत्रों का संग्रह उपलब्ध है।






निष्कर्षतः आधुनिक भारतीय इतिहास लेखन के स्रोतों की खोज हेतु इतिहासकार को राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली, विभिन्न राज्यों के राज्य अभिलेखागार, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एवं लायब्रेरी नई दिल्ली, माधवराव सप्रे समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल सहित देश विदेश के विभिन्न पुस्तकालयों की यात्रा अत्यंत आवश्यक है।