समाज कार्य अनुशासन के रूप में - Social work as a discipline
समाज कार्य अनुशासन के रूप में - Social work as a discipline
कई विद्वानों द्वारा दिए गए विचारों और व्याख्यानों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समाज कार्य का अभ्युदय ऐच्छिक और दान-धर्म पर आधारित कार्यों से हुआ है। यह अभ्यास ही कालांतर में एक व्यवसाय के रूप में स्थापित हो जाता है। अन्य विषयों की भाँति समाज कार्य का एक व्यवसाय के रूप में विकास एक अकादमिक अनुशासन के रूप में ही हुआ है। समाज कार्य, एक व्यवसाय के रूप में ज्ञान के आधार को मजबूत बनाता है और साथ ही लोगों को व्यावसायिक समाज कार्यकर्ता बनने में प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि समाज कार्य अभ्यास से एक अकादमिक अनुशासन के रूप में समाज कार्य के विकास के लिए मार्ग प्रशस्त होता है। अपनी प्रारंभिक अवस्था के बाद से, वहाँ कई विचार विमर्श और जिस उद्देश्य के लिए सामाजिक कार्य के लिए मानव शक्ति गाड़ियों के बारे में बहस कर दिया गया है। इसलिए सामाजिक कार्य अभ्यास की प्रकृति और सैद्धांतिक इसके लिए आवश्यक सूचनाओं पर विचार विमर्श तार्किक किया गया है।
अन्य सामाजिक विज्ञानों की तुलना में समाज कार्य अत्यंत नवीन अनुशासन है। समाज परिवर्तित हो रहा है और इस परिवर्तन के फलस्वरूप कई समस्याएँ भी उत्पन्न हो रही हैं। इन समस्याओं के निराकरण और समाज को व्यवस्थित बनाए रखने के प्रयोजन से समाज कार्य की आवश्यकता महसूस की गई। जैसा कि इस इकाई में पहले भी बताया जा चुका है कि समाज कार्य पहले इच्छा आधारित कार्य था परंतु बाद में इसे एक व्यवसाय के रूप में विकसित किया गया। यह अनुशासन एक व्यवसाय के रूप में सामाजिक संबंधों में होने वाले परिवर्तन व्यक्तियों के व्यक्तित्व में होने वाले परिवर्तन समाज की संरचनात्मक व्यवस्था में होने वाले परिवर्तन आदि बदलाव से होने वाले सामाजिक असंतुलन और समस्याओं के समाधान हेतु तत्पर रहता है।
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