समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षा - Distance Learning in Social Work

समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षा - Distance Learning in Social Work

समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षा - Distance Learning in Social Work

सामान्य दूरवती शिक्षा के समान ही समाज कार्य में भी दूरवर्ती शिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रविधि में प्रोन्नयन के कारण समाज कार्य में दूरवर्ती शिक्षण विकसित हु। विल्सन ने समाज कार्य में दूखत शिक्षा के विकास की तीन विभिन्न अवस्थाओं पर प्रतिवेदन लिखा है तथा इसको स्पष्ट किया है। पहली अवस्था में उन्होंने परिसर विहिन कार्यक्रम का उल्लेख किया है जिसके तहत समाज कार्य की कक्षाएं दूर पष्ठ स्थल या शिक्षकों द्वारा एक विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर से निकल कर या स्थानीय समीपस्थ अनुदेशकों द्वारा पदई जाती थीं। दूसरी अवस्था में प्रविधि एवं तकनीक पर ज्यादा जोर दिया गया जैसे 'इण्टरेक्टिव टेलीविजन (आई. टी. वी.), वितरक शिक्षण' आदि।






तीसरी अवस्था वह है जिसमें आज वर्तमान में हम रह रहे हैं। जिसमें कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रसिद्ध पा रहा है। इनमें से प्रत्येक अवस्था जब समाज कार्य शिक्षा की गुणवत्ता हेतु आगमित होती है उससे कुछ नयापन या नवीकरण तथा सावधानी की अपेक्षा की जाती है। सैद्धांतिक रूप से वितरित शिक्षण विद्यार्थी तथा शिक्षक की स्थिति (एक दूरी सेन कि आमने-सामने) तथा अभियांत्रिकी की मौजूदगी जैसे सेटेलाइट ट्रांसमिशन, दूरदर्शन या कंप्रेस्ड वीडियो द्वारा परिभाषित की जाती है।





कंम्प्यूटर से संचालित शिक्षण कक्षा के अंदर या बाहर कम्प्यूटरआधारित प्रविधि का रूप ले सकता है यह समकालीन हो भी सकती है और नहीं भी पाठ्यक्रम का एक भाग पूरी कक्षा या समस्त पाठ्यक्रम कम्प्यूटर के माध्यम से व्याख्यायित किया जाता है। समाज कार्य शिक्षण पर साहित्य संकेत करते हैं कि वितरित तथा कंप्यूटर से संचालित समाज कार्यशिक्षण के समर्थक तथा आलोचक भी हैं। समाज कार्य शिक्षण से संबंधित अध्ययनों में पाया गया है कि विद्यार्थियों द्वारा आमनेसामने कक्षा शिक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। इन अध्ययनों में कहा गया है कि विद्यार्थियों को प्रविधि ज्ञानार्जन वातावरण, पुस्तकालयी लाभ तथा अन्य विद्यार्थी सेवाएँ या कक्षागत अंतक्रियाओं के साथ समस्या थी। कुछ लोगों का तर्क है कि एक दूसरे के साथ अंतः क्रिया समाज कार्य का मूल्य है और व्यावसायिक सामाजीकरण तथा भूमिका निर्वहन की स्थापना व्यक्ति निहित होनी चाहिए। प्रभावकारी दूरवर्ती शिक्षण मेंकुछ चीजे बाधक भी रही हैं जैसे कार्यक्रम को विकसत करने का खर्च प्रविधिक समोन्नयन एवं पाठ्यक्रम निर्माण हेतु समय का अभाव आदि।







समाजकार्य में आई.टी.वी. तथा ऑनलाइन कक्षाओं के समर्थक है जो विद्यार्थियों की भौगोलिक परिस्थितियों या कार्य तथा परिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई को नहीं कर पाते हैं की शिक्षा पर बल देते हैं। ग्रामीण या भौगोलिक रूप से अलग समुदायों के लिए दूरवर्ती शिक्षण एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।






वैसे छात्र जो अपने स्वयं समुदाय की कक्षाओं में उपस्थित होते हैं उनकी यह कोशिश हो सकती है कि वे अपने समुदाय में बने रहें तथा उसमें योगदान करे तथा उसी समय व्यावसायिक रूप से प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की आवश्यकता को पूरा करे। स्टॉस तथा फ्रेडोलिनो (2000) ने पाया कि दूर समाज कार्य कक्षा में अंतः क्रिया हेतु बड़े अवसरों का परिणामथा पाठ्यक्रम में वृहत्तर संलिप्पता तथा छात्रों द्वारा अधिक सकारात्मक अनुभवों की अभिव्यक्ति जब उनकी तुलना उनसे की गयी जिन्होंने समोन्नत अतः क्रियात्मक विकल्पों के बिना वही कक्षाएँ ली थी। दूरवती शिक्षा की पढ़ाई छात्रों के बीच सहयोग और परस्परावलंबन ला सकती है। इस प्रकार यह पारस्परिक सहायता को बढ़ा सकती है। समाज कार्य काफी लंबे अंतराल से मूल्यों जैसे वैयक्तिकता एवं अनन्यता हेतु आदर पर आधारित रहा है। छात्र केन्द्रित पढ़ाई एक दूरी पर स्थान प्राप्त कर संचालित किया जा सकता है क्योंकि छात्र कब और कहां पढ़े इसकी जिम्मेदारी लेते हैं। प्रविधि किसी व्यक्ति की स्वयं की पढ़ने की शैली को समुन्नत कर सकती है इसलिए यह आजीवन पठन को प्रोत्साहित करती है।