अनुशासन क्या है? - What is discipline?

अनुशासन क्या है? - What is discipline?

यहाँ अनुशासन का तात्पर्य व्यावहारिक तौर पर प्रयोग किए जाने वाले अर्थ से अलग है। सामान्यतः हम अनुशासन को जीवन जीने की बेहतर विधि के रूप में नियोजित करने वाले प्रारूप के संदर्भ में व्याख्यायित करते हैं। परंतु यहाँ अनुशासन का अभिप्राय विभागीय सीमा क्षेत्र से है, जो ज्ञान को अपने अपने तरीके से प्रस्तुत करता है। सामाजिक विज्ञानों में सभी अनुशासनों (जैसे- दर्शनशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, मनोविज्ञान, समाज कार्य आदि) की पृथक प्रविधि और मापक होते हैं, जो यथार्थ को भिन्न-भिन्न परिदृश्य में देखने की कवायद करते हैं। प्रत्येक अनुशासन स्वयं में तार्किक व वैज्ञानिक प्रकृति के होते हैं। सभी अनुशासन के परिप्रेक्ष्य प्रविधि तथ्यों के विश्लेषण प्रस्तुतीकरण मापक आदि पृथक प्रकार के होते हैं।







सामान्य शब्दों में अनुशासन को संबंधित विषयक्षेत्र में यथार्थ को तलाशने और व्याख्या करने वाले उपकरण रूप में अभिव्यक्त किया जा सकता है। कालांतर में अनुशासन विशिष्ट से संबंधित विद्वानों द्वारा सिद्धांतों को निर्मित किया गया, जिसके आधार पर उनके अध्ययन और उनकी तलाश निर्देशित और नियंत्रित की जा सके। ये सिद्धांत यथार्थ को तलाशने के संदर्भ में संबंधित अनुशासन के प्रति मित्रवत प्रवृत्ति के थे। फलतः इन सिद्धांतों ने अनुशासन विशेष को ही अपनी परिधि और सीमा बना लिया तथा उसके अधीन ही यथार्थ की शिनाख्त करना आरंभ कर दिया। निश्चित तौर पर एक अनुशासन दूसरे से सैद्धांतिक मान्यताओं व प्रविधियों की भिन्नता के कारण अलग होता यदि सामान्य शब्दों में कहा जाए, तो अनुशासन वह विषय अथवा अंतर्दृष्टि है जो संबंधित विषयक्षेत्र में स्वयं का प्रभुत्व रखता है। और उससे संबंधित विभिन्न मानकों व प्रतिमानों में श्रेष्ठ होता है। इसके अलावा संबंधित विषयक्षेत्र के अध्ययन हेतु विशिष्ट ज्ञान-मीमांसीय प्रविधि का प्रयोग करता है और साथ ही ज्ञान की परिधि के अनुरूप वह स्वयं को विषय क्षेत्र में बांधकर रखता है। अनुशासन विशेष विभिन्न सिद्धांत तथ्य अवधारणाओं, परिभाषा, अर्थ, विशेषताओं, प्रकार, सूचनाओं तकनीक, प्रविधि, उपागम आदि से संबंधित पृथक दृष्टिकोण विकसित करता है।







अकादमिक तौर पर अनुशासन को परिभाषित करना बहुत कठिन कार्य माना जाता है इसलिए अनुशासन को समझने के लिए हमें उसकी विशेषताओं को समझना होगा जो उसकी कसौटिया भी मानी जाती है। इसी के आधार पर किसी विषय को अनुशासन का दर्जा मिलता है।