प्रवासन के आयाम - Dimensions of Migration
प्रवासन के आयाम - Dimensions of Migration
प्रवासन के निम्न पाँच पक्ष होते हैं और इन्हीं के आलोक में प्रवासन पर विमर्श किया जाता है
1. देश पक्ष- इस पक्ष में इस बात पर ध्यान आकृष्ट किया जाता है कि किस क्षेत्र अथवा में
प्रदेश से जनसंख्या किस क्षेत्र अथवा प्रदेश के लिए गमन कर रही हैं.
I. अंतरमहाद्वीपीय प्रवासन - इसमें प्रवासन एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप को होता है। 16वीं शताब्दी से 20वीं शताब्दी तक यूरोपीय आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड दक्षिण अफ्रीका आदि महाद्वीपों में जाकर बसने लगे। वर्तमान समय में भारत तथा अन्य विकासशील देश बेहतर रोजगार व उच्च जीवन गुणवत्ता कि आशा से विकसित देशों को प्रवासन करते हैं।
ii. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन- एक ही महाद्वीप के दो देशों के मध्य जनसंख्या के स्थानांतरण को इस प्रवासन के अंतर्गत रखा जाता है। भारत के विभाजन के दौरान लाखों कि संख्या में हिंदू मुस्लिम, सिक्ख स्थानांतरित हुए थे।
iii. अंतरप्रांतीय प्रवासन - इस प्रवासन में एक राज्य से दूसरे राज्य की ओर लोग स्थानांतरित होते हैं। 60 के दशक में हरित क्रांति के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से बहुत से श्रमिक पंजाब की ओर प्रवासित हुए थे।
iv. स्थानीय प्रवासन- यह प्रवासन एक ही प्रांत के दो स्थानों के मध्य होता है। इसमें प्रमुखतः चार धाराएँ पाई जाती हैं.
ग्राम से नगर की ओर
ग्राम से ग्राम की ओर
नगर से ग्राम की ओरांति
नगर से नगर की ओर
2. काल पक्ष इस पक्ष के तहत समय के सापेक्ष प्रवासन का अध्ययन किया जाता है-
1. दीर्घकालीन प्रवासन- जब प्रवासन एक लंबे काल के लिए होता है। 17वीं, व 19वीं शताब्दियों में स्पेन व पुर्तगाल से दक्षिण अमेरिका और ब्रिटेन, जर्मनी व 18वीं फ्रांस से उत्तरी अमेरिका के लिए इस प्रकार के कई प्रवासन हुए हैं।
ii. सामयिक / मौसमी प्रवासन- यह प्रवासन किसी निश्चित समय अथवा ऋतु से संबंधित होता है। वर्तमान समय में उत्तरी भारत में गन्ने की फसल के तैयार होते ही मजदूरी हेतु चीनी मीलों की ओर स्थानांतरण किया जाता है।
iii. दैनिक प्रवासन इसमें लोग प्रतिदिन जीविकोपार्जन के लिए प्रवासन करते हैं।
3. कारण पक्ष प्रवासन के कारण हो सकते हैं
1. भौतिक प्रवासन भौतिक कारणों से प्रवासन बड़े पैमानों पर हुआ है। हिमयुग में हुआ प्रवासन, ऐतिहासिक काल में मध्य एशिया की जलवायु के शुष्क हो जाने से हुए प्रवासन, वर्तमान समय में राजस्थान व गुजरात में सूखे के कारण होने वाले अल्पकालीन प्रवासन, गंगा बेसिन के किनारे बसे लोगों का प्रवासन आदि इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
II. आर्थिक प्रवासन आर्थिक दशा के कारण होने वाले प्रवासन को इस श्रेणी के
अंतर्गत रखा जाता है। प्रमुख आर्थिक कारण निम्न हैं।
जनसंख्या के घनत्व में वृद्धि और जीवन निर्वाह के साधनों में कमी
दूसरे प्रदेशों में नवीन कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता
अपेक्षाकृत अधिक उपजाऊ भूमि का आकर्षण
सिंचाई की उपयुक्त व्यवस्था उद्योगीकरण विकास
खनिज संपदा की प्राप्ति
• यातायात और व्यापार की सुविधा
iii. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रवासन भारतीय समाजों में रीति-रिवाज और परंपराओं के कारण भी प्रवासन होते हैं। विवाह के पश्चात महिला का पुरुष के घर जाकर रहना इसी प्रकार का प्रवासन है। धार्मिक कारणों से भी प्रवासन होते हैं यथा- 10वीं शताब्दी में इस्लाम धर्म के प्रचारकों का ईरान की ओर बढ़ने से पारसी परिवारों का गुजरात व महाराष्ट्र की ओर किया गया प्रवासन।
iv. राजनीतिक प्रवासन राजनीतिक कारणों से जनसंख्या का स्थानांतरण प्रमुख रूप से निम्न क्रियाओं के फलस्वरूप होता है
● आक्रमण
● विजय
• उपनिवेश
• बलात् अथवा बाध्य प्रवासन
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