विश्व में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in the World
विश्व में समाज कार्य का इतिहास - History of Social Work in the World
प्रशांत एशिया
समाज कार्य यूरोप के देशोयथा यूनाइटेड किंगडम ( इंग्लैंड), नीदरलैंड तथा जर्मनी और संयुक्तराज्य अमेरिका के पश्चात व्यावसायिक विषय के रूप में विश्व के सामने विस्तृत हुआ और सभी देशों की भाँति ही यहाँ भी समाज कार्य का उगम हुआ और धीरेधीरे व्यवसाय का रूप लेता गया। एशिया में समाज कार्य का प्रारंभ विभिन्न देशों में हुआ, जिनको मुख्य रूप से 4 भागों में बाँटा जा सकता है, जिसके अंर्तगत दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया पूर्व एशिया तथा मध्य एशिया है।
दक्षिण एशिया
दक्षिण
एशिया में बांग्लादेश, श्रीलंका एवं भारत में
समाज कार्यको देखा गया है। बांग्लादेश में समाज कार्य का प्रारंभ पाकिस्तान के
शासन के दौरान हुआ और उस समय बांग्लादेश में समाज कार्य नए रूप में उभर कर सामने
आया। श्रीलंका में व्यावसायिक समाज कार्य अत्यधिक धीमी गति से चला, जिसमें राजनीतिक मूलधारक राज्य वैचारिक दर्शन, धर्ममूलक
समाज एवं परंपरागत पारिवारिक प्रणाली को देखा जाता है। भारत में समाज कार्य
प्राचीन काल से ही प्रारंभ है जब दान धर्म की प्रधा के आधार पर लोगों की सहायता की
जाती थी। आज वर्तमान समय में यहां अत्यधिक परिवर्तन देखा जा रहा है, जिसके द्वारा अनेक प्रणालियों के माध्यम से अनेक क्षेत्रों में यह फैल रहा
है। दक्षिण पूर्व एशिया दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतर्गत इण्डमेशिया एवं मलेशिया में
समाज कार्य को देखा गया। इंडोनेशिया में समाज कार्य को एक व्यवसाय के रूप में 1957 में बांदुग में समाज कार्य के ो में प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रारंभ किया
गया। मलेशिया में समाज कार्य ज्ञान के बजाए सामाजिक आवश्यकताओं पर जोर देता था।
पूर्व
एशिया पूर्व एशिया के क्षेत्र में चीन एवं जापान के समाज कार्य को गया चीन में
समाज कार्य की शुरूआत मुख्यरूप से 1921 से
मानी जाती है। जब सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य की प्रक्रिया द्वारा समाज के गरीब
वर्ग को गोद लेने की परंपरा का प्रारंभ हुआ। जापान में समाज कार्य पर पश्चिमी
देशों तथा समाजवादी देशों के बीच हो रहे शीतयुद्ध के एक परिणाम स्कप इसका उद्भव
हुआ और धीरे-धीरे समाज कार्य एक व्यवसाय के रूप में विकसित होता गया।
मध्य एशिया
मध्य
एशिया क्षेत्र के अंतगत रूस के समाज कार्य को देखा गया। रूस में समाज कार्य
अत्यधिक देरी से प्रारंभ हुआ और इसकी स्थिति दयनीय थी। जिस रूप में समाज कार्य
यूरोपीय देशों में देखा जाता है एवं जिस प्रकार से इन देशों में समाज कार्य को
मान्यता प्राप्त है, उस प्रकार से कभी भी
सोवियत संघ में समाज कार्य का रूप नहीं देखा गया। तत्पश्चात लंबे समय से बने
आर्थिक संकट और बढ़ते सामाजिक विभेदीकरण को ध्यान में रखते हुए 1991 में शैक्षणिक कार्यक्रम के रूप में समाज कार्य को प्रारंभ किया गया।
प्रशांत क्षेत्र में समाज कार्य का विकास मुख्यरूप से ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड
में देखा गया। ऑस्ट्रेलिया में समाज कार्य शुरूआत की एक ऐतिहासिक घटना है जिसमें
कैथोलिक धर्मों के द्वारा देखभाल, महिलाओं के लिए सेवाएं
बीमार तथा अनाथ हेतु सेवाओं पारिवारिक कल्यमा सेवाएँ सामाजिक न्याय तथा वकालतो
मुद्दों हेतु सांप्रदायिक सेवाओं का विकास किया। न्बोलैंड में समाज कार्य को काफ़ी
समय तक कोई जानता नहीं था तत्पश्चात इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए
अफ्रीका में समाज कार्य का उद्भव और विकास
अफ्रीका
के ज्यादातर समाज कार्य अमेरिका के समाज कार्य पर आधारित थे और उसी ज्ञान के आधार
पर संचालित किए जाते थे। किंतु इस आधार पर अफ्रीका के समाज कार्य को बहुत सारी
नाकामी मिली| अफ्रीकी देशों में वर्तमान में समाज
कार्य अभ्यास को सामाजिक विकास की अपेक्षा व्यक्ति के विकास के आधार पर संचालित
किया जा रहा है और व्यक्ति के सामाजिक स्तर को छोड़ कर उसके व्यक्तिगत स्तर पर
ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
वर्तमान
समय में समाज कार्य को करने का तरीका बदलता जा रहा है। अब विभिन्न पाठ्यक्रमों को
समाज कार्य के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। पाठ्यक्रमों में विभिन्नप्रणालियों
को शामिल कर पाठ्यक्रम को सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे व्यक्ति
की समस्या का समाधान उचित प्रकार से खोजा जा सके। अफ्रीका के लगभग 13 देशों में भी इसी प्रकार से शिक्षण का कार्य किया जा रहा है। जो समाज
कार्य की विभिन्न डिग्री एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के आधार पर संचालित है। अफ्रीका
के कुछ प्रमुख देशों में समाज कार्य का उद्भव और विकास किस प्रकार हुआ और वर्तमान
समय की है। सरकार की क्या भूमिका रही है? उक्त इकाई के
माध्यम से यह तथ्य सामने आऐंगे जिनका विस्तृत वर्णन निम्न प्रकार से प्रस्तुत किया
जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में लगभग प्रतिशत अश्वेत और 13%
प्रतिशत श्वेत और 9% प्रतिशत बर्फ शंकर वर्ण (मिश्रित नस्ल
है अश्वेत लोगों की अधिकता होने के कारण भी और लंबे समय तक अश्वेतों पर श्वेतों का
राज रहा है, जिसके कारण वहाँ के अश्वेत अफ्रीकी शोषित होते आ
रहे थे। अफ्रीका में 1980 के दशक से लेकर 1990 के दशक तक जातीय प्रथा को मिटाने का प्रयास अफ्रीकी सरकार ने किया था।
उसके बाद भी अफ्रीका में अश्वेत-श्वेत का भेदभाव आज भी विद्यमान है, जिसको वहाँ के लोग जीवन का एक सत्य मानने लगे और इस मानसिक दासता से उनको
मुक्ति नहीं मिल पा रही थी। इसलिए 2001 में अफ्रीका में आयु
दर की जनगणना की गई थी जिसके अनुसार आज भी श्वेतों की आयु 73
वर्ष और अश्वेतों की आयु 57 वर्ष थी। इसके साथ-साथ श्वेतों
में शिशु मृत्युदर प्रति 1000 शिशु जन्म में 13 जो कि तुलनात्मक रूप से अश्वेतों में 57 प्रति हजार
है। साक्षरता के स्तर का यदि आंकलन किया जाए तो श्वेतों में साक्षरता का स्तर 100 प्रतिशत जबकि अश्वेतों में साक्षरता का स्वर 50
प्रतिशत है। (माइक्रोसॉफ्ट एकार्टा इनसाइक्लोपीडिया 2001 )।
दक्षिण
अफ्रीका में समाज कार्य के विकास का अवलोकन किया जाए,
तो इसका विकास 1 7वीं शताब्दी के मध्य ही नजर
में आता है, जिसका उद्देश्य सभी के हितों को ध्यान में रखकर
उनका सामाजिक कल्याण करना था। इस तरह दक्षिण अफ्रीका में अनेक प्रकार के समाज
कल्याण के लिए विभागों की स्थापना की जाने लगी। जैसे कि 1657
में डच सुधार कंपनी (डी. आर. सी) की स्थापना की गई, जिसके
द्वारा उन कृषकों को सहायता प्रदान की जाती थी, जो कि अपने
फसलों के नष्ट होने जाने के कारण परेशान थे। और इस तरह डी. आर.सी. तथा डी.ई.आई.सी.
(डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने विभिन्न विचारों के कारण निर्धन अफ्रीकियों की सेवा करना
प्रारंभ कर दिया था। ठीक उसी प्रकार से श्कों के लिए भी उस संस्था के द्वारा
सहायता प्रदान की जाने लगी पर उससे भी निर्धन अफ्रीकियों की सामाजिक एवं आर्थिक
कठिनाई बरकरार रही और इस तरह जब वहाँ के अश्वेत लोग बाहर काम करने जाने लगे तो
उनको परिवार लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके कारण भी
वह लोग गरीब होते गए। इन सब परेशानी को ध्यान में रखते हुए वहाँ के अश्वत लोगों,
विशेषकर शहरी इलाकों की महिलाओं ने मिलकर एक संघठन का निर्माण किया
जो उन्होंने अपने स्वयं बलबूते पर बनाया था और उन्होंने इसका गठन इसलिए किया कि वह
निर्धनता को खत्म कर सके। उन्होंने पुन एक 'स्टॉक फेल'
का गठन किया, जो सर्वाधिक ज्ञान और स्वसहायता
का संगठन था इसमें लगभग सात महिलाएँ थी, जिसमें से प्रत्येक
ने कुछ ना कुछ दान किया था। और इस तरह जब उनको अपने संकट के समय जरूरत महसूस होती
थी तो वे अपने निधियों का उपयोग करती थी। इस प्रकार वहाँ अनेक समिति और संगठन का
निर्माण होने लगा।(क्राउन तथा नेको, 2005) ज्ञान 1930 में एक औपचारिक समाज कल्याण प्रणाली भी इसमें समाहित हुई इसके साथ ही
निर्ध समस्या की जाँच हेतु कानेंगी कमिशन ने 1938 में
राष्ट्रीय सरकारी समाज कल्याण विभाग की स्थापना का नेतृत्व किया। इस तरह जब हम
आधुनिकता की बात करे तो अब नई समाज कल्याण नीति अधिकांश आधुनिक सामाजिक समस्याओं
को संबोधित करती है और बगैर किसी जातीकास्तीय पृष्ठभूमि के भेदभाव के सभी के हितों
पर ध्यान देती है क्राउन तथा नेको, 2005)
अफ्रीका में समाज कार्य को और बेहतर बनाने का श्रेय समाज कल्याणार्थ श्वेत पत्र को जाता है, जिन्होंने 1997 में समाज कार्य अभ्यास को दिशा दी। इसके पश्चात अफ्रीका में समाज कार्य का एक अभ्यास और प्रशिक्षण के रूप में प्रयोग किया जाने लगा। इस संगठन का लक्ष्यथा कि अफ्रीका में समाज कल्याण को एक व्यावसायिक समाज कार्य के नाम से जाना जा सके ताकि समाज कार्य व्यवसाय की चुनौतियों को एक संघर्ष के रूप में अफ्रीका के लोग स्वीकार करें। इस तरह दक्षिण अफ्रीका में समाज कार्य कई रूप में सामने आने लगा जैसे कि गरीबी बेरोजगारी, वृद्ध, मानवाधिकार, बाल अधिकार, अप्रवासन, शरणार्थी, एच.आई.वी./एड्स, निरक्षरता तथा हिंसात्मक अपराध, खासतौर से यौन शोषण, हत्या, बाल दुराचार यौन प्रताड़ना आदि। इस स्थिति में दक्षिण अफ्रिका में समाज कार्य परिषद की स्थापना की गई। पूरे अफ्रीका में समाज कार्य के इतिहास के बाद भी दक्षिण अफ्रिका में सामाजिक कार्यकर्ता का एक ऐसा व्यावसायिक संगठन बना, जो सामाजिक कार्यकर्ता का एक समूह बनाने में लगा रहता है। इस प्रकार ये सारे कार्यकर्ता सामाजिक कार्य में भाग लेते हैं और दक्षिण अफ्रीका में समाज कार्य को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील है।
जब
जिम्बाम्बे सरकार ने अपने आप को गुलामी से आजाद कराया उसी वक्त समानता के साथ
विकास के समाजवादी राज्य नियोजन पर भी बल दिया। इसने शिक्षा,
स्वास्थ सुविधाएँ संरक्षण यातायात, ऊर्जा,
बुनियादी खाद्यों, आवास, उपचार सुविधाएँ आदि लिए राज्य अनुदान की योजना तैयार की ( इमदाद दी
मोल्डोबान तथा मोयो 2007) 1993 में सामाजिक सुरक्षा प्रणाली
को भी लागू किया गया जिसमें वृद्धावस्था, अक्षमता तथा
उत्तरजीविता पेंशन, मातृत्व लाभ तथा 90
दिनों तक नियमित आग का 70 प्रतिशत तथा इसी प्रकार के अन्य
प्रावधान किए गए 1990 के दशक में जिम्बाम्बेमें आर्थिक
समस्याओं का अनुभव भी किया गया (मोयो2007 पेजख, 80)l
जिम्बाम्बे
के राजनैतिक दलों संयुक्तरूप में एक विशेष प्रकार से मार्क्सवादी लगाव का त्याग कर
दिया गया और जिम्बाम्बे में नई आर्थिक नीति का अनुगमन करने का निर्णय लिया गया
जिससे समाज कार्य के क्षेत्र में एक लाभकारी प्रयास सामने आया। इस तरह से
राष्ट्रवादी सरकार द्वारा बनाई गई पुरानी कल्याणकारी संरचना को नई आर्थिक नीति
द्वारा आकार और प्रभाव में घटा दी गई। इस तरह से तात्कालिक समस्याओं जैसे गरीबी बेरोजगारी,
राजनीतिक तथा आर्थिक असुरक्षा एवं स्वास्थ्य संरक्षण का अभाव जैसी
समस्याओं को समाज कार्य प्रणाली के माध्यम से समस्या समाधान के लिए तैयार किया गया,
जिससे समाज कार्य का प्रभावी रूप सामने आया। इन्हीं प्रयासों के
आधार पर 1936 में जिम्बाम्बे समाज कार्य व्यवसाय को प्रारंभ
किया गया, जिसका उद्देश्य सामाजिक समस्याओं से निपटने के लिए
कार्यकताओं को शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रदान कराना था। 936
में ही जिम्बाम्बे सरकार द्वारा समाज कार्य अधिकारी की आवश्यकता को महसूस किया गया
और उन्होंने ब्रिटेन से एक समाज अधिकारी की नियुक्ति कर ली जो कि बाल संरक्षण तथा
दत्तक ग्रहण अधिनियम के अंतर्गत कार्य करता था। और इस प्रकार जिम्बाम्बे में समाज
कार्य व्यवसाय को प्रारंभ किया गया। इसी क्रम में 1964 में
जेसस फादर्स ऑफ रोमन कैथोलिक चर्च ने सामाजिक सेवा विद्यालय की स्थापना की। 1969 में स्कूल ऑफ सर्विसेज का नाम परिवर्तित कर स्कूल ऑफ सोशल वर्क कर दिया
गया। 1975 में समाज कार्य में चार वर्षीय स्नातक उपाधि
पाठयक्रम को प्रारंभ किया गया, जिसमें बी.एस. डब्ल्यू में
आवासीय समाज कार्य, औद्योगिक समाज कार्य इत्यादि विशेषीकरण
के विषयों को शामिल किया गया। आगे चलकर स्कूल ऑफ सोशल बर्क द्वारा अनेक नए-नए
पाठयक्रमों, जैसे- 1980 में युवा
प्रमाण पत्र 1982 में नैदानिक समाज कार्य 1983 में समाज कार्य में एम.ए. तथा 1985 में सामाजिक
पुनर्वासन में एमए, पाठ्यक्रमों को प्रारंभ गया। अत: इस
प्रकार जिम्बाम्बे में समाज कार्य के क्षेत्र में बढ़ोतरी की और वहाँ की प्रमुख
समस्याओं के निराकरण हेतु प्रयास किया।
ईजिप्त
ईजिप्त
गणराज्य,
जो कि 1958 से लेकर 1971
तक संयुक्त अरब गणराज्य का था, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका में
स्थित है। ईजिप्ट में स्वास्थ्य संगत प्रणाली के कुसंगत होने के कारण और विभाजन
में असमान वितरण होने के कारण स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक समस्याएं उत्पन्न
हुई। इन समस्याओं से निपटने हेतु ईजिप्टमें अनेक कल्याणकारी कार्यक्रमों चलाए गए,
जिसका संचालन बीमा एवं सामाजिक मामलों के मंत्रालय एवं धार्मिक
मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित किए जाते हैं। स्थानीय जकात समितियों के द्वारा
निधि को एकत्र कर नासिकर सामाजिक बैंक (एन.एस.बी.) को भेजा जाता है, जिससे अनेक प्रकार के कल्याणकारी कार्यों में मदद मिल सके। इस प्रकार से
समाज कार्य विषय ने अपनी उपयोगिता को सार्थक साबित किया एवं सरकार द्वारा समाज
कार्य विषय का विकास किया जाने लगा। 1935 में पहली बार
ईजिप्ट में सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यम में रखते हुए समाज कार्य में व्यवसाय
आधारित पाठ्यक्रमों को प्रारंभ किया गया, जो कि अमेरिका एवं
इंग्लैंड के समाज कार्य की भाँति ही संचालित होता था। लगभग 13 विश्वविद्यालयों में समाज कार्य आधारित पाठ्यक्रमों को ईजिप्त में
संचालित किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से अजहर विश्वविद्यालय
का नाम सर्वप्रमुख है। 1935 में हेल्वाना विश्वविद्यालय
द्वारा समाज कार्य को प्रारंभ किया गया। 1936 में शोध एवं
सेवाओं के क्षेत्र में विकास होना प्रारंभ हो गया। 1946 में
शिक्षा मंत्रालय द्वारा महिला छात्राओं हेतु एक उच्चर संस्थान की स्थापना की गई।
तत्पश्चात यह कार्यक्रम 1975 में महिला एवं पुरुष दोनों के
लिए समाज कार्य संकाय के रूप में स्थापित हुआ। वर्तमान समय में हेल्वाना
विश्वविद्यालय द्वारा समाज कार्य की प्रमुख प्रणालियों सामाजिक वैयक्तिक सेवा
कार्य, सामाजिक समूह कार्य एवं सामुदायिक संगठन को लेकर
शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। साथ ही सामाजिक नियोजन विभाग तथा समाज कार्य विभाग
में एमए से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई कराई जा रही है। ऐलेग्जेंड्रिया विश्वविद्यालय
का सामाजिक अध्ययन संस्थान समाज कार्य में एम.ए. से लेकर पीएच. डी तक की उपाधि
प्रदान करता है (रगब, 1995)| 1970 में में इस्लामी अध्ययनों
हेतु अल-अजहर विश्वविद्यालय का निर्माण किया गया है। अत: इस प्रकार से ईजिप्ट में
समाज कार्य को विभिन्न रूपों में देखा जा सकता है, जिसने
वर्तमान समय में समाज कार्य के क्षेत्रों में अत्यधिक बढ़ोत्तरी की है। दक्षिण
अफ्रीका के जिम्बाम्बे एवं ईजिप्ट के अतिरिक्त बोत्सना, लीबिया
इत्यादि देशों में भी समाज कार्य के क्षेत्र में शिक्षण प्रशिक्षण संबंधी कार्यों
को किए जा रहे हैं।
अफ्रीका
के मध्य पूर्व देशों में समाज कार्य अभ्यास का विकास अफ्रीका के मध्य-पूर्व के
सारे देश एशिया के भाग हैं। एशिया अफ्रीका और यूरोप की सीमाएँ जहाँ मिलती है,
वहीं मध्य पूर्व स्थित है। इन क्षेत्रों में समाज कार्य का विकास
स्वाधीनता के लिए संघर्ष और उपनिवेशवाद की समाप्ति से संबंधित था। इसे दो भागों
में विभक्त कर सकते है पहला उत्तरी पाठ्यवस्तु (इसके अंतर्गत सिद्धांतों तथा
प्रणालियों का समाज कार्य शिक्षण में समावेश किया जाता था) और दूसरा उत्तर से आए
शिक्षक और अभ्यासकर्ता (इसके अंतर्गत उत्तर में पढ़े हुए और लौट कर शिक्षकों तथा
अभ्यासकर्ताओं के रूप में काम करने वाले वृत्तिक लोगों के प्रभाव से है। इन्हीं दो
मूलों के माध्यम से भी उत्तरी समाज कार्य प्रारूपों का प्रभाव मध्य-पूर्व के देशों
में पाया गया। मध्य पूर्व के देशों में पिछले कुछ दशकों में समाज कार्य का स्वदेशीकरण'
और 'समाज का इस्लामी प्रबोधन (पुनरानुकूलन के
विषय में इन सब देशों में परिचर्चाएं प्रारंभ हुई है और इन परिचचाओं और विमर्शों
को वास्तविकता प्रदान करके लिए यहाँ लगातार प्रयास किए जा रहे है। इन देशों में
मुस्लिम समुदायों इस्लामी धर्म के द्वारा समाज कार्य को सीमित करने और समाज कार्य
के परीक्षित ज्ञान से संबंधित विश्वदृष्टिकोण को समेकित करने की चेतावनी है। अतः
हम मध्य-पूर्व के देशों में समाज कार्य विषय के विकास पर आगे चर्चा करेंगे।
टर्की
गणराज्य 29 अक्टूबर 1923 को प्रथम विश्व युद्ध के परिणामस्वरूप
सारे साम्राज्य के ध्वस्त होने के बाद ओडोमान साम्राज्य के एक भाग के रूप में
अस्तित्व में आया। 1928 में टर्की एक धर्मनिरपेक्ष राज्य
बना। यहाँ महिलाओं को मताधिकार 1934 में प्राप्त हुआ और 1946 में एक बहुदलीय प्रणाली स्थापित हुई। यहाँ की संपूर्ण जनसंख्या का
प्रतिशत सुन्नी मुसलमान है जबकि संपूर्ण जनसंख्या का मात्र) । प्रतिशत ईसाई है।
यहाँ पर प्रौढ़ जनसंख्या का 96.7 प्रतिशत 2001 तक साक्षर था।
टकों
में समाज सेवाओं का एक लंबा इतिहास रहा है। इस कार्य मे ओट्टोमानों की धार्मिक
स्थापनाओं तथा कतिपय वृत्तिक संगठनों ने हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। इस देश में1923 में स्वाधीनता के कारण सामाजिक सेवाओं के मसले को सार्वजनिक संस्थाओं ने
अपने कार्यभार में सम्मिलिकर लिया है। यहाँ पर बाल सुरक्षा अभिकरण और समाज सेवाओं
का महानिदेशालय प्रांतों में अपने सामयिक निदेशालयों के साथ विशालतम सामाजिक
सहायता संगठन है। इस संगठन का कार्य किशोरों बच्चों वृद्धों और अक्षम व्यक्तियों
साथ ही विभिन्न श्रेणियों के गृहों वाले परिवारों, देखभाल
केंद्रों, गोद लेने वाले केंद्रों तथा इसी प्रकार के अन्य को
सहायता प्रदान करते हैं।
संयुक्त
राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात विकासशील देशों में सामाजिक सेवाओं को
बढ़ाने के लिए प्रभावित किया, जिसके कारण संयुक्त
राष्ट्र के कुछ सामाजिक कार्यसलाहकार टर्की आए और 1957 में
सामाजिक सेवाओं से संबंधित मंत्रालयासार्वजनिक और निजी स्वैच्छिक संगठनों के
प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक के पश्चात यह महसूस किया गया कि समाज कल्याण
क्रियाकलापों को अधिकाधिक जारी रखने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं को शिक्षित करने
की आवश्यकता है, जिसके पञ्चात टर्की में स्नातक स्तर पर चार
वर्षीय प्रशिक्षण के लिए 1961 में सामाजिक सेवा अकादमी'
की स्थापना की गई। इसमें सलाहकार के रूप में डच प्राविधिक सहायक
आयोग तथा फुलब्राइट आयोग के सदस्य थे।
1983 में "समाज सेवा अकादमी' ने 'हैसेटेप विश्वविद्यालय और इसने समाज कार्य विद्यालय नामः प्राप्त किया।
इसके पश्चात टर्की में पहली बार विद्यार्थी समाज कार्य में स्नातकोत्तर और पीएचडी
का अध्ययन करने के योग्य हुए। इसके पश्चात कई विश्वविद्यालयों में समाज कार्य का
अध्ययन प्रारंभ किया गया। जैसे 2002 में अंकारा स्थित बोसकेत
विश्वविद्यालय जिसने पंचवर्षीय पाठ्यक्रम जारी रखा।
सऊदी अरब
सऊदी
अरब को मध्य-पूर्व का राजतंत्र और इस्लाम की जन्म भूमि के रूप में जाना जाता है।
यहाँ का शासकीय तंत्र पवित्र शरी-अहके इस्लामी कानून पर आधारित है सऊदी अरेबिया की
सभी आबादी मुसलमान है इनकी राष्ट्रभाषा अरबी है यह देश विश्व के पेट्रोलियम
संग्रहक में सर्वाधिक 26 प्रतिशत) है। इस कारण
यह पेट्रोलियम के सर्वाधिक निर्यातक की श्रेणी में आता है। पेट्रोलियम निर्यातक
देशों के संगठन (ओ.पी.ई.सी) (ओपेक) में खास मत रखता है, जिसका
कि अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्य निर्धारण में खास प्रभाव है।
सऊदी
अरब में सांस्कृतिक पर्यावरण काफ़ी रूढ़िवादी है। महिला और पुरुष को सार्वजनिक
कार्यक्रमों में साथ-साथ भाग लेने की अनुमति नहीं है। बाहर से काम करने आए मजदूर
खास कर महिलाओं की स्थिति यहाँ दयनीय है। यहाँ की मुसलमान महिलाओं को रूदि और
अशिक्षा के साथ रखा जाता है। साथ ही इन्हें उपेक्षा और घृणा के रूप समझा जाता है।
यहाँ बुनियादी मानवाधिकारों को भी नजर जाता है।
सऊदी
अरब में 'जकात' कल्याण के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अवधारणा
है, जिसका तात्पर्य खैरात या एक स्वैच्छिक संपदा-कर, जो कोई भी मुसलमान अपनी सामाजिक जिम्मेदारी की स्वीकृति में अदा करता हैं,
यह एक देश में एक अनिवार्य कर है। यह निर्धारित राशि का 2.5 प्रतिशत के वार्षिक दर पर दिया जाता है, जिसका व्यय
सामाजिक कल्याण सेवाओं के लिए किया जाता है। यहाँ विकास कल्याण योजनाओं के तहत
सामाजिक कल्याण का कार्य किया जाता है।
सऊदी
अरब में गांवों में खासतौर पर ध्यान दिया जाता है। नगरों तथा कस्बों वाले कम
विकसित जिलों के समुदायों के निर्धनतम भागों के लोगों पर विशेष ध्यान देकर उनका
जीवनस्तर सुधारने का प्रयास किया जाता है। सऊदी अरब में भी समाज कार्य की शिक्षण
व्यवस्था रही है। राज्य में स्नातक आधारभूत शिक्षण स्तर है। समाज कार्य की उपाधि
समाजकार्य विभाग और समाजशास्त्र या समाज कार्य विभाग के माध्यम से प्रदान की जाती
है। उदाहरणस्वरूप समाज कार्य विभाग, इमाम
विश्वविद्यालय रियाध, हर वर्ष चालीस बी.एस.डब्ल्यू. की उपाधि
प्रदान करता है। सामाजिक अध्ययन विभाग, राजा सऊद
विश्वविद्यालय, रियाध प्रतिवर्ष 170
स्नातक छात्रों को उपाधि प्रदान करता है।
इजराइल
इजराइल
1948 में ब्रिटिश हुकूमत से स्वतंत्र हुआ। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन
नाजियों द्वारा यूरोप के लगभग 6 मिलियन (विश्व के एक तिहाई
यहूदी जनसंख्या से अधिक को मार डाला। नाजियों द्वारा किए गए जनसंहार से फिलीस्तीन
में स्वशासन की माँग व्यापक रूप से भड़क उठी। ब्रिटेनवासियों के यहूदी लोगों के
अनेकानेक आतंकवादी हमलों से मुखातिब युद्ध के सात वर्षों के परिणामस्वरूप 1947 को ब्रिटेन ने फिलीस्तीन के यहूदी तथा अरब राज्यों में कब्जा रखते हुए
फिलीस्तीन को आजाद करने का निर्णय लिया। अरबों के विभाजन योजना का विरोध करने के
कारण स्वाधीनता संग्राम प्रारंभ हो गया जिससे अरब यहूदी राज्य स्थापना में असफल
रहा। इजराइल में अब लगभग 81 प्रतिशत यहूदी और 19 प्रतिशत अरब है हिब्रू एवं अरबी यहाँ की राष्ट्रभाषा है। बीसवीं सदी के
पूर्वार्द्ध के दौरान इजराइल एक राज्य के रूप में विकसित होने के पहले औपचारिक
सामाजिक कल्याण सेवाएं विकसित कर चुका था। अतः इन्होंने अस्थायी सरकार के मातहत 1931 मे समाज कल्याण विभाग की स्थापना के लिए एक अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता,
हेनरिहा जोल्ड को बुलाने का निर्णय लिया। इन्होंने सामाजिक कार्य के
लिए कल्याण विभाग पर प्रशिक्षित कार्मिकों को रखने के लिए दबाव डाला। अतः इसके लिए
एक वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 1934 में प्रारंभ किया।
इजराइल में प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षक अमेरिका तथा जर्मनी में अरब देशों और से आए
थे। स्वतंत्रता संग्राम दौरान 1948 में अरब देशों और
होलोकास्ट के शरणार्थियों ने इसकी सीमा द्वारों पर शरणार्थियों की बाढ़ सी ला दी।
इजराइल
युवा देश होने के कारण सीमित संसाधनों के कारण संघर्षरत था। साथ ही सीमित
प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ था।
देश में एक ही समाज कार्य प्रशिक्षण केंद्र था। अतः अधिक सामाजिक कार्यकर्ता रखने
पर बल देने हेतु समाज कार्य प्रशिक्षण के लिए फ्रांस और अमेरिका जाने पर बाध्य
किया गया। दस वर्षों के पश्चात 1958 में, जेरुशलम में हिब्रू विश्वविद्यालय ने इसराइल में प्रथम विश्वविद्यालय
आधारित समाज कार्य विद्यालय खोला। एलिन ब्लैकी जो अमेरिका से समाज कार्य में उच्च
शिक्षा प्राप्त कर के वापस आए थे बीआईएस प्रवेश क्षमता का बी. एस. डब्ल्यू
कार्यक्रम प्रारंभ किया। इसके पश्चात इन्होंने समाज कार्य आधारित एम.एस.डब्ल्यू.
कार्यक्रम भी प्रारंभ भी किया। इन्होंने इसे धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए
विश्वविद्यालय आधारित चार समाज कार्य विद्यालय प्रारंभ किए जैसे समाज कार्य
विद्यालय, तेल अवीव विश्वविद्यालय; समाज
कार्य विद्यालय इलोन विश्वविद्यालय समाज कार्य विद्यालय, हाइफा
विश्वविद्यालय और समाज कार्य विभाग, बेन गुरियन
विश्वविद्यालय
निष्कर्ष
समाज कार्य ने संपूर्ण विश्व में अपनी अमिट छाप को समाज के सामने प्रस्तुत किया है, जिसमें दुनिया भर के तमाम देश शामिल हो गए है। अफ्रीका एवं मध्यपूर्व के समस्त देशों में समाज कार्य का उद्गम बड़े ही सरल रूप में सामने आया था, परंतु समय के साथ साथ इनमें दिन-प्रतिदिन बदलाव देखने को मिल रहा है। अफ्रीका एवं मध्यपूर्व के जिन तमाम देशों का हमने जिक्र किया है, उसमें इकाई को दो भागों में बांटकर इसे समझाने का प्रयास किया है जो कि अफ्रीका में समाज कार्य का उद्भव और विकास और अफ्रीका के मध्य पूर्व देशों में समाज कार्य अभ्यास का विकास के रूप में है। अफ्रीका के ज्यादातर समाज कार्य अमेरिका के समाज कार्य पर आधारित था और उसी ज्ञान के आधार पर संचालित किया जाता था। किंतु इस आधार पर अफ्रीका के समाज कार्य को बहुत सारी नाकामी मिली। अफ्रीकी देशों में वर्तमान में समाज कार्य अभ्यास को सामाजिक विकास की अपेक्षा व्यक्ति के विकास के आधार पर संचालित किया जा रहा है और व्यक्ति के सामाजिक स्तर को छोड़कर उसके व्यक्तिगत स्तर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अफ्रीका के प्रमुख देशों जैसे दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे एवं इंजिष्ट जैसे देशों में समाज कार्य विभिन्न प्रकार से किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में समाज कार्य का उद्देश्य सभी के हितों को ध्यान में रखकर उनका सामाजिक कल्याण करना है। इस तरह दक्षिण अफ्रीका में अनेक प्रकार के समाज कल्याण के लिए विभागों की स्थापना की जाने लगी। जिम्बाम्बे जिम्बाम्बे में गुलामी के पश्चात शिक्षा स्वास्थ संरक्षण, यातायात ऊर्जा बुनियादी खाद्यों आवास, जल-मल उपचार सुविधाओं तथा इसी प्रकार की अन्य के लिए क तैयार की गई.
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