अमेरिका में समाज कार्य शिक्षा का इतिहास - History of Social Work Education in America

अमेरिका में समाज कार्य शिक्षा का इतिहास - History of Social Work Education in America

अमेरिका में समाज कार्य शिक्षा का इतिहास - History of Social Work Education in America

18वीं शताब्दी के अंतिम समय में संयुक्त राज्य अमेरिका में तीन धाराओं या प्रवृत्तियों ने समाज कार्य शिक्षा के विकास को प्रभावित किया। पहली धारा संगठन या संख्या के आरंभ से जुड़ी थी जैसे, The Association for improving the condition of the poor (1871)। इन संस्थाओं में कार्य कर रहे लोग स्वयं सेवक तथा उनमें अधिकतर महिलाएं थीं। ये लोग आवश्यकताग्रस्त या जरूरतमंद लोगों की सहायता सीधे करते थे। इन संगठनों में कार्य कर रहे तथाकथित स्वयंस्खे सर्वदा प्रभावकारी तरीके से कार्य नहीं कर पाते थे। कुछ तो स्वेच्छानुसार अपने मन से कार्य करते थे। कुछ स्वयंसेवकों के पास विभिन्न सांस्कृतिक पहलु ओके बारे में समझ एवं जानकारी हीनहीं थी। समस्याग्रस्त व्यक्ति किस प्रकार की सेवा को स्वीकार करेंगे सहायता के साधनों को प्राप्त करने में कुछ तत्वों जैसे नस्ल, जाति, सामाजिक इत्यादि की भूमिका क्या होगी? उस समय सामाजिक वेदना के मूल कारण के रूप में व्यक्तिगत तथा सामाजिक सांस्कृतिक तत्वों के एक-दूसरे पर जटिल क्रिया प्रतिक्रिया पर अधिक से अधिक विश्वास किया जाता था। 







लोक कल्याणकारी संगठन या संस्था चाहते थे कि उनके स्वयं सेवक तथा वैतनिक दोनों प्रकार के कार्यकर्ताओं को इन संचालक शक्तियों की समझ हो तथा ये वैज्ञानिक सिद्धांतों पर अधिक भरोसा करे। द्वितीय धारा यह थी कि सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु समाज वैज्ञानिकों के शिक्षा संधीत सिद्धांतों पर ध्यान केन्द्रित किया जाए। यहां सवाल यह उठता है कि क्या संबंधित सिद्धांतों से व्यक्तियों की समस्या के उत्पन्न होने के कारण समाप्त हो जाएंगे? या सामाजिक आर्थिक दशाएं शैक्षणिक सोच तक पहुंच पाएंगी कुछ कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में नैतिक व सामाजिक विषय एवं व्यावहारिक लोक कल्याणकारी कार्य विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए कुछ विश्वविद्यालयों में (यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिगन), इस प्रकार के पाठ्यक्रम समाजशास्त्र या अर्थशास्त्र की कक्षा के रूप में प्रारंभ किए गए। इन कक्षाओं के माध्यम से संगठनात्मक एवं सामुदायिक स्तर पर आम लोगों का ध्यान संबंधित पाठ्यक्रम शुरू किए गए। ये पाठ्यक्रम सामाजिक नीति से भी 105/192 ये विदुषी महिला ने 1917 में समाज कार्य की एक महत्वपूर्ण पुस्तक Social nagnosis लिख भी लोक कल्याणकारी संगठनों में शामिल थी।







मेरी रिचमण्ड ने व्यावहारिक लोक कल्याणकारी प्रशिक्षण स्कूल को स्थापित करने की मांग की। जिसके परिणामस्वरूप न्यूयार्क चैरिटी आर्गेनाइजेशन सम्प्साइटी ने एक छह साप्ताहिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया। इस तरह अन्य कार्यक्रम भी अमेरिका के महत्वपूर्ण शहरों में आरंभ किए गए। न्यूयार्क चैरिटी आर्गेनाइजेशन सोसाइटी ने शीघ्र ही एक वर्षीय शैक्षिक कार्यक्रम का विकास किया तथा इसका नाम न्यूयार्क स्कूल ऑफ फिलोद्रोपी रखा गया। आगे चलकर इसका नाम न्यूयार्क स्कूल ऑफ सोशल वर्क हो गया तथा 1962 में इसे कोलम्बिया यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ सोशल वर्क के नाम से जाना जाता है। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में बहुत सारे समाज कार्य से संबंधित प्रशिक्षण स्कूल शिकागो बोस्टन, सॅटलुईस तथा फिलाडेल्फिया शहर में शुरू किए गए तथा ये विश्वविद्यालयों से मान्यता प्राप्त करने की कोशिश करते रहे। प्रत्येक शहर में वैयक्तिक कार्य का निपटारा करने वाली एजेंसियों ने इन पाठ्यक्रमों को बहुत प्रभावित किया जो विभिन्न स्कूलों में पढ़ाए जा रहे थे। अर्थात इन पाठ्यक्रमों ने इन संस्थाओं एजेंसियों से काफ़ी कुछ ग्रहण किया। इसके अतिरिक्त समाज विज्ञान, अर्थशास्त्र तथा मनोविज्ञान के क्षेत्र व मानव विकास ने भी पाठ्यक्रम को प्रभावित किया।







तीसरी धारा या प्रवृत्ति ने स्थापित हुए नियमों को प्रभावित किया। विश्वविद्यालयी समाजकार्य शिक्षा ने महिलाओं के कॉलेजों का काफी विकास किया। विक्टोरियन मॉडल सिद्धांत के तहत महिलाओं ने घरों से बाहर कार्य नहीं किया था। लेकिन 1890 के बाद इस धारणा में अधिक परिवर्तन आया प्रगतिशील विचारधारा द्वारा यह माना जाने लगा कि महिलाएं भी विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं का निर्वहन कर सकती है। यह तब प्रारंभ हुआ जब महिलाओं ने 890 के अंतिम समय में परोपकारी दान संस्थाओं तथा बाल कल्याण संगठनों हेतु कार्य आरंभ कर दिया।


सेटलमेंट हाउसेज अथवा आम आदमी से जुड़े समाजसेवी संगठनों ने उन अधिकांश महिलाओं को चैतनिक कर्मचारी के रूप में नियुक्त किया जो अधिक शिक्षा प्राप्त करने को इच्छुक थी तथा ये महिलाएँ ऐसे लोगों के सशक्तिकरण के लिए आवाज उठाना चाहती थी जो लोग शोषितों, वंचितों तथा गरीबों की स्थिति में सुधार लाने के लिए दमनकारी एवं शोषणकारी शक्तियों के विरुद्ध आवाज उठा रहे थे। खासतौर से ये महिलाएं उन नीतियों एवं नियमों का पुरजोर समर्थन करना चाहती थी जो दमनकारी एवं शोषणकारी दशाओं को समाप्त करने में सहायक हो सकती थी।


ऐसा पहला स्कूल जिसने उपरोक्त पाठ्यक्रम को आरंभ किया विकसित होकर वर्तमान में समाज कार्य शिक्षा के नाम से प्रचलित हुआ। उस समय वह प्रशिक्षण स्कूल के नाम से जाना जाता था। प्रथम पीढ़ी के स्कूल 1 वर्ष 1898 और 1929 के बीच स्थापित हुए। 1919 ई. में अमेरिका में एसोसिएशन ऑफट्रेनिंग स्कूल ऑफ प्रोफेशनल सोशल वर्क प्रैक्टिस की स्थापना की गई। प्रारंभ में इसमें 17 चार्टर सदस्य थे। इसके अलावा कनाडा में भी दो स्कूल स्थापित हुए। आस्टिन का कहना है कि उपरोक्त कार्यक्रमों के निम्नलिखित (गुण) थे.







• ये सब निजी कार्यक्रम थे, सरकारी नहीं।


• इन स्कूलों के पाठ्यक्रम स्वयंसेवी सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं द्वारा निर्धारित किए गए थे।


• प्राथमिक स्तर पर स्नातक शिक्षा कार्यक्रम के रूप में ये स्थापित किए गए क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर अधिकांश विद्यार्थी खासतौर से महिलाएं, उदारवादी कला से संबंधित उनके पास नामांकन संबंधी मापदण्ड तथा संगठित पाठ्यक्र ये पाठ्यक्रम सामान्य रूप से दो वर्ष की अवधि के लिए थे।


• शिक्षकों के पास समाजकार्य का अनुभव था उनके लिए समाजविज्ञान की डिग्री होना जरूरी नहीं था।






• शिक्षक अपने विद्यार्थियों को स्वयंसेवी संस्थाओं अस्पतालों, सार्वजनिक विद्यालयों और बाल निर्देशन आयोग्यशालाओं में प्रकरण संबंधी कार्य करकर प्रशिक्षित कराते थे। "एसोसिएशन ऑफ ट्रेनिंग स्कूल फार प्रोफेशनल सोशल वर्क प्रैक्टिस का नाम 1927 ई. में बदलकर अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स ऑफ सोशल वर्क रख दिया गया। इस संगठन ने शैक्षिक मानदण्डों को विकसित किया। ये मापदण्ड उन निर्देशक तत्वों के समान थे जो प्रशासकीय नेतृत्व को उत्तरदाई बनाते थे तथा विश्वविद्यालय की मान्यता प्राप्त करने संबंधी मापदण्ड के रूप में क्रियाशील थे। 1932 में अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स ऑफ सोशल वर्क ने विभिन्न कोसों के लिए कम से कम एक वर्ष के पाठ्यक्रम को लागू किया तथा सिद्धांतों की पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्य भी निश्चित रूप से सम्मिलित किया गया। 


1939 में पाठ्यक्रमों कार्यक्रमों से संबंधित बजट पूर्णकालिक संकाया की। संख्या तथा पुस्तकालय की सुविधाभी मानदण्डों के अधीन सम्मिलित किए गए। 1937 ई. से क्रमश: अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स ऑफ सोशल वर्क के सदस्यों को भी अपने कार्यक्रम किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज से संबद्ध करने पड़े। 1939 से पहले के प्रचलित एक वर्षीय पाठ्यक्रम दो वर्षीय पाठ्यक्रम में परिवर्तित हो गए जो कि आगे चलकर समाजकार्य में स्नातकोत्तर डिग्री बन गया। वैसे स्कूल जिनके पास अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स ऑफ सोशल वर्क की सदस्यता पाने की योग्यता नहीं थी. उन्होंने एकजुट होकर 1942 में नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स ऑफ सोशल एडमिनिस्ट्रेशन संप बना लिया। 








इन दोनों संगठनों ने वर्ष 1950 ई. तक शैक्षिक मानदण्ड प्रकाशित किया। इन दोनों संगठनों के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए एक दूसरे समूह नेशनल काउंसिल ऑ सोशलवर्क एसोसिएशन की स्थापना की गई। यह संगठन 1952 में समाजकार्य शिक्षा का प्राधिकरण बन गया तथा वर्तमान में यह इकलौता संगठन है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में समाज कार्य विषय में स्नातक एवंपरास्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों को मान्यता प्रदान करता है। 1960 एवं 1970 के दशक में समाजकार्य शिक्षा से संबंधित संस्थाओं में वृद्धि हुईयह वृद्धि विशेष रूप से सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में हुई। बहुत से स्नातक स्तर से नीचे के विशिष्ट प्रकार के समाजकार्य कार्यक्रम सीमित संसाधनों के साथ प्रारंभ किए गए। बीएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम के लिए मानदण्ड 1974 में घोषित किया गया। इसका उद्देश्य पढ़ाई की गुणवत्ता पर नियंत्रण तथा जिम्मेदारी सुनिश्चित करना था। उसके पश्चात प्रत्येक दशक में सी.एस.डब्ल्यू.ई. द्वारा संशोधित संस्करण प्रकाशित किया जाता रहा। इसके तहत कार्यक्रमों को व्यवस्थित करने वाले निर्देश सम्मिलित किए गए जैसे किस प्रकार के संसाधनों की जरूरत है समाज कार्य अभ्यास से संबंधित शैक्षणिक विषय के मूल्यांकन के लिए मापदण्ड सामाजिक वातावरण में मानवीय व्यवहार समाजिक नीति, शोध कार्य तथा इससे जुड़े समस्त क्षेत्र इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना था कि सामाजिक एवं आर्थिक न्याय के पहलू भी समाजकार्य पाठ्यक्रम के अंतर्गत सम्मिलित होने चाहिए। साथ ही साथ संवेदनशील एवं असुरक्षित सामाजिक समूहों पर भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। 









1950 ई. से पहले समाजकार्य शिक्षा में सिर्फ दो डॉक्टरेट उपाधि से संबंधित पाठ्यक्रम थे लेकिन यद्यपि क्लीनिकल डाक्टरेट की उपाधि के लिए अन्य प्रोग्राम भी है लेकिन ये प्रोग्राम विशेष रूप से शोध संबंधी दक्षता से संबंधित है तथा ये समाजकार्य के क्षेत्र संबंधित विनों को तैयार करते हैं जो विशेष रूप से BSW और MSW स्तर तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य करते हैं। डाक्टरेट की उपाधि से संबंधित पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए एम.एस. डब्ल्यू की उपाधि होना जरूरी है परन्तु एमएसडब्ल्यू में प्रवेश हेतु बीएस डब्ल्यू की उपाधि की अनिवार्यता नहीं है। समाजविज्ञान, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान एवं मानव विकास विषय के पाठ्यक्रम के लोग भी एम एस. डब्ल्यू कर सकते हैं। उच्च स्तरीय एम. एस. डब्ल्यू पाठ्यक्रम के लिए बी एस डब्ल्यू उपाधि की आवश्यकता होती है।








संबंधित सभी क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना पड़ता है। सी.एस. डब्ल्यू ई की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 ई. तक 458 मान्यता प्राप्त बी. एस. डब्ल्यू प्रोग्राम 181 मान्यता प्राप्त एम. एस. डब्ल्यू प्रोग्राम तथा 69 डॉक्टोरल प्रोग्राम अमेरिका के कॉलेजों व विश्वविद्यालय में चल रहे थे। इन संस्थाओं में 7 हजार से ज्यादा बी. एस. डब्ल्यू के 25 हजार से ज्यादा एम. एस. डब्ल्यू के विद्यार्थी तथा 1600 डॉक्टरेट प्रोग्राम के विद्यार्थी अध्ययनरत थे। स्नातक स्तर के विद्यार्थी सबसे अधिक बाल कल्याण के क्षेत्र में कार्य करना चाहते थे। इसके बाद पारिवारिक सेवा, विद्यालय समाजकार्य को वरीयता देते थे। परास्नातक स्तर पर सर्वाधिक विद्यार्थीयों की रूचि, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में भी उसके बाद बालकल्याण परिवार सेवा तथा विद्यालय अध्ययन के कार्यों में रूचि थी।